🌟 दीपकों के मालिक से बालक बन मिलन मना रहे हो अर्थात् दीपावली मेला मना रहे हो।
👉आज दीपराज अपनी सर्व दीपरानियों को अमर ज्योति की बधाई दे रहे हैं। ‘‘सदा अमर भव''।👉बापदादा बेहद दीपकों की दीपमाला देख रहे हैं।
🌟बेहद बाप के बच्चे चार दीवारों की हद में कैसे समा सकते हैं! ऐसा भी समय आयेगा जब बेहद के हाल में यह चार तत्व चार दीवारों का काम करेंगे। कोई मौसम के नीचे-ऊपर होने के कारण छत की वा दीवारों की आवश्यकता ही नहीं होगी।👉यह प्रकृति भविष्य की रिहर्सल आपको यहाँ ही अन्त में दिखायेगी। चारों ओर कितनी भी किसी तत्व द्वारा हलचल हो लेकिन जहाँ आप प्रकृति के मालिक होंगे वहाँ प्रकृति दासी बन सेवा करेगी। सिर्फ आप प्रकतिजीत बन जाओ।👉प्रकृति आप मालिकों का अब से आह्वान कर रही है।👉वह दिव्य दिवस जिसमें प्रकृति मालिकों को माला पहनायेगी👉प्रकृति सहयोग की ही माला पहनायेगी।👉जहाँ आप प्रकृतिजीत ब्राह्मणों का पाँव होगा, स्थान होगा वहाँ कोई भी नुकसान हो नहीं सकता।👉एक दो मकान के आगे नुकसान होगा लेकिन आप सेफ होंगे। सामने दिखाई देगा यह हो रहा है,तूफान आ रहा है,धरनी हिल रही है लेकिन वहाँ सूली होगी,यहाँ काँटा होगा। वहाँ चिल्लाना होगा,यहाँ अचल होंगे। सब आपके तरफ स्थूल-सूक्ष्म सहारा लेने के लिए भागेंगे।आपका स्थान एसलम बन जायेगा।👉नजदीक नम्बर में प्राप्त करेंगे अर्थात् एसलम के अधिकारी नम्बरवन बनेंगे। तब सबके मुख से,’’अहो प्रभु, आपकी लीला अपरमपार है'' यह बोल निकलेंगे। ‘‘धन्य हो, धन्य हो। आप लोगों ने पाया, हमने नहीं जाना, गंवाया।'' यह आवाज चारों ओर से आयेगा।👉फिर आप क्या करेंगे? विधाता के बच्चे विधाता और वरदाता बनेंगे। लेकिन इसमें भी एसलम लेने वाले भी स्वत: ही नम्बरवार होंगे👉जो स्थापना के आदि से अब तक भी सहयोग भाव में रहे हैं, लेकिन ईश्वरीय कार्य में वा ईश्वरीय परिवार के प्रति विरोध भाव के बजाए सहयोग का भाव, कार्य अच्छा है वा कार्यकर्ता अच्छे हैं, यही कार्य परिवर्त्तन कर सकता है, ऐसे भिन्न-भिन्न सहयोगी भावना यें वाले, ऐसे आवश्यता के समय इस भावना का फलनजदीक नम्बर में प्राप्त करेंगे अर्थात् एसलम के अधिकारी नम्बरवन बनेंगे👉बाकी इस भावना में भी परसेन्टेज वाले उसी परसेन्ट प्रमाण एसलम की अंचली ले सकेंगे।👉बाकी देखने वाले देखते ही रह जायेंगे। जो अभी भी कहते हैं देख लेंगे तुम्हारा क्या कार्य है,👉ऐसे समय की इन्तजार करने वाले, एसलम के इन्तजाम के अधिकारी नहीं बन सकते। उस समय भी देखते ही रह जायेंगे। हमारी बारी कब आती है, इसी इन्तजार में ही रहेंगे और 👉आप दूर में इन्तजार करने वाली आत्माओं को भी मास्टर ज्ञान सूर्य बन,शुभ भावना,श्रेष्ठ बनने के कामना की किरणें चारों ओर की आत्माओं पर विश्व-कल्याणकारी बन डालेंगे।👉 और आप शीतला देवियाँ बन रहम, दया, कृपा की शीतल छीटों से विरोधी आत्माओं को भी शीतल बनायेंगी। अर्थात् सहारे के गले लगायेंगी।