श्री विजय पूनिया भाई साहब की डॉक्यूमेंट्री फिल्म
स्क्रिप्ट लेखन: हरिराम किंवाड़ा,
दुनिया की सबसे बहादुर, ईमानदार और जिम्मेदार जाट बिरादरी में जन्म लेकर जनमानस के हृदय सम्राट श्री विजय पूनिया भाई साहब लाखों करोड़ों लोगों के लिए आदर्श है।
भारत के सबसे बड़े भौगोलिक प्रदेश राजस्थान की राजधानी जयपुर में सूचना केंद्र के पास श्री स्वाधीन जाट छात्रावास, कलेक्ट्रेट के पास किसान छात्रावास और जयपुर के सबसे वीवीआईपी सड़क मार्ग पर महाराजा सवाई जवाहर सिंह जाट छात्रावास की स्थापना से ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं का अध्ययन, आवास , सम्मान, स्वाभिमान और करियर बनाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। भाई साहब ने हॉस्टल्स में हमेशा लक्ष्य के प्रति समर्पण, अनुशासन, संगठन और नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है इसलिए जाट हॉस्टल सबके लिए एक रोल मॉडल है।
भाई साहब के नाम से मशहूर विजय पूनिया जी जाटों की शान हैं, जिनके नेतृत्व में 1998 - 99 की जाट आरक्षण महारैली और जनसभा की ऐतिहासिक सफलता पर बीबीसी लंदन बोला और पूरे विश्व में उसकी गूंज सुनाई दी।
आदर्श मातृत्व की धनी माता गौरी पूनिया और पिता विंग कमांडर सी एस पूनिया के सपूत विजय पूनिया राजस्थान के बेस्ट एनसीसी कैडेट रहे हैं। ऑल इंडिया लेवल पर भी टॉप थ्री एनसीसी कैडेट्स में आपकी गिनती है।
विजय पूनिया भाई साहब को भारत के महान शिक्षा संत स्वामी केशवानंद जी, भारत रत्न से विभूषित पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी, किसान केसरी बलदेव राम जी मिर्धा , मारवाड़ के गांधी श्री नाथूराम जी मिर्धा , राजस्थान के किस को जमीन का मालिकाना हक दिलाने वाले कुंभाराम जी आर्य और राजस्थान की राजनीति की राजनीति के भीष्म पितामह श्री परसराम जी मदेरणा का सानिध्य और मार्गदर्शन प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है।
शिक्षा एवं हॉस्टल क्षेत्र में काम करने वाली सामाजिक संस्थाओं को विजय भाई साहब ने पांच करोड़ से अधिक का दान और समर्पण की एक अद्भुत मिसाल कायम की है।
अखिल भारतीय जाट महासभा के राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष के तौर पर श्री विजय पूनिया भाई साहब ने देश के जाटों को मजबूती देने और समाज में शिक्षा की जागृति और राजनीतिक व आर्थिक तौर पर मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई।
जिस दौर में रक्तदान करने में लोग झिझकते थे, उस समय भारत के महान फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र को खून से तोला और सात हजार से अधिक यूनिट रक्तदान करके विश्व रिकॉर्ड बना दिया।
धर्मो विश्वस्य जगत प्रतिष्ठा के साथ स्थापित प्रदेश के सबसे बड़े राजस्थान विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति पिछले 50 वर्षों से विजय पूनिया भाई साहब पर ही केन्द्रित रही है । हमेशा किंग मेकर की भूमिका में रहने वाले विजय भाई साहब ने ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को छात्र संघ अध्यक्ष बनाकर सामाजिक और राजनीतिक रूप से मजबूत किया और एक नई पीढ़ी को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई।
