13. गीता गौरव - ग्रन्थ है गीता बहुत महान
रचयिता - आदित्य कुमार सक्सेना 'अंशुधर'
स्वर - रमेश कोठारी
सहयोग - डॉ. विष्णु नारायण तिवारी, वीरेन्द्र शर्मा,
तबला - उपेन्द्र मणि पाण्डेय
संगीत निर्देशन - मनोहर लाल
विशेष - विश्वगीताप्रतिष्ठानम् का ग्रन्थ है गीता बहुत महान
13. गीता गौरव - ग्रन्थ है गीता बहुत महान
दिव्य भव्य उद्यान, समय के संग संग गतिमान्,
ग्रन्थ है गीता बहुत महान।।
सकल विश्व के शुचि ग्रन्थों में, इसकी अद्भुत शान,
ग्रन्थ है गीता बहुत महान्।।
सुखदा, सरला, शुभा, सहृदया, सुधा, सरित सुपुनीता,
धर्म-कर्म का मर्म सदा, सिखलाती है यह गीता,
वर्ण-वर्ण वर ब्रह्म-विभा, का व्यापक विमल बितान ।।
ग्रन्थ है गीता बहुत महान ।।1।।
क्यों डरता, क्यों चिन्ता करता, नाशवान यह तन है,
क्या लेकर आया जो खोया, माया ही बन्धन है,
अथ से इति तक पृष्ठ-पृष्ठ देता सबको सद्ज्ञान।।
ग्रन्थ है गीता बहुत महान ।।2।।
कुरुक्षेत्र है दुनिया सारी, मोह-ग्रस्त नर अर्जुन,
किंकर्तव्यविमूढ़ खड़ा जो, कर्म विमुख है तन मन,
किन्तु नहीं दिखता वह ग्वाला, प्रेरक परम सुजान।।
ग्रन्थ है गीता बहुत महान ।।3।।
जादू सा कर जाती पावन, यह केशव की वाणी,
कलुष मिटा देती जन्मों का, यह गीता कल्याणी,
जो पढ़ता उसको मिल जाता, अमर ईश्वरदान।।
ग्रन्थ है गीता बहुत महान ।।4।।
गीता है वह ग्रन्थ समाया, जिसमें जीवन रस है,
सत्यम् शिवम् सुन्दरम् सौरभ, सम्पूरित अन्तस् है,
विवस्वान बन जीवन में, लाता है नवल बिहान।।
ग्रन्थ है गीता बहुत महान ।।5।।
आदित्य कुमार सक्सेना 'अंशुधर'
Информация по комментариям в разработке