Lapis lazuli Buddha, भैषज्यगुरु वैदूर्यप्रभाराज Bhagwan Buddh. #bhakti #peacefulchants #mantra #mahayana #mahayanabuddhism
ॐ नमो... भैषज्यगुरु वैदूर्यप्रभाराज भगवान बुद्ध...
तथागताय... अर्हते... सम्यक्संबुद्धाय॥
(ॐ शान्तिः... ॐ शान्तिः... ॐ शान्तिः...)
पूर्व दिशा में लोक विराजत, वैदूर्य-निर्भासा नाम।
जहाँ तथागत भैषज्यगुरु, पूरण करते सबके काम।
तप कर कंचन काया पायी, वैदूर्य मणि सा है शरीर,
कोटि सूर्य की आभा लिए, हरते जन-जन की पीर।
ॐ नमो... भैषज्यगुरु वैदूर्यप्रभाराज भगवान बुद्ध!
महाप्रणिधान तुम्हारे, हरें सकल जग के सब।
ॐ नमो... भैषज्यगुरु वैदूर्यप्रभाराज भगवान बुद्ध!
बोधिचर्या के पावन पथ पर, जब विचरत भगवान,
भैषज्यगुरु वैदूर्यप्रभाराज भगवान बुद्ध ने, लिए महाप्रणिधान।
बारह प्रण ले कहा उन्होंने... सुन लो सकल जहान...
(सुन लो सकल जहान...)
प्रथम प्रतिज्ञा, देह प्रभा से, लोक सभी मैं दीप्त करूँ,
बत्तीस लक्षण युक्त सभी हों, ऐसा मैं संकल्प धरूँ।
दूजी, काया विमल वैदूर्य, सूर्य-चन्द्र से अधिक ललाम,
तीजी, प्रज्ञा-उपाय से, दूँ अक्षय भोग और विश्राम।
चौथी, जो भटके मार्गों में, उनको बुद्धयान पे लाऊँ,
बोधिसत्व के पथ पर उनको, निज करुणा से मैं चलाऊँ।
पाँचवीं, शील अखंड रहे सब, पाप कर्म से मुक्त रहें,
छठी, न कोई विकलांग हो, सुंदर काया-रूप लहें।
सातवीं, व्याधि मिटे सब तन की, दरिद्रता का नाम न हो,
निरोगी काया, धन-धान्य से, सुखी सकल संसार हो।
आठवीं, जो नारी दुख पाती, स्त्री-योनि से मुक्ति चाहे,
नाम सुने तो पुरुष देह पा, बोधि-मार्ग में वो जाए।
नाम तुम्हारा जो भी ध्याता, दुख उसका मिट जाता है!
अकाल मृत्यु और राज-दण्ड से, अभय-दान वो पाता है!
ॐ नमो... भैषज्यगुरु वैदूर्यप्रभाराज भगवान बुद्ध!
नवीं, मार का जाल काटूँ, मिथ्या दृष्टि दूर करूँ,
दसवीं, बंधन और कारा से, भय-मुक्त कर त्राण भरूँ।
ग्यारहवीं, भूख से जो तड़पे, भोजन उत्तम मैं दे दूँ,
फिर धर्म-रस पान कराकर, तृप्त उन्हें मैं कर लूँ।
बारहवीं, निर्वस्त्र जनों को, दिव्य वस्त्र और रत्न मिले,
गायन-वादन, गंध-माल से, मन उनका उपवन सा खिले।
किंभीर, वज्र और मेखिल रक्षक, बारह यक्ष खड़े तैयार,
जो धारेगा नाम प्रभु का, उसकी रक्षा बारम्बार!
न दुर्गति, न नरक का भय, न ही प्रेत की योनि हो,
बुद्ध-क्षेत्र में जन्म मिले, जहाँ वैदूर्य की सोनी हो।
हे भैषज्यगुरु! हे वैद्यनाथ!
शरण में ले लो, दीनानाथ।
(बुद्धं शरणं गच्छामि...)
(धम्मं शरणं गच्छामि...)
(संघं शरणं गच्छामि...)
(तद्यथा: ॐ भैषज्ये भैषज्ये महाभैषज्ये... राजसमुद्गते स्वाहा...)
ॐ शान्तिः... ॐ शान्तिः... ॐ शान्तिः...
Информация по комментариям в разработке