🏹जय जोहार जय आदिवासी 🏹
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झाबुआ अंचल के राजा कसूमर डामोर ने भगौरिया पर्व की शुआत राजधानी भगोर में इस उत्सव को सन् १००९ में प्रारंभ किया था और प्रति वर्ष मनाने से राजा कसूमर डामोर ने भगौर से भगौरिया नामांकरण किया राजा कसूमर डामोर भगौरिया उत्सव के संस्थापक थे।
राजा कसूमर डामोर अपने परिवार के साथ एक उत्सव मनाने भगोर के मैदानी क्षेत्र में भील प्रजा समूह के साथ जाया करते थे।
यह उत्सव लगभग सन् १००९ के आसपास की बात है। जब भील प्रजा भगोर में चारों दिशा के गाँव से चलकर यह पर्व हर्षउल्लास के साथ मनाने आया करते थे।
जिसमें सभी वर्ग के लोग उतसाह से भाग लेते थे।
खासकर युवक युवतीयाँ आकर्षक परिधान सोना-चाँदी के गहनों से लदी होती थी और सजधज कर उत्सव का आनंद उठाती थी।
हर गाँव के भील युवक अपने गाँव का बड़ासा मांदल, थाली बजाने लाया करते थे।
मादल की थाप पर भील युवक युवतीयाँ बाहों में बाहे डाल कर आमने-सामने नाच गान प्रस्तुत किया करते थे।
हजारों की संख्या में भील युवक अपना प्रिय वाद्य बांसुरी की सुरीली आवाज में बजाकर वातावरण को मोहक बना देते थे।
भील लोग आकर्षक वेशभूषा के साथ मादल, थाल, बांसुरी, गोफन, फलीया और तीर कमान के साथ बड़ी संख्या में उपस्थित होते थे ।
भील युवक भीली शैली में सफेद रंग की छोती को
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