[Intro]
जय कन्हैया लाल की, जय गोविंद जय मुरारी।
श्यामसुंदर प्रभु हमारे, तुम्हीं हो जीवन के सहारे।
आज गा रहा है मन, वो कथा जो अमर है,
प्रेम मीरा का और सखा सुदामा का सच्चा सफर है।
[Shri Krishna’s Divine Aura]
श्याम तेरे नाम में सब कुछ समाया है,
हर धड़कन ने तुझमें खुद को पाया है।
पीताम्बर ओढ़े, मुरली बजाए,
तेरी मुस्कान से ब्रह्मांड झूम जाए।
कुंज गली में वृंदावन वासी,
तेरा हर रूप लगे मनमोहक सासी।
कभी बाल गोपाल, कभी रणधीर,
हर युग में तेरा प्रेम अधीर।
[ Meera’s Bhakti & Love]
मीरा कहे गिरधर गोपाल,
तेरे बिना सब है जंजाल।
त्याग दिया वैभव, तज दी साज,
बस चाही तेरी चरणों की राज।
न रास की चाह, न मोहन की बाँसुरी,
मीरा तो बस तरसे तेरी आहट पुरी।
हर साँस बोले – "श्याम मेरा प्राणेश",
मीरा का भाव, भक्ति का विशेष।
[Sudama’s Friendship with Krishna]
सुदामा चला द्वारिका की ओर,
नहीं था पास न धन, न शौर्य का जोर।
झोली में बस सूखा चावल रखा,
मन में श्रद्धा, नेत्रों में प्रेम भरा।
कन्हैया ने जब सखा को देखा,
रथ छोड़, सिंहासन त्याग के भागा।
गले लगाया, पाँव धोये प्रेम से,
राजा बना सुदामा को हर क्षण क्षेम से।
[Divine Sakha Bhava]
ऐसी हो मित्रता, ऐसा हो बंधन,
जहाँ भाव चले, ना देखे धन।
हर सुदामा के जीवन में हो वो कृष्ण,
जो भाग्य बदल दे, बन जाए पथदर्शक।
[Bhakti & Surrender]
मुरली की तान, मोरपंख का मान,
श्याम की लीला से बने जग का विधान।
जो दिल से पुकारे, वही पाता है,
श्याम तो भक्ति में बस जाता है।
न रुकावट हो, न दूरी रहे,
नाम जपते जपते दूरी भी सहे।
कान्हा के नाम में जो डूब गया,
वो इस जग से परे, ब्रह्म स्वरूप बन गया।
[Krishna as Love, Friend, and God]
प्रेम मीरा का, सखा सुदामा सा,
श्याम की भक्ति का बस यही प्यासा।
राधा की रास, मीरा का विश्वास,
कृष्ण के नाम में जीवन का प्रकाश।
जिनके अधरों पर वंशी है बसी,
जिनकी बातों में वेदों की तासी।
वो नटवर नागर, वो यशोदा का लाल,
जो रचता है लीला, वही है कपाल।
[ Bhakti Samarpan]
श्याम, तुझमें ही जीवन का सार है,
हर भक्त को तेरा ही दरबार प्यारा है।
मीरा बने हर आत्मा की कहानी,
सुदामा हो हर दिल की निशानी।
राधे श्याम बोलो, भक्ति में डूब जाओ,
मीरा जैसा प्रेम करो, सुदामा जैसा निभाओ।
हर दिल से निकले बस एक ही नाम —
"श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवाया!"
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