🎵 “फिर से आओ बाबा, सतनाम के जोत जला दो” 🎵
हे गुरु घासीदास बाबा, फिर से आओ एक बार,
सतनाम के जोत जला दो.....
ए जमाना म छा गे हवे झूठ-पाप के अंधियार।
सतनाम के जोत जला के, कर दे उजियार,
हे गुरु घासीदास बाबा, फिर से आओ एक बार।
सतनाम… सतनाम… जय सतनाम के पुकार…
छुआछूत अउ ऊंच-नीच के, जहर घुलत हवय गांव-गांव,
भेदभाव के आगि धधकत, जरे मानवता के छांव।
भाई-भाई म दीवार उठ गे, टूटत प्रेम के तार,
मनखे-मनखे लड़त दिखत हे, खोवत अपन दुलार।
ए जमाना म भर गे हवे, अन्याय के बाजार,
हे गुरु घासीदास बाबा, फिर से आओ एक बार।
नशा-दारू के दलदल म, फंसत जावत जवान,
महतारी के आंखी भर आवय, रोवत घर-दुआर।
मांस-मदिरा के मोह म पड़के, भूल गे हवय सतनाम,
संस्कार के दीप बुझे हें, सूखत परे अरमान।
सुध-बुध खोवत मानवता, डोलत हे परिवार,
सतनाम के अमृत पिला दे, कर दे जीवन सुधार।
झूठ-लबारी गूंजत हवय, सच होगे लाचार,
लोभ-मोह के माया जाल म, फंस गे संसार।
बात-बात म कपट बढ़त हे, घटत विश्वास के मान,
सच्चाई रोवत कोना म, खोजत अपन पहचान।
जैतखाम जइसे अडिग बना दे, दे दे सत विचार,
हे गुरु घासीदास बाबा, फिर से आओ एक बार।
निर्दोष मनखे पीड़ा सहथे, बढ़ गे अत्याचार,
दुखिया के आवाज दबाय जाथे, धन के हवय दरबार।
नारी असुरक्षित डोलत हवय, रोवत जग संसार,
बालपन के भविस्य डोलत, अंधियार के पार।
दीन-दुखी के रखवार बनके, दे दे अपन दुलार,
हे गुरु घासीदास बाबा, फिर से आओ एक बार।
अंधविश्वास के जंजाल म, जकड़े हें जन-जन,
पाखंड के मेला सज गे, भूले सच्चा धन।
धरम के नाम म फूट परत हे, टूटत मानव जात,
सतनाम के सीधा रस्ता, भूलगे सच के बात।
सत्य-अहिंसा के पाठ पढ़ा दे, खोल दे आंखी द्वार,
हे गुरु घासीदास बाबा, फिर से आओ एक बार।
जंगल रोवत, नदी सूखत, डोलत धरती मां,
लोभ लालच म अंधा होके, काटत अपन छां
पानी, माटी, हवा बिगड़त, संकट भारी आय,
मानव अपन कर्म ले खुदे, दुख के बीज बोवाय।
सतमार्ग दिखा दे बाबा, बचा ले संसार,
हे गुरु घासीदास बाबा, फिर से आओ एक बार।
तें कहे हस – “मनखे-मनखे एक समान”,
ना कोई छोटा ना कोई ऊंचा, सबके एक पहचान।
जैतखाम खड़े गवाही देवय, सच्चाई के बात,
समता, ममता, करुणा ले बनथे सच्चा समाज।
छुआछूत के बेड़ी तोड़व, बगरावव प्रेम दुलार,
हे गुरु घासीदास बाबा, फिर से आओ एक बार।
नशा-मांस त्याग के भइया, धर ले सत के नाव,
सादा जीवन, उच्च विचार, यही तोर सिखाव।
परिश्रम, सेवा, शिक्षा ले, सज जाही परिवार,
सतनाम के गूंज उठही, हर घर-गांव-द्वार।
नवा बिहान के किरन बनके, चमकावव संसार,
हे गुरु घासीदास बाबा, फिर से आओ एक बार।
जवान मन सुन लेवव आज, पकड़व सत के हाथ,
ज्ञान-शिक्षा के दीप जला के, बनव समाज के साथ।
मोबाइल के माया छोड़व, अपन संस्कृति अपनावव,
सतनाम के रस्ता चलके, नई पीढ़ी सजावव।
गिरौदपुरी के गाथा गूंजे, भर दे हिम्मत अपार,
हे गुरु घासीदास बाबा, फिर से आओ एक बार।
गूंजे धरती गगन म आज, सतनाम के जयकार,
झूठ-पाप सब भाग जाहीं, मिट जाही अंधियार।
सत्य, समता, प्रेम के दीपक, जल जावय हर द्वार,
मानवता मुस्काय उठही, खिल जाही संसार।
आशीष दे बाबा मोला, रहंव सत के सार,
हे गुरु घासीदास बाबा, फिर से आओ एक बार।
सतनाम… सतनाम… जय सतनाम पुकार,
सतनाम… सतनाम… गूंजे चारो पार।
झूठ-पाप सब दूर भगावन, अपनावन सत विचार,
हे गुरु घासीदास बाबा… फिर से आओ एक बार… 🙏
#cg #panthi #dance #gurughasidas #satnaam #satnami #song #trandingsong #folksong
Информация по комментариям в разработке