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एक अतिसुन्दर, छोटा सा, सुगन्ध देनेवाला नीला फूल था, जो अन्य फूलों के बीच नम्रता से रहता था और उस एकान्त बगीचे में प्रसन्न हो झूमता रहता था.एक दिन प्रात:काल जब ओस की बूंदें उसकी पंखुड़ियों को सुशोभित कर रही थीं, उसने अपना सिर ऊपर उठाया और इधर-उधर नजर दौड़ाई. उसने देखा कि एक सुन्दर गुलाब का फूल, गर्व से सिर उठाए, बड़ी ही शान से खड़ा है. ऐसा प्रतीत होता था, मानो आकाश में एक हरे रंग के हीरे की जलती हुई मशाल हो. यह देखकर उस छोटे से फूल ने अपने नीले होंठों को खोला और कहा, 'इन फूलों में मैं सबसे अधिक अभागा हूं. इनके बीच मेरा कोई अस्तित्व ही नहीं है. प्रकृति ने मुझे छोटा और गरीब क्यों बनाया है? मैं पृथ्वी से ही लगा रहता हूं. और अपना सिर नीले आकाश की ओर उठा नहीं सकता और न ही अपने चेहरे को गुलाब की भांति सूर्य की ओर मोड़ सकता हूं.'...यह दुनिया के जानेमाने चिंतक, लेखक खलील जिब्रान की कहानी 'महत्त्वाकांक्षी फूल' के अंश हैं.
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महान चिंतक, कलाकार, दार्शनिक, कवि और लेखक खलील जिब्रान 'प्रेम के पहरुआ रचनाकार हैं. उनका जन्म लेबनान के 'बथरी' नगर के एक संपन्न परिवार में हुआ था. जब वह 12 साल के थे, तब माता-पिता के साथ बेल्जियम, फ्रांस, अमेरिका आदि देशों की यात्रा पर गए. अरबी और अंग्रेजी के इस अद्भुत लेबनानी-अमेरिकी लेखक को अपने चिंतन के चलते पादरियों और अधिकारियों की नाराजगी झेलनी पड़ी. उन्हें जाति, यहां तक देश से निकाल दिया गया. अंततः अमेरिका के न्यूयॉर्क में बस गए. आधुनिक अरबी साहित्य में वह प्रेम के संदेशवाहक लेखक हैं. यों उनकी प्रसिद्धि पूरी दुनिया में है. खलील जिब्रान की जिन कृतियों ने पूरी दुनिया में धूम मचाई उनमें- द निम्फ्स ऑव द वैली, स्प्रिट्स रिबेलिअस, ब्रोकन विंग्स, अ टीअर एंड अ स्माइल, द प्रोसेशन्स, द टेम्पेस्ट्स, द स्टॉर्म, द मैडमैन, ट्वेंटी ड्रॉइंग्स, द फोररनर, द प्रोफेट, सैंड एंड फोम, किंगडम ऑव द इमेजिनेशन, जीसस: द सन ऑव मैन, द अर्थ, गॉड्स, द वाण्डरर, द गार्डन ऑव द प्रोफेट, लज़ारस एंड हिज़ बिलवेड शामिल है. सारिका पंकज जनवरी से खास रिश्ता रखने वाले इसी महान कथाकार की प्रकृति पर आधारित कहानी 'महत्त्वाकांक्षी फूल' के साथ आपसे रूबरू हैं. वजह इसी माह खलील जिब्रान की जयंती और पुण्यतिथि दोनों है. जिब्रान का जन्म 6 जनवरी, 1883 को हुआ था और 10 जनवरी, 1931 को आपने इस दुनिया से अलविदा कहा.
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