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Скачать или смотреть Theory of Opportunity Cost under Increasing Cost -Part - 2 (in Hindi)

  • Economics Artha
  • 2022-04-07
  • 255
Theory of Opportunity Cost under Increasing Cost -Part - 2 (in Hindi)
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Скачать Theory of Opportunity Cost under Increasing Cost -Part - 2 (in Hindi) бесплатно в качестве 4к (2к / 1080p)

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Описание к видео Theory of Opportunity Cost under Increasing Cost -Part - 2 (in Hindi)

वर्द्धमान लागत के अंतर्गत अवसर लागत -सिद्धांत

दो देश और दो वस्तु माडल के अन्तर्गत जब एक देश A को X वस्तु के उत्पादन में अवसर लागत लाभ प्राप्त हो और दूसरे देश B को Y वस्तु के उत्पादन में उक्त लाभ प्राप्त हो तब इस स्थिति में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के अवसर लागत सिद्धांत के अनुसार A देश X वस्तु का उत्पादन तथा निर्यात और B देश Y वस्तु का उत्पादन तथा निर्यात करता है।इस दशा में उत्पादन में वर्द्धमान लागत नियम की क्रियाशीलता के कारण उत्पादन संभावना वक्र केन्द्र की ओर अवतल (नतोदर) होता है। वीडियो में प्रस्तुत A देश तथा B देश से सम्बंधित चित्र में इसे PP1 वक्र के रूप में इसे देखा जा सकता है। उत्पादन संभावना वक्र (अथवा रूपांतरण वक्र) केन्द्र की ओर अवतल इस लिए होता है इस वक्र पर जब एक बिंदु से दूसरे बिंदु पर क्रमशः बढ़ते हैं तो रुपांतरण की सीमांत दरें क्रमशः बढ़ती जाती हैं।ऐसा वर्द्धमान लागत की दशाओं के कारण होता है। यहां A देश के संबंध में X वस्तु के उत्पादन में क्रमिक समान वृद्धि के साथ X वस्तु की अवसर लागत (Y वस्तु के रूप में) निरंतर बढ़ती जाती है।ऐसी ही स्थिति B देश के उत्पादन संभावना वक्र के संबंध में भी होगी।
A  देश से संबंधित चित्र में PP1 देश A का उत्पादन संभावना वक्र है तथा DD1 देश A में दोनों वस्तुओं( Xतथा Y) के मूल्यानुपात को प्रदर्शित करने वाली रेखा है। R बिंदु पर DD1 रेखा PP1को स्पर्श करती है।यह बिंदु व्यापार पूर्व A देश का संस्थिति बिंदु है जिसके द्वारा वस्तु X की OQ मात्रा तथा वस्तु Y की OK मात्रा का उत्पादन करना इष्टतम होगा।जैसा कि हम देख चुके हैं A देश को X वस्तु के उत्पादन में तुलनात्मक सुविधा उपलब्ध है, वह X वस्तु के उत्पादन में अधिकाधिक साधनों का उपयोग करके इसके निर्यात में वृध्दि करने का प्रयास करेगा। इसके कारण  साधनों का हस्तांतरण Y वस्तु के उत्पादन से Xवस्तु की ओर होने लगेगा। दूसरी ओर, B देश द्वारा वस्तु X के आयात में वृद्धि होने लगेगी क्योंकि B देश द्वारा अपने अधिकाधिक साधनों को Y वस्तु में विनियोजित करना और इसके निर्यात के बदले X वस्तु का आयात करना उसके लिए वांछनीय होगा।उक्त कारणों से Y वस्तु के मूल्य की तुलना में X वस्तु के मूल्य में निरंतर वृद्धि होने लगेगी और दोनों वस्तुओं के मूल्यानुपात को प्रदर्शित करने वाली रेखा की ढाल में तीव्रता बढ़ने लगेगी।फलत: मूल्य रेखा की ढाल चित्र में DD1से परिवर्तित होकर FF1 का रूप ले लेगी।अब संतुलन बिंदु R से परिवर्तित हो कर S हो जाएगा जहां X वस्तु का उत्पादन OQ से बढकर OV तथा वस्तु Y का उत्पादन  OK से घटकर OL हो जाएगा।अब नयी मूल्य रेखा FF1 के आधार पर A देश को यह निर्धारित करना है कि वह X वस्तु के कुल उत्पादन OV में से कितना निर्यात करे और कितना घरेलू उपभोग के लिए प्रयुक्त करे ? चित्र में सामूहिक संतुष्टि को अधिकतम करने के लिए यदि वह T बिंदु द्वारा प्रदर्शित उत्पादन का चयन करता है तो वह X वस्तु की OU मात्रा तथा Y वस्तु की OJ मात्रा का उत्पादन करेगा।इस स्थिति में यह देखा जा सकता है कि वह संतुलन बिंदु R की तुलना में (जब X वस्तु का निर्यात शून्य है) X वस्तु की UV मात्रा का निर्यात करेगा और  उसके पास X वस्तु की OU मात्रा तथा Y वस्तु की OJ मात्रा उपभोग के लिए उपलब्ध होगी जो व्यापार न करने की स्थिति R बिंदु द्वारा प्रदर्शित X वस्तु की OQ मात्रा तथा Y वस्तु की OK मात्रा की तुलना क्रमशः QU तथा JK मात्रा अधिक होगी।इस प्रकार तुलनात्मक अवसर लागत सिद्धांत के अनुसार उत्पादन तथा निर्यात करने से A देश को लाभ होगा।
इसी प्रकार B देश से संबंधित चित्र में व्यापार पूर्व संतुलन बिंदु R1है जिस पर X वस्तु का उत्पादन OK1 तथा Y वस्तु का उत्पादन OQ1 है। व्यापार करने की स्थिति में मूल्य रेखा DD1 से परिवर्तित होकर II1 हो जाती है और नया संतुलन बिंदु R1 से हटकर S1हो जाता है जिस पर X वस्तु का उत्पादन OL1 तथा Y वस्तु का उत्पादन OV1 हो जाता है।अब नयी मूल्य रेखा पर यदि T1 बिंदु द्वारा निर्धारित व्यापार करने का चयन किया जाता है तब X वस्तु का उत्पादन OJ1तथा Y वस्तु का उत्पादन OU1 होगा।अब B देश Y वस्तु की V1U1 मात्रा का निर्यात करेगा और उसके पास उपभोग हेतु X वस्तु की OJ1 मात्रा तथा Y वस्तु की OU1 मात्रा उपलब्ध होगी। स्पष्ट है कि व्यापार न करने की स्थिति की तुलना में B देश को दोनों वस्तुओं की अधिक मात्राएं प्राप्य हैं और उसे व्यापार करने पर लाभ प्राप्त हो रहा है।
यहां एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख करना आवश्यक है और वह यह कि वर्द्धमान लागत की दशाओं में दोनों देश दोनों वस्तुओं का उत्पादन करेंगे और इस प्रकार किसी एक वस्तु के उत्पादन में पूर्ण विशिष्टीकरण न प्राप्त करके आंशिक विशिष्टीकरण प्राप्त करेंगे।

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