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Скачать или смотреть रानी रूपवती और दो राजकुमारों की बर्बादी || Ruin of Queen Roopvati and the two princes

  • rahul super fact
  • 2025-07-16
  • 1445
रानी रूपवती और दो राजकुमारों की बर्बादी || Ruin of Queen Roopvati and the two princes
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Описание к видео रानी रूपवती और दो राजकुमारों की बर्बादी || Ruin of Queen Roopvati and the two princes

रानी रूपवती और दो राजकुमारों की बर्बादी की || Ruin of Queen Roopvati and the two princes #hindistory
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धारा नगरी… एक ऐसा राज्य जहाँ न दुख था, न दरिद्रता, न युद्ध की आहट, न किसी आक्रोश की छाया। राजा खडग सिंह का राज्य — जहां न्याय की गूंज मंदिरों की घंटियों की तरह थी और रानी रूपवती — जिनके रूप और मर्यादा की मिसाल आसमान तक गूंजती थी।
रानी रूपवती, सुंदरता में अनुपम, संस्कारों में आदर्श, एक सच्ची पतिव्रता स्त्री थीं। उनके आँचल की छाया में दो पुत्र पले-बढ़े — राजकुमार रूप और राजकुमार बसंत। दोनों भाई जितने सुंदर, उतने ही समझदार। महल में हँसी-खुशी के गीत गूंजते थे। ऐसा लगता था मानो धारा नगरी में स्वर्ग उतर आया हो।
लेकिन...
एक दिन काल की ऐसी छाया पड़ी कि पूरी नगरी की रौनक फीकी पड़ गई। रानी रूपवती अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं। महल में शोक छा गया। राजा ने देश के कोने-कोने से वैद्य बुलवाए, महंगे से महंगे उपचार करवाए, लेकिन सब व्यर्थ।
रानी की हालत दिन-प्रतिदिन गिरती जा रही थी। उनका चेहरा पीला पड़ता गया, शरीर क्षीण होता गया। अब रानी ज़्यादातर वक्त अपने कक्ष की खिड़की से बाहर बग़ीचे की ओर देखा करतीं। वहीं एक पेड़ पर एक घोंसला था — जिसमें एक चिड़िया, एक चिड़ा और उनके दो नन्हें बच्चे रहते थे।
रानी घंटों उन्हें निहारतीं… मन को थोड़ी शांति मिलती… सोचती, “कितना प्यारा दृश्य है — एक छोटा सा परिवार, जिसमें केवल स्नेह और ममता है…”
लेकिन एक दिन...
चिड़ा दाना लेने गया हुआ था… और तभी रानी ने देखा — कि नई आई चिड़िया ने उन नन्हें बच्चों को घोंसले से नीचे गिरा दिया। मासूम परिंदे नीचे गिरकर मर गए।
रानी की आँखें फटी रह गईं।
उस क्षण जैसे कोई गहरी चोट उनके दिल में उतर गई हो।
वह सोचने लगीं —
"क्या मेरी भी यही हालत होगी?
अगर मैं नहीं रही तो… क्या राजा किसी और को इस महल में लाएंगे?
क्या वह नई रानी मेरे बच्चों को ममता देगी?
या उन नन्हीं चिड़ियों की तरह मेरे रूप और बसंत भी…?"
उनकी आँखों से आँसुओं की धार बह निकली।
उस रात उन्होंने अपने बच्चों को अपने पास बुलाया। रूप और बसंत माँ के पास आकर बैठ गए।
रानी ने उन्हें गले लगाया, उनके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा —
"मेरे लाल… अगर मैं तुम्हारे साथ न रह सकूं, तो वादा करो… तुम एक-दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ोगे।"
रूप बोला —
"माँ! आप ऐसी बातें क्यों कर रही हैं? आप तो जल्दी ही ठीक हो जाएंगी…"
बसंत भी मासूमियत से बोला —
"माँ! हम आपके बिना कैसे रहेंगे…?"
रानी के आँसू बह निकले।
उन्होंने दासी से कहा —
"राजा को बुलाओ।"
राजा खडग सिंह जैसे ही रानी के कक्ष में पहुँचे, उन्होंने देखा — रानी शून्य में ताक रही थी… चेहरा शांति से भरा था… लेकिन आँखों में पीड़ा थी।
राजा ने रानी का हाथ पकड़ कर कहा —
"रूपवती, तुम चिंता मत करो। मैं हर कोना छान मारूंगा। तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा…"
रानी बोलीं —"महाराज… अब शायद देर हो चुकी है। मुझे मृत्यु का आभास हो रहा है।
लेकिन जाने से पहले आपसे एक वचन चाहती हूँ।
मेरे बाद… आप कभी दूसरा विवाह नहीं करेंगे।"राजा अवाक रह गया।लेकिन फिर उसने गंभीर स्वर में कहा —
"मैं वचन देता हूँ रानी।"रानी ने चिड़ियों की सारी कहानी सुनाई और कहा —
"मेरे बच्चों को किसी सौतेली माँ के हवाले मत करना…" राजा की आँखें भर आईं।
वह बोले —
"मैं रूप और बसंत को अपने प्राणों से भी ज़्यादा प्रेम दूँगा।"
इतना सुनना था कि रानी के मुख पर एक शांति सी छा गई।
और… अगली ही साँस में उन्होंने संसार को त्याग दिया।
राजा दहाड़ें मार-मार कर रो पड़ा।
महल में मातम छा गया।

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