🎶 गीत: मिट्टी हिंदुस्तान की 🇮🇳
🙏 समर्पण
यह गीत भारत माँ के उन अमर शहीदों को सादर नमन है,
जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर
हमें आज़ादी, सम्मान और सुरक्षित भविष्य दिया।
साथ ही यह रचना भारत की थलसेना, नौसेना और वायुसेना
के हर उस वीर को समर्पित है
जो हर पल सीमा पर खड़ा होकर
हमारी नींद और हमारे सपनों की रक्षा करता है।
आपका बलिदान अमर है… आपका ऋण असीम है।
“मिट्टी हिंदुस्तान की” केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, उसकी विविधता, बलिदान और एकता को नमन है। यह रचना उस मिट्टी को समर्पित है जिसे हमारे वीरों ने अपने रक्त से सींचा और जिसने हमें पहचान दी — एक भारत, श्रेष्ठ भारत।
इस देशभक्ति गीत के माध्यम से हम उन शहीदों, संतों, महापुरुषों और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिनके त्याग से आज हम स्वतंत्र हैं। गीत में भारत की भाषाई, धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हुए यह संदेश दिया गया है कि भले ही हम अलग-अलग हों, लेकिन हमारी आत्मा एक है — हिंदुस्तान।
यह प्रस्तुति उन सभी भारतीयों को समर्पित है जो आज भी अपने कर्म, ईमान और समर्पण से देश को मजबूत बना रहे हैं।
🙏 अगर यह गीत आपके हृदय को छू जाए, तो इसे शेयर करें, अपनी राय कमेंट में लिखें और चैनल को Subscribe करके देशभक्ति संगीत को समर्थन दें।
🎼 Credits
Composition & Lyrics:
✍️ Dr. Ravindra Saini
Technical Assistance:
🎛️ Archit Saini
🎛️ Arnav Saini
Advisor:
🌿 Aditi Saini
Courtesy of:
🎨 Asavari Studio & Arts Roorkee
Special Thanks to AI Assistance:
🤖 ChatGPT
🎵 Suno.com
🎬 Grok.com
🔍 Google Gemini
📊 Perplexity
🙏 Blessings & Best Wishes:
Asavari Studio & Arts Roorkee
🎶 गीत: मिट्टी हिंदुस्तान की
(Original – No Change)
जय-जय हिंदुस्तान की,
जय-जय हिंदुस्तान की।
(Chorus)
सदा रहे इस दुनिया में, जय-जय हिंदुस्तान की,
आओ मिलकर चूमे हम, मिट्टी हिंदुस्तान की।
जय-जय हिंदुस्तान की,
जय-जय हिंदुस्तान की।
(Verse 1)
ऋषि-मुनियों की पावन धरती,
वीरों की ये गाथा है,
झुकता इसके चरणों में,
अंबर का भी माथा है।
इसकी रक्षा में अर्पित,
अपना तन-मन और प्राण हो,
जो गूँज उठे आकाश में,
बस अपना ही राष्ट्रगान हो।
(Verse 2)
भिन्न-भिन्न हैं भाषा अपनी,
पर एक हमारी बोली है,
ईद यहाँ दिवाली अपनी,
रंगों वाली होली है।
मज़हब से भी ऊपर उठकर,
हम भारत की संतान हैं,
कहने को तो देश है ये,
पर इसमें बसती जान है।
(Verse 3)
किसी ने चंदन-तिलक लगाया,
किसी ने दी रुसवाई है,
माँ के पावन दामन पर,
ये कालिख किसने फैलाई है?
कुर्सी की इस जंग में देखो,
अब बिक जाता ईमान है,
आज शहीदों के वादों का,
हर दिन ही अपमान है।
(Verse 4)
फांसी के उन फंदों पर,
जो हँस-हँसकर झूल गए हैं,
हम महलों की चाहत में,
उनकी यादें भूल गए हैं।
तिरंगे में जो सो गया है,
वो रूह बनकर पूछेगा,
मेरे लहू के सौदे को,
क्या वतन मौन ही देखेगा?
(Verse 5)
भूल गये राम रचित मर्यादा पथ,
चक्र सुदर्शन मौन है,
नानक की उस मानवता का,
बोलो रक्षक कौन है?
गूँज उठे फिर डमरू शंकर का,
राणा का मान बचाना है,
भगत सिंह के इंकलाब का,
फिर से स्वर गुँजाना है।
उठो 'बोस' के वीर जवानों,
तुमको अलख जगाना है,
खोया गौरव भारत का,
फिर दुनिया को दिखलाना है।
(Outro)
सदा रहे इस दुनिया में, जय-जय हिंदुस्तान की,
आओ मिलकर चूमे हम, मिट्टी हिंदुस्तान की!
जय-जय हिंदुस्तान की,
जय-जय हिंदुस्तान की।
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