भगवान श्री कृष्ण के चरणों में समर्पित यह मधुर वंदना 'जय जनार्दन' आपके मन को शांति और भक्ति के सागर में ले जाएगी। इस गीत में कान्हा के मनमोहक रूप और उनकी गीता के दिव्य ज्ञान का वर्णन किया गया है।
इस भजन में प्रभु के 'श्याम वर्ण', उनके 'पीतांबर' और 'मुरली' की मधुरता का बखान है। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि भवसागर से पार उतरने की एक पुकार है।
Genre: Devotional / Krishna Bhajan
Language: Hindi
Theme: Bhakti & Karma Yoga
Mood: Peaceful / Meditative
🎼 Lyrics (गीत के बोल)
स्थायी:
नव जलधर सम श्याम वर्ण, पीताम्बर ज्योति प्रकाश,
हृदय कमल में वास करो प्रभु, मिटे द्वैत का पाश।
मस्तक सोहे मोर मुकुट, नयनों में करुणा अपार,
अधर धरे जो वेणु मधुर, सम्मोहित सकल संसार।
अंतरा 1:
अनंत कोटि ब्रह्मांड नायक,
भक्त जनों के सुख दायक।
जय जनार्दन, जय गोपाला, जय जय नन्द कुमार,
तव चरणों में अर्पण प्रभु, मेरा जीवन आधार।
हे मधुसूदन, हे मनमोहन, करुणा सिन्धु अपार,
भव सागर से नैया मेरी, कर दो प्रभु अब पार।
अंतरा 2:
कर्म योग के सूत्रधार तू, गीता का दिव्य प्रबोध,
अज्ञान तिमिर को दूर करे जो, ऐसा तेरा शोध।
रास रचैया, बंसी बजैया, योगेश्वर घनश्याम,
कण-कण में व्यापित है केशव, तेरा पावन नाम।
मौन/भाव:
शून्य से परे, सत्य की मूरत,
अंतर्मन में, तेरी सूरत।
कृष्ण... सनातन... ईश्वर...
समापन:
जय जनार्दन, जय गोपाला, जय जय नन्द कुमार,
तव चरणों में अर्पण प्रभु, मेरा जीवन आधार।
हे मधुसूदन, हे मनमोहन, करुणा सिन्धु अपार,
भव सागर से नैया मेरी, कर दो प्रभु अब पार।
हरे कृष्णा... हरे कृष्णा...
कृष्णा कृष्णा... हरे हरे...
⚖️ Copyright & Credits Info
Lyrics (गीतकार): Swar Vandan
Composition (संगीत): Swar Vandan
Vocals (गायक): Swar Vandan
Copyright Notice: © 2026 Swar Vandan. All Rights Reserved.
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