प्रातःस्मरणम्
(ब्रह्मनाद - 3 बार)
ॐऽऽऽ ॐऽऽऽ ॐऽऽऽ
करदर्शन-मन्त्र:
कराग्रे वसते लक्ष्मीः, करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थिता गौरी, प्रभाते करदर्शनम्।।
भूमि-प्रार्थना
समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले।
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं, पादस्पर्शं क्षमस्व मे।।
देव - ऋषि - प्रकृति प्रार्थना
ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी, भानुः शशि: भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः, कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।
भृगुर्वसिष्ठः क्रतुरंगिराश्च, मनुः पुलस्त्यः पुलहश्च गौतमः।
रैभ्यो मरीचिश्चयवनश्च दक्षः, कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।
सनत्कुमारः सनकः सनन्दनः सनातनोऽप्यासुरिपिंगलौ च।
सप्तस्वराः सप्तरसातलानि, कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।
सप्तार्णवाः सप्त कुलाचलाश्च, सप्तर्षयो द्वीपवनानि सप्त।
भूरादिकृत्वा भुवनानि सप्त, कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।
पृथ्वी सगन्धा सरसास्तथापः, स्पर्शी च वायुर्ज्वलितं च तेजः।
नभः सशब्दं महता सहैव, कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।
त्वमादिदेवः पुरुषः पुराणस्, त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम्।
वेत्तासि वेद्यं च परं च धाम, त्वया ततं विश्वमनन्तरूप।। गी.-11/38।।
वायुर्यमोऽग्निर्वरुणः शशांकः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च।
नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोऽपि नमो नमस्ते।।गी.-11/39।।
नमः पुरस्तादथ पृष्ठतस्ते, नमोऽस्तु ते सर्वत एव सर्व।
अनन्तवीर्यामितविक्रमस्त्वं, सर्वं समाप्नोऽसि ततोऽसि सर्वः।।गी.-11/40।।
सखेति मत्वा प्रसभं यदुक्तं, हे कृष्ण हे यादव हे सखेति!
अजानता महिमानं तवेदं, मया प्रमादात् प्रणयेन वापि ।।गी.-11/41।।
यत्र योगेश्वरः कृष्णो, यत्र पार्थो धनुर्धरः।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्, ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ।।गी.18/78।।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।।-3
ब्रह्मनाद - 3 बार
असतो मा सद्-गमय ।। तमसो मा ज्योतिर्गमय ॥
मृत्योर्माऽमृतम् गमय ॥
(बृहदारण्यक उपनिषद्)
।। ॐ शान्तिः, शान्तिः, शान्तिः ।।
(विश्वगीताप्रतिष्ठानम् द्वारा प्रकाशित गीतामृतगानम् पुस्तक से साभार स्वीकृत)
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