खाटू श्याम मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गाँव में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल है, जो महाभारत के बर्बरीक (घटोत्कच के पुत्र) को समर्पित है, जिन्हें भगवान कृष्ण से 'कलियुग में श्याम' के नाम से पूजे जाने का वरदान मिला था; भक्त यहाँ श्याम कुंड में स्नान कर, बाबा को फूल, मिश्री, इत्र चढ़ाते हैं और हर साल फाल्गुन मेले में लाखों श्रद्धालु आते हैं.
मुख्य जानकारी:
स्थान: खाटू गाँव, सीकर जिला, राजस्थान, भारत.
समर्पित: खाटू श्याम जी (बर्बरीक, भीम के पोते).
पौराणिक कथा: भगवान कृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में श्याम नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था, क्योंकि उन्होंने महाभारत युद्ध में अपने सिर का दान कर दिया था.
दर्शन: भक्त बाबा श्याम के दर्शन के लिए आते हैं, जो उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
मंदिर और परिसर:
श्याम कुंड: मंदिर से लगभग 200 मीटर पहले स्थित यह पवित्र कुंड है, जहाँ भक्त स्नान करते हैं और माना जाता है कि यहीं पर बाबा का शीश प्रकट हुआ था.
तोरण द्वार: मंदिर के प्रवेश द्वार पर भक्तों द्वारा जयकारे लगाए जाते हैं, खासकर फाल्गुन मेले के दौरान.
कैसे पहुँचें (How to Reach):
रेल: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन रिंगस जंक्शन है; जयपुर जंक्शन भी एक विकल्प है.
बस: जयपुर और रिंगस से खाटू के लिए बसें आसानी से उपलब्ध हैं
भक्त क्या चढ़ाते हैं (Offerings):
प्रसाद (मिश्री, पेड़ा, चूरमा).
फूल, मोर पंखी, गुलाब, इत्र.
प्रमुख मेला (Major Fair):
फाल्गुन मेला (लखी मेला): हर साल होली के आसपास #youtube #follow #celebration #specialvlog #anniversary थी फरवरी-मार्च में लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं और रिंगस से खाटू तक पैदल यात्रा करते हैं
यह मंदिर करोड़ो भक्तों की आस्था का केंद्र है, जो हर साल यहां आकर बाबा श्याम का आशीर्वाद लेते हैं.
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खाटू श्याम मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गाँव में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू तीर्थस्थल है, जो महाभारत के बर्बरीक (घटोत्कच के पुत्र) को समर्पित है, जिन्हें भगवान कृष्ण से 'कलियुग में श्याम' के नाम से पूजे जाने का वरदान मिला था; भक्त यहाँ श्याम कुंड में स्नान कर, बाबा को फूल, मिश्री, इत्र चढ़ाते हैं और हर साल फाल्गुन मेले में लाखों श्रद्धालु आते हैं. [1, 2, 3, 4, 5]
मुख्य जानकारी:
स्थान: खाटू गाँव, सीकर जिला, राजस्थान, भारत.
समर्पित: खाटू श्याम जी (बर्बरीक, भीम के पोते).
पौराणिक कथा: भगवान कृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में श्याम नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था, क्योंकि उन्होंने महाभारत युद्ध में अपने सिर का दान कर दिया था.
दर्शन: भक्त बाबा श्याम के दर्शन के लिए आते हैं, जो उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं. [2, 3, 5, 6, 7, 8]
मंदिर और परिसर:
श्याम कुंड: मंदिर से लगभग 200 मीटर पहले स्थित यह पवित्र कुंड है, जहाँ भक्त स्नान करते हैं और माना जाता है कि यहीं पर बाबा का शीश प्रकट हुआ था.
तोरण द्वार: मंदिर के प्रवेश द्वार पर भक्तों द्वारा जयकारे लगाए जाते हैं, खासकर फाल्गुन मेले के दौरान. [1, 5]
कैसे पहुँचें (How to Reach):
रेल: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन रिंगस जंक्शन है; जयपुर जंक्शन भी एक विकल्प है.
बस: जयपुर और रिंगस से खाटू के लिए बसें आसानी से उपलब्ध हैं. [5, 9]
भक्त क्या चढ़ाते हैं (Offerings):
प्रसाद (मिश्री, पेड़ा, चूरमा).
फूल, मोर पंखी, गुलाब, इत्र. [1, 5]
प्रमुख मेला (Major Fair):
फाल्गुन मेला (लखी मेला): हर साल होली के आसपास फरवरी-मार्च में लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं और रिंगस से खाटू तक पैदल यात्रा करते हैं. [4, 5, 9]
यह मंदिर करोड़ो भक्तों की आस्था का केंद्र है, जो हर साल यहां आकर बाबा श्याम का आशीर्वाद लेते हैं. [2, 5]
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