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📿 बालाजी रो चमत्कारी भजन – संजीवणी लायो बजरंगी
यह भजन बालाजी महाराज (श्री हनुमानजी) की उस अमर लीला को समर्पित है, जब लंकाकांड के महासंग्राम में मेघनाथ की शक्ति से लक्ष्मणजी मूर्छित हो गए थे। उस समय पूरा रघुकुल शोक में डूब गया था, चारों ओर निराशा छा गई थी और ऐसा लगने लगा था कि अब रामकथा का दीप बुझ जाएगा। उसी अंधकार भरे समय में पवनपुत्र बजरंगबली आशा की किरण बनकर प्रकट हुए।
रामभक्त हनुमानजी का यह चरित्र केवल शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा, त्याग और समर्पण की सर्वोच्च मिसाल है। जब रामजी ने व्याकुल होकर लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा का उपाय पूछा, तब वैद्य सुषेण ने बताया कि केवल हिमालय की संजीवणी बूटी ही लक्ष्मण को बचा सकती है। समय बहुत कम था, रात गहरी थी और मार्ग कठिन, पर जहाँ राम का नाम हो, वहाँ असंभव कुछ भी नहीं।
इस भजन में उसी क्षण का सजीव वर्णन है, जब हनुमानजी ने रामचरणों में शीश झुकाकर आज्ञा ली और पल भर में आकाश मार्ग से उड़ चले। पवन के समान वेग, बिजली सी फुर्ती और हृदय में केवल एक ही संकल्प – “राम काज करिबे को आतुर”। यह भजन उस उड़ान को शब्दों में पिरोता है, जहाँ अंधेरी रात, गर्जते बादल और काँपता हुआ आकाश भी बजरंगबली के पराक्रम का साक्षी बना।
जब हनुमानजी हिमालय पहुँचे और संजीवणी बूटी पहचान नहीं पाए, तब उन्होंने जो निर्णय लिया, वही उन्हें अद्वितीय बनाता है। उन्होंने संपूर्ण पर्वत को ही उठा लिया। यह दृश्य भक्ति साहित्य का सबसे अद्भुत क्षण है – एक भक्त, भगवान के भक्त के प्राण बचाने के लिए पूरा पर्वत उठा लाता है। इस भजन में उस दृश्य को देसी मारवाड़ी अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया है, जो सुनने वाले के रोंगटे खड़े कर देता है।
संजीवणी के प्रभाव से जब लक्ष्मणजी पुनः जीवित हुए, तब केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और मर्यादा की विजय हुई। रामजी की आँखों से बहते आँसू, हनुमानजी को गले लगाना और उन्हें अपना हृदय मान लेना – यह सब इस भजन के भावों में गहराई से समाया हुआ है। यही कारण है कि हनुमानजी को आज भी संकटमोचन कहा जाता है।
यह भजन केवल एक कथा नहीं, बल्कि आज के समय के लिए एक संदेश है। जब भी जीवन में अंधकार छाए, जब रास्ते बंद दिखें, जब अपने भी साथ छोड़ते लगें – तब बालाजी का नाम लेना ही सबसे बड़ा सहारा है। जिस प्रकार लक्ष्मण के लिए संजीवणी बनी, उसी प्रकार हनुमानजी आज भी अपने भक्तों के जीवन में आशा की संजीवणी बनकर आते हैं।
मारवाड़ी भाषा की मिठास, देसी शब्दों की गूंज और लोकभक्ति की सुगंध इस भजन को विशेष बनाती है। यह भजन गाँव की चौपाल से लेकर मंदिर की परिक्रमा तक, हर जगह गाया जा सकता है। ढोलक, थाली और मंजीरे के साथ जब यह भजन गूंजता है, तो वातावरण पूरी तरह राममय और हनुमानमय हो जाता है।
बालाजी महाराज शक्ति के नहीं, भक्ति के देवता हैं। वे अहंकार तोड़ते हैं, डर भगाते हैं और टूटे हुए मन को फिर से खड़ा कर देते हैं। यही भावना इस भजन का मूल है। यह भजन उन सभी भक्तों के लिए है, जो जीवन में किसी न किसी युद्ध से गुजर रहे हैं और जिन्हें एक संजीवणी की तलाश है।
यदि यह भजन आपको भीतर तक छू जाए, तो इसे अपने मित्रों, परिवार और भक्त मंडली के साथ साझा करें। बालाजी का नाम जितना फैलाओगे, उतनी ही कृपा बरसेगी।
हनुमानजी सब पर अपनी कृपा बनाए रखें, सबके संकट हरें और सबको शक्ति, भक्ति और विवेक प्रदान करें।
🚩 बोलो पवनपुत्र हनुमान की जय
🚩 बोलो संकटमोचन बालाजी महाराज की जय
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