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Скачать или смотреть द्वारका कृष्ण नगरी krishan धाम। 🛕🛐!!

  • 𝗙𝗔𝗖𝗧 𝗞𝗜 𝗗𝗨𝗡𝗜𝗬𝗔𝟭𝟴
  • 2025-12-29
  • 12
द्वारका कृष्ण नगरी krishan धाम। 🛕🛐!!
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Описание к видео द्वारका कृष्ण नगरी krishan धाम। 🛕🛐!!

द्वारका कृष्ण नगरी krishan धाम। 🛕🛐!! #krishan #ram #dvarka #krishanstatus #nagrinagri #krishan #god
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केदारनाथ की कहानी मुख्य रूप से पांडवों और नर-नारायण ऋषियों से जुड़ी है, जहाँ पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव के दर्शन चाहते थे, और शिव ने बैल (भैंसे) का रूप धारण कर लिया, जिसकी पीठ धरती में समा गई, जिसे अब ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है; वहीं नर-नारायण ने यहाँ तपस्या कर शिव से इस स्थान पर वास करने का वरदान पाया था, और आदि शंकराचार्य ने मंदिर का जीर्णोद्धार किया.  

पांडवों की कथा:

महाभारत युद्ध के बाद, पांडव अपने भाइयों की हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव से आशीर्वाद चाहते थे. 

भगवान शिव उनसे रुष्ट थे और दर्शन नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने बैल (भैंसे) का रूप धारण कर लिया और अन्य पशुओं में मिल गए. 

भीम ने शिव को पहचान लिया और उन्हें रोकने के लिए दो पहाड़ों पर पैर फैला दिए, लेकिन शिव धरती में समाने लगे. भीम ने उनकी पीठ पकड़ ली, जो जमीन से बाहर रह गई. 

पांडवों की भक्ति और इच्छाशक्ति से प्रसन्न होकर, शिव ने उन्हें दर्शन दिए और पाप मुक्त किया. जिस स्थान पर भैंसे की पीठ निकली, वहीं केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (भैंसे की पीठ के आकार का) स्थापित हुआ. 

नर-नारायण की कथा: 

सत्ययुग में, नर और नारायण नामक दो ऋषियों ने हिमालय के केदार श्रृंग पर कठोर तपस्या की.

उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर, भगवान शिव ने ज्योतिर्लिंग के रूप में यहाँ हमेशा निवास करने का वरदान दिया.

मंदिर का निर्माण और जीर्णोद्धार:

माना जाता है कि पांडवों ने भगवान शिव को सम्मानित करने के लिए मूल मंदिर का निर्माण किया था. 

आदि गुरु शंकराचार्य (8वीं-9वीं सदी) ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और इसके महत्व को पुनः स्थापित किया. 

महत्व:

केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और उत्तराखंड के चार धामों में से एक है. 

यहाँ का शिवलिंग स्वयंभू (स्वयं प्रकट) है, जो भगवान शिव के बैल रूप की पीठ का प्रतीक है. 



Dwarkadhish (Lord Krishna's city) story in English involves Lord Krishna establishing the magnificent city of Dwarka after leaving Mathura, a prosperous kingdom built with divine help, which tragically submerged into the Arabian Sea after his departure, leaving behind the significant Dwarkadhish Temple, a key pilgrimage site, and submerged ruins suggesting an ancient, planned city. Legends also tell of Rukmini's thirst and Sage Durvasa's curse, and the temple's repeated destruction and reconstruction over centuries. 

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