भगवान दत्तात्रेय परम "अवधूत" हैं और त्रिदेवों—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—के एकीकृत अवतार हैं। नारद पुराण से उद्धृत और देवर्षि नारद द्वारा रचित यह पवित्र 'दत्तात्रेय स्तोत्रम्' प्रत्येक भक्त के लिए एक अत्यंत शक्तिशाली रक्षा कवच के समान है।
इस स्तोत्र के नित्य पाठ या श्रवण के चमत्कारी लाभ:
• पितृ दोष से मुक्ति: पूर्वजों से संबंधित बाधाओं और पितृ दोष निवारण के लिए यह स्तोत्र अचूक माना गया है।
• मानसिक शांति और स्पष्टता: यह मन की व्याकुलता, चिंता (Anxiety) और तनाव को जड़ से समाप्त कर मानसिक स्पष्टता प्रदान करता है।
• त्रिदेवों का आशीर्वाद: इसके श्रवण से आपको सृष्टि के रचयिता, पालनकर्ता और संहारक—तीनों देवों का एक साथ दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है।
• नकारात्मकता का नाश: घर और जीवन से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए यह सबसे प्रभावशाली वैदिक मंत्र है।
संपूर्ण श्लोक एवं भावार्थ -
॥ श्रीदत्तात्रेयस्तोत्रम् ॥
जटाधरं पाण्डुरङ्गं शूलहस्तं कृपानिधिम् । सर्वरोगहरं देवं दत्तात्रेयमहं भजे ॥
• मैं जटाधारी, श्वेत वर्ण वाले, हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले और करुणा के सागर, समस्त रोगों को हरने वाले भगवान दत्तात्रेय का भजन करता हूँ।
जगदुत्पत्तिकर्त्रे च स्थितिसंहार हेतवे । भवपाशविमुक्ताय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• जगत की उत्पत्ति, स्थिति और संहार के कारणभूत, संसार के बंधनों से मुक्त करने वाले दत्तात्रेय आपको नमस्कार है।
जराजन्मविनाशाय देहशुद्धिकराय च । दिगम्बरदयामूर्ते दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• बुढ़ापे और जन्म के चक्र का विनाश करने वाले, शरीर को शुद्ध करने वाले, दिशाओं को ही वस्त्र बनाने वाले दया की मूर्ति दत्तात्रेय आपको नमस्कार है।
कर्पूरकान्तिदेहाय ब्रह्ममूर्तिधराय च । वेदशास्त्रपरिज्ञाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• कपूर के समान उज्ज्वल शरीर वाले, साक्षात ब्रह्म स्वरूप धारण करने वाले और समस्त वेद-शास्त्रों के ज्ञाता दत्तात्रेय आपको नमस्कार है।
ह्रस्वदीर्घकृशस्थूल-नामगोत्र-विवर्जित । पञ्चभूतैकदीप्ताय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• जो छोटे-बड़े, दुबले-मोटे, नाम और गोत्र की सीमाओं से परे हैं, और जो पांचों तत्वों में चमकते हैं, उन दत्तात्रेय को नमस्कार है।
यज्ञभोक्ते च यज्ञाय यज्ञरूपधराय च । यज्ञप्रियाय सिद्धाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• यज्ञ के भोक्ता, स्वयं यज्ञ स्वरूप और यज्ञों के प्रिय, सिद्ध पुरुष दत्तात्रेय को नमस्कार है।
आदौ ब्रह्मा मध्ये विष्णुरन्ते देवः सदाशिवः । मूर्तित्रयस्वरूपाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• आदि में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अंत में सदाशिव—तीनों देवों के स्वरूप दत्तात्रेय आपको नमस्कार है।
भोगालयाय भोगाय योगयोग्याय धारिणे । जितेन्द्रियजितज्ञाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• जो भोगों के आधार हैं और योग के योग्य हैं, जिन्होंने अपनी इंद्रियों और ज्ञान को जीत लिया है, उन दत्तात्रेय को नमस्कार है।
