शिव खेल रहे हैं होली गौरा के संग
मुखड़ा :
शिव खेल रहें हैं होली, गौरा के संग…
शिव खेल रहें हैं होली, गौरा के संग…
कैलाश पर्वत पर छाई मस्ती, बजे डमरू के रंग…
शिव खेल रहें हैं होली, गौरा के संग…॥
अंतरा 1 :
भोले भंडारी रंग लगाए, भस्मी का है गुलाल,
गौरा हँस-हँस रंग बरसावे, लाल गुलाबी गाल।
नंदी भी झूमे, भृंगी भी नाचे, बजे मृदंग के संग,
देवों की टोली गाए बधाई, छाया फागुन रंग।
शिव खेल रहें हैं होली, गौरा के संग…॥
अंतरा 2 :
जटा से बहती गंगा मैया, रंग में आज समाई,
चाँद सितारे देख के लीला, मुस्काएँ अंबर छाई।
कान्हा सा छेड़े भोले शंकर, गौरा हुईं दंग,
प्रेम की पिचकारी से भीगे, तन मन और अंग।
शिव खेल रहें हैं होली, गौरा के संग…॥
अंतरा 3 :
गणपति लाए रंग की थाली, कार्तिकेय संग आए,
रिद्धि-सिद्धि मंगल गाएँ, खुशियों के दीप जलाए।
"हर-हर महादेव" गूँजे, भक्तों के संग-संग,
आनंद बरसे, कृपा बरसे, बजे डमरू के रंग।
शिव खेल रहें हैं होली, गौरा के संग…॥
अंतरा 4 :
रंग है भक्ति का, रंग है शक्ति का, रंग प्रेम उमंग,
जो भी नाम जपे शिव शंकर का, मिट जाएँ सब दंग।
गौरा शंकर की यह होली, पावन करे हर अंग,
मन मंदिर में आज विराजे, भोलेनाथ के रंग।
शिव खेल रहें हैं होली, गौरा के संग…
कैलाश पर्वत पर छाई मस्ती, बजे डमरू के रंग…॥
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शिव खेल रहें हैं होली,
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