🎤 LYRICS
ॐ नमः शिवाय३ ॐ नमः शिवाय
हे नीलकंठ,
हे कैलाशपति,
हे त्रिलोचन दयालु महादेव,
हम सब आपके श्रीचरणों में
अपना मन, वचन और कर्म समर्पित करते हैं।
हे भोलेनाथ,
जैसे अंधकार को चीरकर
भोर की पहली किरण आती है,
वैसे ही हमारे जीवन के तम को
आपके ज्ञान का प्रकाश हर ले।
आपकी जटाओं से बहती पावन गंगा
हमारे अंतर्मन को शुद्ध करे,
आपके डमरू की नाद
हमारे जीवन में नव-सृजन जगाए।
हे शिव शंकर,
जब-जब मन डगमगाए,
जब-जब विश्वास टूटे,
तब-तब आपकी कृपा
हमें संभाल ले, थाम ले।
हे करुणामय,
अहंकार का विष जो भीतर पलता है,
उसे आप ही नीलकंठ बनकर हर लें।
हमारे हृदय में प्रेम का चंद्रमा,
और मस्तिष्क में शांति का गंगाजल भर दें।
माता पार्वती संग विराजमान प्रभु,
हमारे परिवारों में भी
सौहार्द, स्नेह और समर्पण का वास हो।
इस पावन रात्रि में
हम दीप बनकर जलें,
स्वार्थ से दूर, सेवा में ढलें।
हमारी हर सांस बने कृ
ष्ॐ नमः शिवायष् का मधुर जप।
हे आदियोगी,
हमें संयम दें,
हमें साहस दें,
हमें सत्य के मार्ग पर अडिग रहने की शक्ति दें।
आज की इस महाशिवरात्रि पर
हम प्रण करते हैं कृ
मन में श्रद्धा,
वाणी में मधुरता,
और कर्म में पवित्रता रखेंगे।
हर हर महादेव!
आपकी कृपा से
हमारा जीवन मंगलमय हो।
ॐ नमः शिवाय।
🎵 VIDEO CREDITS
Song: नीलकंठ दयालु महादेव
Lyrics: Traditional
Music: Sounds of Ravikant Jaiswal
Label: Sounds of Sharda Pravah
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🔔 समाज जागरण का संकल्प | धर्म स्थापना की ओर एक कदम 🔔
हमारा उद्देश्य है — समाज में धर्म, सदाचार और रचनात्मकता की स्थापना हो; नकारात्मकता, अंधकार और कुप्रथाओं का नाश हो। वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए यह समय है कि समाज के सभी वर्गों के प्रबुद्ध विचारक, संत, विद्वान एवं कर्णधार एक मंच पर एकत्रित हों — परस्पर विश्वास और आस्था के साथ।
इस अभियान का मूल उद्देश्य है:
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यह मंच है — समाज के प्रबुद्ध जनों को एक करने का, विचारों को साझा करने का और समग्र उत्थान की ओर मिलकर बढ़ने का।
जय धर्म। जय समाज। जय मानवता।
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