"हृदय में हरि समाए"
“सा… रे… ग… प… ध… सा…”
“हरि… हरि ओम्… हरि ओम्… हरि ओम्… ”
“सा रे ग, प ध सा — हरि नाम गूँजे मन के भीतर…”
सा रे ग प, प ध प ग रे सा ॥
सा रे ग प ध, ध प ग रे सा ॥
सा रे ग प ध, ध प ध सा ॥
सा रे ग म प, प ध प ग रे सा ॥
हृदय में हरि समाए रे, सब इच्छा मिट जाए रे ॥
हरि ही सुख हरि ही प्रेम, आत्मा हरिरूप हो जाए रे ॥
जो हृदय में चिंते आत्माराम, वही हरि का रूप हो जाए,
मन की वासना हरि में लीन, सब दुख-सुख मिट जाए ॥
हरि नाम ही श्वास बन जाए, हरि ध्यान ही जीवन का धाम,
हरि आश्रय में शांति पाए, भक्त बने निष्काम ॥
“हरि… हरि ओम्… हरि ओम्… ”
हृदय में हरि समाए रे, सब इच्छा मिट जाए रे ॥
हरि ही सुख हरि ही प्रेम, आत्मा हरिरूप हो जाए रे ॥
जब हरि स्मरण हर ग्रास में हो, वही अन्न ब्रह्म बन जाए,
भोग में भी योग पथ दिखे, देह भूल आत्मा गाए ॥
निष्काम भक्ति जो धर ले मन में, वही सच्चा भागवत कहलाए,
उसकी हर चाल हरि बन जाए, हरि हृदय में मुस्काए ॥
“हरि नाम… हरि नाम… शांति आनंद ओम् हरि नाम…”
हृदय में हरि समाए रे, सब इच्छा मिट जाए रे ॥
हरि ही सुख हरि ही प्रेम, आत्मा हरिरूप हो जाए रे ॥
न इच्छा, न मोह, न ममता, बस हरि का रस गाए,
हरि रंग में रंगा जो मन, वही ब्रह्म झलकाए ॥
हरि में वासना विलीन हुई, बस नाद अनाहत गूँजे,
हरि हरि कहे पवन हर क्षण, आत्मा हरि में सूँजे ॥
“हरि हरि ओम्… हरि शांति आनंदम्…”
हृदय में हरि समाए रे, सब इच्छा मिट जाए रे ॥
हरि ही सुख हरि ही प्रेम, आत्मा हरिरूप हो जाए रे ॥
“सा रे ग… प ध सा…”
“हरि नाम… हरि नाम…”
“शांति… आनंदम्… ”
Note:
This devotional content was created with the support of AI tools under human guidance.
It is intended solely for spiritual and creative expression.
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