👉उस समय आपके भक्त बन ‘‘ओ माँ, ओ माँ'' पुकारते हुए विरोधी से बदल भक्त बन जायेंगे। यह हैं आपके लास्ट भक्त।वरदानी बन ‘भक्त भव' का वरदान देंगे। फिर भी हैं तो आपके भाई ना! जैसे प्रकृति आपका आह्वान कर रही है ऐसे आप सब भी अपने ऐसे सम्पन्न स्थिति का आह्वान कर रहे हो? यही दीपमाला मनाओ!👉वे तो लक्ष्मी का आह्वान करेंगे आप क्या आह्वान करेंगे? वे तो धन देवी का आह्वान करते हैं, आप सभी ‘धनवान भव' की स्थिति का आह्वान करो। अच्छा-
🌟ऐसे दीपमाला के दीपकों को, सदा सर्व खज़ानों से सम्पन्न धनवान भव बच्चों को, सदा अमर ज्योति भव बच्चों को, सदा हर आत्मा को शुभ भावना का फल देने वाले, वरदानी महादानी बच्चों को बापदादा का याद-प्यार और नमस्ते।’’🌟 जितना सेवा की सीट में नजदीक हो उतना ही राज्य सिंहासन में भी नजदीक हैं।👉यहाँ तपस्या और सेवा का आसन और वहाँ राज्य भाग्य का सिंहासन। तो जो सदा तपस्या और सेवा के आसन पर हैं वह सदा सिंहासनधारी हैं। जितना यहाँ सेवा के सदा सहयोगी उतना वहाँ राज्य के सदा साथी। जैसे यहाँ हर कर्म में बापदादा की याद में साथी हैं, वैसे वहाँ हर कर्म में बचपन से लेकर राज्य करने के हर कर्म में साथी हैं।👉आयु में भी हमशरीक हैं, इसीलिए पढ़ाई में, खेल में, सैर में, राज्य में, हर कर्म में हमशरीक साथी हैं। अच्छा
🌟रूहानी सेवाधारी अर्थात् सच्चे सेवाधारी की विशेषता क्या है? (एवररेडी है) एवररेडी स्थूल सेवा में तो हैं क्योंकि सेवा के जो भिन्न-भिन्न साधन हैं उसमें जहाँ बुलावा होता है वहाँ पहुँचने वाले हैं।👉लेकिन मंसा से भी जो संकल्प धारण करने चाहो उसमें भी सदा एवररेडी हो?जो सोचो वह करो, उसी समय। इसको कहा जाता है-एवररेडी। मंसा से भी एवररेडी,संस्कार परिवर्त्तन में भी एवररेडी।रूहानी सम्बन्ध और सम्पर्क निभाने में भी एवररेडी
👉संस्कार मिटाने में वा संस्कार मिलाने में टाइम लगता है? इसमें भी एवररेडी बनो👉बाप के संस्कारों से रास मिलाने की रास। एक है रास करना, एक है रास मिलाना।आपस में श्रेष्ठ संस्कार मिलाने में होशियार हो👉संस्कार मिलाना यही बड़े ते बड़ी रास है।
👉आज के दिन लक्ष्मी माँ के साथ बच्चों का भी होता है। किस रूप में होता है?👉गणेश बच्चा है ना! तो सिर्फ लक्ष्मी की पूजा नहीं लेकिन आप सब गणेश अर्थात् बुद्धिवान हो।👉तीनों कालों के नालेजफुल, इसको कहा जाता है -गणेश अर्थात् बुद्धिवान, समझदार। और गणेश को ही विघ्न-विनाशक कहते हैं। तो जो तीनों लोक और त्रिमूर्ति के नालेजफुल हैं वही विघ्न-विनाशक हैं।👉अगर और कोई विघ्न रूप बने तो आप विघ्न-विनाशक बन जाओ तो विघ्न खत्म हो जायेंगे। 👉ऐसा वातावरण है, ऐसी परिस्थिति है इसलिए यह करना पड़ा, यह बोल विघ्न-विनाशक के नहीं। विघ्न-विनाशक अर्थात् वातावरण,👉वायुमण्डल को परिवर्त्तन करने वाले।अच्छा।''
🌟उत्सव का अर्थ ही है उत्साह दिलाने वाला। तो हर घड़ी, हर सेकेण्ड उत्साह दिलाने वाला हो।
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