(1) आदि मे वचन था वचन खुदा के साथ था,
वचन ही तो था खुदा वो ही वचन देहधारी हुआ
मनुष्यों के बीच में रहा
(2) परम पिता की हम स्तुति गायें वह ही है जो बचाता हमें,
सारे पापों को करता क्षमा सारे रोगों को करता चंगा।
(3) मैं तेरे पैर हूँ, मैं तेरे हाथ प्यारे प्रभु ले, तू मुझ से काम।
मैं तेरी आँख हूँ, मैं तेरे कान मेरे इन अंगों को तू अपना मान।
(4) मैं यीशु के साथ नूर में चलूँगा दिन और रात उसके
पीछे मैं चलूँगा पीछे चलूँगा, फ़तह पाऊँगा,
यीशु मेरा मुन्जी मसलूब।
(5) हो शुक्रिया खुदा का जिसने जीवन हमें दिया,
तारीफ़ मसीह की हम करें यह हक हमें दिया।
(6) होके कुर्बान हर गुनाह से तूने मुझको है बचाया,
हर खुशी मिली तुझ में मसीह, जब से दिल में तू है आया।
(7) यीशु तूने किया निहाल, जब मैं शरण में तेरी आया।
(8) मसीह ने मेरे लिए क्या किया पूछो मुझ से मैं गवाही दूंगा,
यीशु है कौन मुझ से पूछो गाके बताऊँगा गीतों में।
(9) हृदय भेट चढ़ायें यीशु को स्तुति प्रसंशा करें,
हम सब सन्त जन मिलकर।
(10) हे यहोवा, हे बल मेरे सदा हैं, सच्चे मार्ग तेरे,
करता है सिद्ध सब मार्ग मेरे हे यहोवा।
(11) यहोवा निस्सी धन्य तेरा नाम, धन्य, धन्य धन्य तेरा नाम
(12) यहोवा चरवाहा मेरा कोई घटी मुझे नहीं है,
हरी चराइयों में मुझे स्नेह से चराता वह है।
(13) धन्यवाद देता हूँ, अनुग्रह पाया,
राज्य में उसके मैं अब आया।
(14) यीशु नाम में कुदरत पायी जाती है,
पाक कलाम में कुदरत पायी जाती है,
जो चश्मा कलवरी से बहता है,
वह आज भी पापों को धोता है।
(15) गाओ-गाओ जय के गीत गाओ,
ताली बजा के तुम गाओ,
यीशु राजा जिन्दा हुआ, हल्लिलूय्याह,
खुशी से यह सबको सुनाओ।
(16) जय-जय यीशु, जय-जय यीशु, जय प्रभु
जय, जय जयकार सिरजनहार, पालनहार, तारनहार ।
(17) गर चाहते छूटना गुनाहों से तुम लहू में कुदरत है,
गर चाहते फ़तह बुराई पर तुम अजीब कुदरत लहू में है।
बोलो जय-जय कुदरत अभी है लहू में, यीशु के,
बोलो जय-जय कुदरत अभी है यीशु के लहू में है।
(18) यीशु के लहू की जय, जय, जय,
यीशु के लोहू की जय।
(19) तू इस्राइल का बादशाह शहज़ादा बिन दाऊद,
अब रब्ब के नाम मे आया ऐ मुन्जी पाक महमूद।
(20) आसमानों में है मेरा भी एक मकान
जिस में रहेंगे, हम जा कर छोड़ेगे जब यह जहाँन।
(21) बढ़ते जायेंगे आगे-आगे पीछे न मुड़ कर देखेंगे।
यीशु रहेगा साथ हम न किसी से डरेंगे।
(22) बोलो जय जय, बोलो जय जय प्रभु यीशू की जय,
महान खुदावन्द, विश्वविधाता तारणहारा हैं।
(23) जय हो जय हो प्रभु हर दिन सुबह और शाम
(24) यहोवा का धन्यवाद हो धन्यवाद हो
(25) हल्लिलूय्याह स्तुति गाएँ हम,
यीशु की स्तुति गाँए हम हाँ हल्लिलूय्याह।
(26) ऐ मेरी जान तू इसी दौर मे चल,
अपने खुदावन्द की राहों में चल राहों में चल।
(27) आवाज़ उठायेंगे, हम साज़ बजायेंगे,
है यीशु महान अपना ये गीत सुनायेंगे।
(28) आओ हम यहोवा के लिए ऊँचे स्वर से गाएँ।
अपनी मुक्ति की चट्टान का जय-जयकार करें।
(29) जय-जय प्रभु यीशु की हमको बचाने आया जगत में,
उसकी स्तुति करो गाओ खुशी के गीत
हे धरती, हे आकाश आया मसीह जग में,
पाप का करने नाश।
(30) बोलो जय जय जय प्रभु यीशु की जय, होशन्ना जय,
प्रभु आता है, कैसी खुशी है हवा में मिलेंगे हम उसके हैं।
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