🌿 हरीतकी (Haritaki)
संस्कृत नाम: हरितकी
अंग्रेज़ी नाम: Chebulic Myrobalan
वानस्पतिक नाम (Botanical Name): Terminalia chebula
कुल (Family): Combretaceae
उपयोगी भाग (Part used): फल (Fruit)
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🌸 पर्याय (Synonyms):
अभया, पथ्या, कायस्थ, शिवा, हेमांगी, चेतकी, विभिता, हरिता
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🪶 प्रचलित नाम (Vernacular Names):
हिंदी: हरड़ / हरीतकी
मराठी: हिरडा
संस्कृत: हरीतकी
तमिल: कडुक्कई
इंग्लिश: Chebulic Myrobalan
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📚 वर्गीकरण (Vargikaran):
चरक – वयःस्थापन महाकाषाय, दीपनिय, रसायन वर्ग
सुश्रुत – त्रिफला वर्ग, कषाय स्कन्ध
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🌱 वानस्पतिक परिचय (Botanical Description):
मध्यम आकार का पर्णपाती वृक्ष, लगभग 20–25 मीटर ऊँचा।
पत्तियाँ – अण्डाकार, विपरीत, 7–12 सेमी लंबी।
पुष्प – छोटे, पीले-सफेद, मंजरी में।
फल – अण्डाकार, 2–4 सेमी लम्बे, सूखने पर पाँच धारियाँ।
बीज – कठोर, एक बीज फल में।
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🌾 उत्पत्ति स्थान (Utpatti Sthana):
भारत के अधिकांश भागों में, विशेषकर हिमालय की तराई, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु में।
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⚗️ रस पंचक (Rasa Panchaka):
तत्व गुण
रस (Taste) कषाय (मुख्य), आम्ल, कटु, तिक्त, मधुर – पंचरसयुक्त (लवण रहित)
गुण (Quality) लघु, रूक्ष
वीर्य (Potency) उष्ण
विपाक (Post digestive taste) मधुर
प्रभाव (Special action) रसायन, त्रिदोषशामक
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💊 कर्म (Karma):
त्रिदोष शामक (विशेषतः वात, कफ)
दीपक, पाचन
रेचक (माइल्ड लैक्सेटिव)
रसायन (पुनर्जनक)
मेध्य (स्मरणशक्ति वर्धक)
anuloman (वातनुलोमन)
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🧪 रासायनिक संघटन (Rasaynik Sangathan):
टैनिन्स (Chebulinic acid, Chebulagic acid)
गैलिक एसिड, इलाजिक एसिड
विटामिन C
रेज़िन, एन्थ्राक्विनोन
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⚕️ मात्रा (Matra):
चूर्ण: 3–6 ग्राम
क्वाथ: 40–80 मि.ली.
टेबलेट / अवलेह: योगानुसार
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💊 आमिक प्रयोग (Aamika Prayog):
कब्ज – हरीतकी चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ लें
अजीर्ण, भूख की कमी – सेंधा नमक के साथ
खाँसी, सर्दी – शहद के साथ
नेत्र रोग – त्रिफला क्वाथ से नेत्र धोना
त्वचा रोग – आंतरिक व बाह्य प्रयोग
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🌿 विशिष्ट प्रयोग (Vishishta Prayog):
रसायन प्रयोग – प्रतिदिन अल्प मात्रा में सेवन करने से दीर्घायु व बलवृद्धि होती है।
त्रिफला योग – हरीतकी + आमलकी + बिभीतकी
अभया अवलेह – पाचन सुधार एवं प्रतिकार शक्ति हेतु।
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🩺 प्रयोजन (Prayojan):
हरीतकी लगभग सभी आयुर्वेदिक औषधियों में प्रयुक्त होती है – जैसे त्रिफला, अभयारिष्ट, च्यवनप्राश, अवलेह आदि।
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🍃 हरीतकी के प्रकार (Types of Haritaki):
शास्त्रों में 7 प्रकार वर्णित हैं –
| क्रमांक | नाम | क्षेत्र / विशेषता | मुख्य उपयोग | |----------|--------------------|---------------| | 1️⃣ | विजया | विन्ध्य पर्वत प्रदेश | सर्व रोगों में उपयोगी | | 2️⃣ | रोहिणी | सिंध प्रदेश | व्रण (घाव) चिकित्सा में | | 3️⃣ | पूतना | सिन्धु देश | बाह्य प्रयोग हेतु | | 4️⃣ | अमृता | चम्पा प्रदेश | रसायन प्रयोग में | | 5️⃣ | अभया | हिमालय क्षेत्र | नेत्र रोग, पाचन में | | 6️⃣ | जीवन्ती | सप्तगिरि प्रदेश | शक्ति वृद्धि हेतु | | 7️⃣ | चेतकी | मालवा प्रदेश | औषध निर्माण में |
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