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वीडियो में दिखाए गए सभी पात्र और दृश्य काल्पनिक हैं और इनका किसी वास्तविक व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है।
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(मुखड़ा):
मन फूला फूला फिरे, ये जग कैसा खेला रे
माँ कहे मेरा धन है, बहन कहे मेरा भैया
भाई कहे मेरा सहारा, प्रीतम कहे मेरा साथी
ये जग कैसा नाता रे
(अंतरा 1)
जब तक देह में प्राण रहे, सबको अपना भान रहे
ज्यों ही प्राण उड़ गए, सबका मन ठिकाना भटके
ये जग कैसा नाता रे
चार लोग मिल बाँस उठाए, ले चले काँधे जोत
चिता में अग्नि जगाई, भस्म हुई सब कोट
ये जग कैसा नाता रे
कहत कबीर सुनो संगी, यह माया का फंदा
छोड़ दे जग की आस, पकड़ ले राम का दामन
यही सत्य नाता रे
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(अंतरा 2)
मन फूला फूला फिरे, देख ये मोह का जाल रे
रक्त का रिश्ता कहे कोई, सम्बन्ध कहे कोई नाम
धर्म जाति के बंधन बाँधे, सब व्यर्थ इनका दावा
देख ये कैसा नाता रे
जब तक शरीर साथ दे, सबका अपना स्वारथ रहे
आत्मा जब निकल गई, खोजे कोई न पता
देख ये कैसा नाता रे
चार वर्ण मिल जीव बनाया, चलाया कर्म की डोर
अंत में एक ही गति, मिट्टी में मिल जाना
देख ये कैसा नाता रे
कहत कबीर सुनो प्राणी, तू है अमर आत्मा
छोड़ देह का अभिमान, पा ले परमात्म का ज्ञान
वही सच्चा नाता रे
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(अंतरा 3)
मन फूला फूला फिरे, हरि से बिछड़ा मीत रे
मोह कहे मेरा है तू, अहंकार कहे मेरा राज
माया कहे मेरा दास है, लोभ कहे मेरा धन
हरि से बिछड़ा प्रीत रे
जब तक इनका साथ रहा, भूला रहा हरि नाम
ज्यों ही समय पलटा, ये सब खड़े पराये
हरि से बिछड़ा प्रीत रे
चार पल भर की यह देहा, चार दिन का मेला
अंत समय संग न जाए, न धन न ये नाते
हरि से बिछड़ा प्रीत रे
कहत कबीर सुनो भाई, एक ही सहारा है
छोड़ सब संसार की आस, लगा ले श्याम की शरण
वही अनंत नाता रे
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