सब तुझसे है, तू ही मुझमें है |
सा रे... गा... पा... धा... पा... गा... रे... सा...
सा रे गा... गा पा धा... धा पा गा रे...
सा रे गा सा रे गा पा धा पा गा रे सा...
गा पा धा... धा पा गा रे... सा...
सा रे गा पा धा धा पा गा रे सा...
सृष्टि का मूल तू, जीवन की धारा तू,
कण-कण में बसा हर एक सहारा तू।
तेरी ही छाया से जग ये सँवरा है,
हर रूप में तू ही, सब तेरा नज़ारा है।
सब तुझसे है, तू ही मुझमें है,
मुझसे ही तू, न जाने ये कैसा खेल है।
सब तुझसे है, तू ही मुझमें है, ये जग सारा तेरा ही रूप है।
मैं तू से जुदा नहीं एक क्षण भी, यही ज्ञान, यही स्वरूप है।
जब जाना कि सब कुछ तुझसे ही है,
मन बोला – अब डर किससे भी है।
बुद्धि ने कहा – “वो तू ही मैं हूँ”,
हृदय ने कहा – “अब बस तू ही रहूँ।”
जो जान गया, वही भजने लगा,
जो भजने लगा, वो तू बन गया...
सब तुझसे है, तू ही मुझमें है, ये जग सारा तेरा ही रूप है।
मैं तू से जुदा नहीं एक क्षण भी, यही ज्ञान, यही स्वरूप है।
‘मैं’ मिट जाए, ‘तू’ रह जाए,
बस एक ही स्वर हर ओर छाए।
हवा तेरी, अग्नि तेरी, जल तेरा,
मन मेरा नहीं, ये तन भी तेरा।
जब सब कुछ तेरा माना मैंने,
तो पाया तुझमें खुद को मैंने...
सब तुझसे है, तू ही मुझमें है, ये जग सारा तेरा ही रूप है।
मैं तू से जुदा नहीं एक क्षण भी, यही ज्ञान, यही स्वरूप है।
ज्ञानी का मन बन गया मंदिर,
हर धड़कन गाए तेरा नाम निरंतर।
पूजा न रही अब कोई कर्म,
बस प्रेम ही है सच्चा धर्म।
भक्ति में ज्ञान, ज्ञान में प्रेम,
यही है जीवन का परम नेम...
सब तुझसे है, तू ही मुझमें है, ये जग सारा तेरा ही रूप है।
मैं तू से जुदा नहीं एक क्षण भी, यही ज्ञान, यही स्वरूप है।
अब मैं नहीं, तू ही तू सबमें,
चल रहा है संसार तेरे रब में।
चिंता कहाँ, जब तू ही साथी,
तेरे बिना कोई नहीं बाती।
तेरी लीला, तेरी शक्ति, तेरी साँसें हैं,
मैं भी तू हूँ — यही गीता की बातें हैं...
सब तुझसे है, तू ही मुझमें है, ये जग सारा तेरा ही रूप है।
मैं तू से जुदा नहीं एक क्षण भी, यही ज्ञान, यही स्वरूप है।
तू ही आरंभ, तू ही अंत,
ज्ञान तू, और तू ही संत...
Note:
This video uses AI-generated visuals created with digital art tools.
Background images and music were AI-generated for creative purposes. Copyrights @2025 Learn Advaita Vedanta.
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