राजधानी ईटानगर के सेंकी पार्क में स्थित गैर सरकारी संगठन दीपक नाबम लिविंग होम दिव्यांगजनों, बुजुर्गों, मानसिक रोगियों, नशे की लत के शिकार व्यक्तियों, गंभीर रूप से बीमार और घायल, सामाजिक और घरेलू हिंसा के शिकार, बाल और मानव तस्करी के शिकार, सामाजिक रूप से अलग-थलग और बेघर लोगों की मदद में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इसकी स्थापना ग्यारह सितंबर 2005 में दीपक नाबम ने की।
पापुमपारे जिले के लेपोरियांग अंचल के पापे सांगो विलेज के निवासी 50 वर्षीय दीपक नाबम का बचपन बहुत ही संघर्षपूर्ण रहा। उन्होंने गरीबी और कई चुनौतियों का सामना करते हुए कक्षा बारह की परीक्षा पास की। सेकेंड्री स्कूल के दौरान गलत संगत में आकर उन्हें शराब की लत लग गई,जिसके कारण उन्हें लीवर सिरोसिस हो गया और अरुणाचल प्रदेश के जाने-माने चिकित्सकों ने भी जवाब दे दिया। शराब की लत के कारण दीपक नाबम जी को सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का भी सामना करना पडा। अपने जीवन के अनुभव से सीख लेते हुए उन्होंनें बेघर, हिंसा, दुर्घटना, नशे की लत के शिकार, मानसिक रोगियों और बुजुर्गों के लिए शेल्टर, केयर, ट्रीटमेंट और उनके जीवन में रोशनी पैदा करने का बीडा उठाया।
बिना किसी भेदभाव के दीपक नाबम लिविंग होम में अरुणाचल प्रदेश के अलावा देश के कई राज्यों और पडोसी देश नेपाल के भी पीडित व्यक्तियों को आश्रय मिला हुआ है। दीपक नाबम का एक ही विजन है, रोड पर भटक रहे हर मानसिक रोगी, दुर्घटना, नशे और हिंसा के शिकार व्यक्ति को आश्रय, प्यार और इलाज मिले। उनका मानना है कि मानव सेवा से बढकर कोई धर्म नही होता और बिना किसी भेदभाव के हर परेशान, लाचार, समाज और परिवार द्वारा ठुकराये गये बच्चों, दिव्यांगजनों, बुजुर्गों और महिलाओं को शेल्टर, केयर और ट्रीटमेंट उनके जीवन में एक नई रोशनी ला सकता हैं।
देशभर में मादक पदार्थों की तस्करी और युवाओं में बढती नशे की लत एक गंभीर समस्या है। ड्रग्स और अन्य मादक पदार्थों के सेवन के कारण कई युवा शारीरिक और मानसिक बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। दीपक नाबम लिविंग होम में नशे की लत के शिकार लोगों को काउंसेलिंग, ट्रीटमेंट और केयर मिल रहा है, जिससे कई युवा स्वस्थ होकर समाज में अपना योगदान दे रहे हैं।
सडक या किसी अन्य दूर्घटना के शिकार व्यक्तियों और शारीरिक या मानसिक रुप से दिव्यांग जनों को दीपक नाबम लिविंग होम में आश्रय मिला हुआ है। अथक सेवाओं के प्रमाण के रूप में, अरुणाचल प्रदेश सरकार ने दीपक नाबम लिविंग होम को पीडब्ल्यूडी अधिनियम, 1995 की धारा52 के तहत मानवता की सेवा करने की अनुमति दी है और इस एन.जी.ओ को2020 में आधिकारिक तौर पर मानसिक रूप से विकलांग लोगों का "हाफ वे होम" घोषित किया गया है।दीपक नाबम लिविंग होम में दिव्यांग जनों के स्किल डेवलपमेंट और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की सराहनीय पहल की जा रही है।
दीपक नाबम लिविंग होम में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग वार्ड स्थापित किए गए है। इस होम में इनमेंट्स के लिए 24*7 मेडिकल फेसिलिटी के साथ ही एंबुलेंस की भी व्यवस्था है। नर्स सभी इनमेंट्स को समय पर मेडिसिन और उनकी सेहत का ख्याल रखती हैं।
दीपक नाबम लिविंग होम में सभी इनमेट्स को समय पर भोजन मिलता है। जो लोग स्वस्थ है, वे लाईन में लगकर खाना लेते है और बुजुर्गों को वालंटियर्स खाना खिलाते हैं।
दीपक नाबम लिविंग होम में इनमेंट्स मिलजुलकर रहते हैं। एक दूसरे का सहारा बनते है और आपस में खुशियाँ बांटते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 जनवरी 2025 को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 118वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने कहा कि दीपक नाबम ने अरुणाचल प्रदेश में सेवा भावना का अनूठा उदाहरण पेश किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ईटानगर के सेनकी पार्क में एक शेल्टर हाउस चलाते हैं, जहाँ मानसिक रूप से अस्वस्थ, दिव्यांग और बुजुर्गों की सेवा की जाती है। उन्होंने कहा कि यहाँ नशे के आदी लोगों का भी ख्याल रखा जाता है। पीएम मोदी ने कहा कि दीपक नाबम ने बिना किसी सहायता के समाज के वंचित लोगों, हिंसा से पीड़ित परिवारों और बेघर लोगों की मदद के लिए अभियान शुरू किया।
दीपक नाबमजी को सीनियर सीटिजन्स की सेवाओं के लिए 1 अक्टूबर 2021 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय पुरस्कार वायो श्रेष्ठ सम्मान, उल्लेखनीय सेवाओं के लिए 15 अगस्त 2023 को स्टेट गोल्ड मेडल और जनजातीय गौरव दिवस 2024 में राज्यपाल के कर कमलों से सम्मानित किया गया। 15 अगस्त 2024 में पापुमपारे जिला प्रशासन, 3 दिसंबर 2019 में सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं जनजातीय मामलों के विभाग अरुणाचल प्रदेश और 28 फरवरी 2019 को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दीपक नाबम को उल्लेखनीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया।
Информация по комментариям в разработке