दिगम्बराय दिव्याय दिव्यरूपधराय च । सदोदितपरब्रह्म दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• आकाश रूपी वस्त्र धारण करने वाले, दिव्य रूप वाले और सदैव उदित रहने वाले परब्रह्म दत्तात्रेय आपको नमस्कार है।
जम्बुद्वीपमहाक्षेत्रमातापुरनिवासिने । जयमानसतां देव दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• जम्बुद्वीप के महाक्षेत्र मातापुर (माहुर) में निवास करने वाले और भक्तों के मन को जीतने वाले देव दत्तात्रेय को नमस्कार है।
भिक्षाटनं गृहे ग्रामे पात्रं हेममयं करे । नानास्वादमयी भिक्षा दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• जो हाथ में स्वर्ण पात्र लेकर गांव-गांव भिक्षा मांगते हैं और जीवन के विविध अनुभवों को भिक्षा रूप में स्वीकार करते हैं, उन दत्तात्रेय को नमस्कार है।
ब्रह्मज्ञानमयी मुद्रा वस्त्रे चाकाशभूतले । प्रज्ञानघनबोधाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• जिनकी मुद्रा ब्रह्मज्ञान से ओतप्रोत है, आकाश और पृथ्वी ही जिनके वस्त्र हैं, उस शुद्ध चेतना के स्वरूप दत्तात्रेय को नमस्कार है।
अवधूतसदानन्दपरब्रह्मस्वरूपिणे । विदेहदेहरूपाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• जो अवधूत हैं, सदा आनंदित रहने वाले परब्रह्म स्वरूप हैं और शरीर में रहकर भी विदेह हैं, उन दत्तात्रेय को नमस्कार है।
सत्यंरूपसदाचारसत्यधर्मपरायण । सत्याश्रयपरोक्षाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• सत्य स्वरूप, सदाचारी और सत्य धर्म में तत्पर रहने वाले, सत्य के आश्रयदाता दत्तात्रेय आपको नमस्कार है।
शूलहस्तगदापाणे वनमालासुकन्धर । यज्ञसूत्रधरब्रह्मन् दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• हाथ में त्रिशूल और गदा धारण करने वाले, गले में वनमाला पहनने वाले और यज्ञोपवीत धारण करने वाले ब्रह्मदत्त को नमस्कार है।
क्षराक्षरस्वरूपाय परात्परतराय च । दत्तमुक्तिपरस्तोत्र दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• जो क्षर (नाशवान) और अक्षर (अविनाशी) दोनों के स्वरूप हैं और जो सर्वोच्च से भी उच्च हैं, उन मुक्तिदाता दत्तात्रेय को नमस्कार है।
दत्त विद्याढ्यलक्ष्मीश दत्त स्वात्मस्वरूपिणे । गुणनिर्गुणरूपाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• विद्या के भंडार, लक्ष्मी के स्वामी, अपने आत्मा स्वरूप में स्थित और सगुण एवं निर्गुण दोनों रूपों वाले दत्तात्रेय को नमस्कार है।
शत्रुनाशकरं स्तोत्रं ज्ञानविज्ञानदायकम् । सर्वपापं शमं याति दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
• यह स्तोत्र शत्रुओं का नाश करने वाला और ज्ञान-विज्ञान प्रदान करने वाला है। इसके पाठ से समस्त पाप शांत हो जाते हैं। दत्तात्रेय आपको नमस्कार है।
Lord Dattatreya is the supreme "Avadhuta" and the unified form of the Holy Trinity—Brahma, Vishnu, and Mahesh. This sacred stotram, composed by Sage Narada and found in the Narada Purana, is a powerful protective shield (Kavacha) for the devotee.
Chanting or listening to this stotram with a steady mind is believed to:
1 Eliminate obstacles related to ancestors (Pitru Dosha).
2 Provide mental clarity and destroy anxiety.
3 Grant the combined blessings of the Creator, Preserver, and Destroyer.
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