श्री विजय पूनिया भाई साहब वर्ष 1998 - 99 के जाट आरक्षण महाआंदोलन के सफल नेतृत्व , कुशल प्रबंधन और रणनीतिक सफलता के भी मुख्य सूत्रधार रहे हैं । आपके साथ जाट आरक्षण के पुरोधा ज्ञान प्रकाश जी पिलानिया , पद्मश्री शीशराम जी ओला, डॉक्टर हरि सिंह जी, जगदीप जी धनखड़, सुभाष जी मेहरिया, राजाराम जी मील जैसे सम्मानित लोगों का समन्वय रहा।
भारत में शिक्षा के विकास और सामाजिक जागृति के अग्रदूत राष्ट्रीय शिक्षा संत स्वामी केशवानंद जी से लेकर बलदेव राम जी मिर्धा , नाथूराम जी मिर्धा, चौधरी रामदान जी डूकिया, गुल्लाराम जी बेंदा, रामनारायण जी जिंदा, भंवर सिंह जी डांगावास जैसे महापुरुषों ने अभूतपूर्व योगदान दिया है और वर्तमान में देश के क्वालिटी एजुकेशन के बड़े इंस्टिट्यूट भी जाट समाज की लीडरशिप में विकसित हो रहे हैं।
विजय भाई साहब की प्रेरणा से देश प्रदेश के छोटे शहरों से लेकर बड़े शहरों तक शिक्षण संस्थाओं का नेतृत्व करते श्री वीर तेजा स्थली मारवाड़ मूंडवा, ग्रामोत्थान विद्यापीठ नागौर, संगरिया , डीडवाना, श्री तेजा गर्ल्स हॉस्टल कोटा जैसी संस्थाओं में जाट समाज की युवा एंटरप्रेन्योरशिप अपने कुशल नेतृत्व क्षमता का परिचय देते हुए एजुकेशन एंपावरमेंट को साकार कर रहे हैं।
भाई साहब की प्रेरणा और सहयोग से जाट इतिहास का लेखन हुआ। जाट समाज के गौरवशाली अतीत के रूप में कर्मा बाई की भक्ति , धन्ना भगत की सेवा, श्री रालाबाबा धाम किंवाड़ा का मेला , श्री वीर तेजाजी की सत्यवादिता , वीर बिग्गाजी की शक्ति, फूलांबाई का राम नाम सुमिरण और रानाबाई जी का गुरु मंत्र भारत की आध्यात्मिकता को विश्व पटल पर प्रतिस्थापित कर रहा है।
यह विजय भाई साहब का ही विजन है कि राजस्थान के 50 जिला मुख्यालयों और सैकड़ो तहसील मुख्यालयों पर जाट समाज के शिक्षण संस्थान और छात्रावास संचालित हो रहे हैं, जो शिक्षा का नया उजियारा फैला रहे हैं।
राज्य और केंद्रीय प्रशासनिक सेवाओं में हमारी प्रतिभाएं टॉप रैंक हासिल करके अपनी योग्यता का परचम लहरा रही है।
श्री स्वाधीन जाट छात्रावास को मां गौरी पूनिया गर्ल्स हॉस्टल के नाम से स्थापित करते हुए शारदा चौधरी की अध्यक्षता में छात्रावास संचालन की जिम्मेदारी सुनिश्चित कर दी गई है और सवाई जवाहर सिंह जाट छात्रावास के अध्यक्ष भगत सिंह लोहागढ़ हैं। आज देश के हर हिस्से में जाट हॉस्टल्स के एल्यूमिनी अपनी योग्यता और प्रतिभा के दम पर शानदार पहचान बनाते हुए मिलते हैं तो यह भाई साहब के जीवन की महत्वपूर्ण पूंजी है।
श्री विजय पूनिया भाई साहब की यह डॉक्यूमेंट्री जेवीपी मीडिया ग्रुप की के चेयरमैन हरिराम किंवाड़ा की ओर से जाट हॉस्टल के अध्यक्ष भगत सिंह जी लोहागढ़, हॉस्टल वार्डन रामस्वरूप जी गिल और कार्यक्रम के संयोजक अरुण सिंह चौधरी के सकारात्मक प्रयासों और मजबूत संकल्प को समर्पित है। विजय भाई साहब के 75 वें जन्म दिवस का यह आयोजन प्लेटिनम जुबली के रूप में पूरी दुनिया को एक शानदार संदेश है।
जय हो तेजल तपधारी जय श्री रालाबाबा धाम किंवाड़ा
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