His sweet Maid Part-1
Overview:-आज नोगामी मेंशन में बड़ी चहल पहल थी, उसे किसी दुल्हन की तरह सजाया जा रहा था। उसके बड़े हॉल पर फूलों का एक खूबसूरत मंडप बना हुआ था।
एक औरत जो दिखने में खूबसूरत थी और सिम्पल सी थी उसने वहां पर काम कर रहे एक आदमी से कहा -
" काका जल्दी काम करिये, देरी हुई तो मां जी नाराज़ हो जायेंगी "
औरत ने ये बात कही ही थी कि यहां एक बुजुर्ग औरत आती हैं जो दिखने में ज्यादा उम्र की थी लेकिन उनके चेहरे पर एक अलग तेज था।
बुजुर्ग औरत ने कहा, " स्वाति बहु, सब तैयारी हो गई है न ?, मुहूर्त का समय होने वाला है, हमें देरी बिल्कुल भी नहीं पसंद "
बुजुर्ग महिला की बात पर स्वाति जी कहती हैं, " जी मां जी सब हो गया है, बस कुछ काम बचनिशी अभी भी दुल्हन के जोड़े में थी , उसके साथ मिष्ठी भी थी । दोनों एक रूम के बाहर खड़ी हुई थी । उस रूम के दरवाजे को देख निशी की सांसें रूकी हुई थी ।
निशी , मिष्ठी का हाथ पकड़ घबराहट भरी आवाज में बोली - " मिष्ठी मैं नहीं जाऊंगी अंदर , मुझे डर लग रहा है "
निशी की इस बात पर मिष्ठी बोली - " अंदर तो तुम्हें जाना पड़ेगा , आज से यही तुम्हारा रूम है , अब जाओ अंदर "
निशी मुंह बना बोली - " मिष्ठी तुम जानती हो न मुझे उनसे कितना डर लगता है , उनकी एक बार मैंने आवाज़ सुनी थी , निशी दर्द में होती है , लेकिन उससे वर्चस्व को कोई फर्क नहीं पड़ता है , वो निशी के नेक पर एक ही जगह पर शक किये जा रहा था , बाइट किये जा रहा था ।
निशी की रोने जैसे हालत हो जाती है , क्योंकि उसको सच में बहुत दर्द हो रहा था , उसकी स्कीन जल रही है , ऐसा निशी को फील हो रहा था ।
निशी दर्द भरी आवाज में वर्चस्व से बोली - " आह. प्लीज़ रूक जाइये , ये बहुत दुख रहा है "
निशी ने वर्चस्व को रूकने को कहा , लेकिन वो नहीं रूका , वर्चस्व निशी के नेक पर बाइट करता रहता है , जब तक की निशी रोने नहीं लगती है ।
जब निशी किसी छोटे बच्चे की सिसकने लगती है , तब जाके वर्चस्व अपने होंठ निशी के नेक से हटाता है ।
वर्चस्व ने बहुत बुरी तरह निशी के नेक पर बाइट किया था , जहां पर उसने बाइट किया था , वहां पर पूरा रेड रेड हो गया था , मानो अगर वर्चस्व अब न रूकता तो , निशी की स्किन से खून ही निकलने वाला था ।
वर्चस्व उस बाइट के निशान को घूरता है , फिर निशी के चेहरे की तरफ देखता है !
निशी का चेहरा लाल पड़ा हुआ था , आंखों से आंसू गिरने के निशान पड़े हुए थे , और वो अपने होंठों को बाइट कर रही थी । क्योंकि उसको अपने नेक पर जलन हो रही थी , उस दर्द और जलन में वो अपने होंठों को बाइट कर रही थी !
वर्चस्व ने निशी का ऐसा हाल देखा तो उसके चेहरे पर शातिर से भाव आ जाते हैं , जैसे निशी को दर्द में देख उसे अच्छा लग रहा हो ? !
वर्चस्व ने कुछ पल रोती हुई निशी को देखा फिर वो निशी से बोला - " सुहागरात का गिफ्ट कैसा लगा बीबी ? "
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