Daily JKYog Satsang #31
18th June 2022
✨Prem Ras Madira, Rasiya Madhuri
ब्रजरस बरसि रह्यो ब्रज बीथिन, ज्ञानी बिनु जाने भरमाय।
जेहि खोजत ज्ञानी जन लाखन।
चारिहुँ वेदन की प्रतिशाखन।
हारि 'अलख' इमि लागे भाखन।
वृन्दा विपिन सखिन अंचल पट, लिपट रह्यो सोइ धाय।
जेहि शंकर उर-अंतर ध्यावत।
जाको भेद वेद नहिं पावत।
निर्विकल्प, निर्लेप, बतावत।
सोइ निकुंज बिच भानुललि के, चरण पलोटत जाय।
जेहि माया-वस विश्व चराचर।
ब्रह्मअण्ड-नायक विधि, हरि, हर।
नाचत ज्यों नट परवश बानर।
तेहि दै छाछ नेकु सी छोरिन, कोटिन नाच नचाय।
जाकी भृकुटि-विलास प्रलयकर।
जाके डर काँपत डर, थर थर।
नामहि जाको भव-बंधन-हर।
ताको ऊखल बाँधि यशोदा, लै साँटी डरपाय।
जेहि लगि जपी तपी, भरमावत।
योगी योग अगिनि जरि जावत।
निज बल कृपा-कोर नहिं पावत।
सो 'कृपालु' निज माय गोद हित, पर्यो धरणि बिलखाय ॥
✨Kirtan Meaning -
ब्रज की प्रत्येक गलियों में ब्रजरस बरस रहा है, किन्तु फिर भी ज्ञानी (जानने वाला) होते हुए भी, बिना जाने भटक रहा है। जिस ब्रह्म को लाखों आत्माराम पूर्णकाम परमहंस ज्ञानी भी चारों वेदरूपी वृक्षों की प्रत्येक शाखारूपी शाखाओं में अनादि काल से अनंत काल तक खोज-खोजकर हार गये एवं अंत में उन्हें यही कहना पड़ा कि 'ब्रह्म अलख है' अर्थात् उसका कोई स्वरूप नहीं है एवं उसे कोई देख भी नहीं सकता है, वही ज्ञानियों का' अलख' पूर्णतम पुरुषोत्तम ब्रह्म सच्चदानंद श्रीकृष्ण बनकर वृन्दावन में ब्रज-गोपांगनाओं के वस्त्र के अंचल में दौड़कर अपने आप लिपट रहा है। जिस निर्गुण निराकार ब्रह्म का भगवान् शंकर अपने हृदय में निरन्तर ध्यान करते हैं ए्वं जिसके मर्म को न जान सकने के कारण चारों वेद भी 'नेति-नेति' (इतना ही नहीं-इतना ही नहीं) कहकर चुप हो जाते हैं तथा वेद जिस ब्रह्म को निर्विकल्प एवं निर्लेप सिद्ध करता है, वही ब्रह्म ब्रज की निकुंजों में सविकल्प एवं लिप्त होकर वृषभानुनंदिनी राधिका जी के चरण कमलों को दबाता है। जिस ब्रह्म की आधिभौतिक माया के अधीन अनंतकोटि ब्रह्माण्डों के सभी जड़ जंगम जीव परवश होकर रहते हैं एवं ब्रह्माण्डों के नायक ब्रह्मा, विष्णु, शंकर आदि भी जिसकी माया के वशीभूत होकर उसी प्रकार नाचते हैं जिस प्रकार नट के संकेत पर बन्दर नाचता है। उसी मायाधीश, परात्पर, गुणातीत परब्रह्म श्रीकृष्ण को ब्रज के अहीरों की छोटी छोटी छोरियाँ थोड़ी सी छाछ के संकेत से करोड़ों प्रकार के नाच नचाती हैं। जिस पूर्णतम-पुरुषोत्तम-ब्रह्म के भृकुटि विलास (भौंहों के मरोड़) मात्र से
अनंत-कोटि-ब्रह्माण्डों का महाप्रलय हो जाता है एवं जिसके भय से भय (यमराज) भी भयभीत होता है। जिसका नाम ही आवागमन के पंचक्लेश के बन्धन को नष्ट कर देता है। उसी निरपेक्ष कर्तुमकर्तुमन्यथाकर्तुम् समर्थ [स्वेच्छापूर्ण कार्य करने, न करने, एवं उल्टा करने में समर्थ ] सर्वशक्तिमान भगवान् की यशोदाजी ऊखल में बाँधकर एवं हाथ में छोटा सा पतला डंडा लेकर मारने के लिए डरा रही हैं। इन्द्रिय, मन, बुद्धि से परे एवं ज्ञातास्वरूप जिस निर्विशेष ब्रह्म की प्राप्ति के लिए असंख्यों जप एवं तप करने वाले असंख्यों वर्षों तक भटका करते हैं एवं जिसके लिए योगी लोग अष्टांग योग करने के पश्चात् योग की अग्नि में जलकर भस्म हो जाते हैं, किन्तु फिर भी भगवान् की किंचित् भी कृपा को साधन बल से नहीं प्राप्त कर पाते हैं।' श्री कृपालु जी' कहते हैं कि वही पूर्णतम पुरुषोत्तम ब्रह्म श्रीकृष्ण अपनी माता यशोदा की गोद में जाने के लिए पृथ्वी पर लोटता हुआ अत्यन्त व्याकुलतापूर्वक रो रहा है। जिसका अभिप्राय यह है कि मैया मुझे गोद में ले ले।
✨ Join free JKYog Online Classes via zoom -
https://www.jkyog.in/online-sessions/
✨ Zoom Link - https://zoom.us/j/6786919240
(Meeting ID: 678 6919 240)
🌐 Official Websites -
JKYog India - https://www.jkyog.in
Swamiji - https://www.swamimukundananda.org
JKYog India Social Media Handles -
🌟 YouTube - https://www.youtube.com/c/JKYogIndia?...
🌟 Facebook - / jkyog.india
🌟 Instagram - / jkyog.india
🌟 Twitter - / jkyogindia
🌟 Pinterest - / jkyogindia
🌟 Whatsapp - https://wa.me/918448941008
🙋 To volunteer for JKYog and Swamiji visit - https://www.jkyog.in/volunteer/
✨About JKYog India -
Jagadguru Kripalu Yog Trust (JKYog India) is a public charitable Trust established by Swami Mukundananda. JKYog India aims at promoting the comprehensive development of the society by teaching the true knowledge of the Vedic scriptures, including the Upanishads, Puranas, Ramayan, Bhagavad Gita etc. In doing so it addresses all – the physical, emotional, intellectual, and spiritual dimensions of human personality.
#dailyjkyogsatsang
#swamimukundananda
#jagadgurushreekripalujimaharaj
All rights reserved.
Jagadguru Kripalu Parishat - Bhakti Dham
www.jkp.org.in
Информация по комментариям в разработке