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Скачать или смотреть श्री भक्ति प्रकाश भाग [871](सिमरन एवं सेवा) भाग १३बच्चों पर चर्चा भाग १३**सरलता*

  • Bhakti me Shakti
  • 2026-02-08
  • 368
श्री भक्ति प्रकाश भाग [871](सिमरन एवं सेवा) भाग १३बच्चों पर चर्चा भाग १३**सरलता*
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Описание к видео श्री भक्ति प्रकाश भाग [871](सिमरन एवं सेवा) भाग १३बच्चों पर चर्चा भाग १३**सरलता*

Ram bhakti ‪@bhaktimeshakti2281‬
परम पूज्य डाक्टर श्री विश्वामित्र जी महाराज जी के मुखारविंद से
((1877))
श्री भक्ति प्रकाश भाग [871]
(सिमरन एवं सेवा) भाग १३
बच्चों पर चर्चा भाग १३
सरलता

राजस्थान की बात है । राधा नाम की एक लड़की है । छोटी बच्ची, बेटा बहुत बड़ी नहीं है । मानो 6-7-8 साल की आयु होगी बच्ची की । घर कहां है, एक बस स्टॉप के पास । अपने घर की खिड़की से उसे बस स्टॉप दिखाई देता है । रोज बसे आती है, रोज बसे जाती हैं । एक बस पर लिखा हुआ है वृंदावन, और जहां वह रहती है उस जगह का नाम ।
वहां से वृंदावन, वृंदावन से उस जगह पर । आज भागती भागती राधा गई है । कहती है ड्राइवर अंकल, ऐसे ही बच्चे कहते हैं ना; ड्राइवर अंकल आप वृंदावन जाते हो ?
हां । कंडक्टर अंकल आप भी वृंदावन जाते हो ? हां । वृंदावन जाते हैं ।
यह वही जगह है ना जहां बांके बिहारी जी रहते हैं,
जहां राधावल्लभ जी रहते हैं ।‌ हां, वही जगह है । मुझे एक दिन ले जाना । नन्हीं बच्ची फरियाद कर रही है, मुझे एक दिन ले जाना । मेरा उन्हें मिलने को बहुत दिल करता है । बच्ची की बात सुनकर अनसुनी कर दी । बच्चे ऐसी बातें करते ही हैं ।

राधा अपने घर चली गई है । यह अपना बस लेकर वृंदावन चले गए हैं । बेटा कुछ ही दिनों के बाद यह अवसर नहीं मिला ।
उसे कुछ ही दिनों के बाद उसे blood cancer हो गया है । पता लग गया की blood cancer है । यह उस बच्ची को भी पता लग गया की मेरी जीवन यात्रा खत्म होने वाली है । मैं बहुत देर तक जी नहीं सकती । संभवतया उस वक्त की बात होगी जिस वक्त अच्छे इलाज नहीं थे । आज भी बहुत अच्छे तो नहीं है, जो लाखों रुपए खर्च कर सकते हैं, उनको जीवन मिल जाता है। गरीब आदमी तो बेचारा मर जाता है । गरीब आदमी कैंसर का क्या इलाज करवाएगा। कहां से लाखों रुपया लाएगा ।
उसे blood cancer हो गया है । उसे लगा मेरी जीवन यात्रा समाप्त होने वाली है ।

आज एक पत्र लिखा । पत्र लिखकर जाकर ड्राइवर अंकल को कहा, ड्राइवर अंकल,
यह पत्र ले जाओ । बांके बिहारी को यह मेरा पत्र दे देना । बांके बिहारी को जाकर मेरा यह पत्र दे देना । ड्राइवर ने पत्र लिया है ।
गए, भूल गए । पत्र देना भूल गए । या सोचा होगा बच्ची है, क्या पत्र दिया । कैसे पत्र देना बांके बिहारी को । वापस ले आए । राधा ने पूछा अंकल मेरा पत्र बांके बिहारी को दिया ? नहीं बेटा रश बहुत था । बड़ी भीड़ थी बांके बिहारी के । झूठ बोल दिया ।
इसलिए तेरा पत्र नहीं दे पाया । अगली बार जाऊंगा तो तेरा पत्र जरूर दूंगा । मन ही मन मुझे लगा यह बच्ची बेचारी ने दिया है, बड़ी श्रद्धा के साथ दिया है, तो यह पत्र मुझे देना चाहिए पहुंचाना चाहिए । मैंने जाकर बांके बिहारी के मंदिर में पत्र को रख दिया ।

आज जब तक ड्राइवर पहुंचा है, राधा कोमा में चली गई है । राधा बेहोश पड़ी हुई है । नन्हीं बच्ची बेहोश कोमा में चली गई हुई है। वह खिड़की, जिस से खड़ी होकर बस स्टॉप, ड्राइवर, कंडक्टर इत्यादि दिखाई देते थे, वह खिड़की खुली है । उसे कोई सुध बुध नहीं है । लेकिन महसूस हुआ जैसे कोई पितांबर धारी व्यक्ति आया है । आकर आवाज दी “राधा”, आवाज़ दी । आप समझ लो पितांबर धारी कौन होगा । आज भगवान को पत्र मिल गया है ।
आकर कहा -
राधा तेरा पत्र मिला है । कुछ नहीं लिखा था। मात्र इतना बांके बिहारी जी तेरी राधा बीमार है । अपना नाम राधा लिख दिया और कुछ नहीं लिखा पत्र में । बस इतनी ही सूचना दी है । आकर कहते हैं राधा तेरा पत्र मिल गया है । उठ लेटी क्यों है । परमेश्वर की कृपा से, कोमा से आंख खुली । जब भगवान चाहे तो कौन कोई रोक सकता है । कौन कोई रुकावट डाल सकता है । कौन कोई मार सकता है । जब भगवान जीनाना चाहे तो कौन मार सकता है ।‌और जब भगवान मारना चाहे, तो कौन जीवन दे सकता है, कोई नहीं ।

राधा उठकर आंख खोल कर देखती है, लगता है यह बांके बिहारी ही है ।
कहा बहुत देर कर दी आने में । उसे पता है मेरी जीवन यात्रा खत्म होने वाली है । किसी वक्त भी प्राण छूट सकते हैं ।‌ परमात्मा से कहती हैं, आए तो हो पर बहुत देर से आए । बहुत मन था आपसे बातें करूंगी ।
आपसे खेलने को मन था । बच्ची हूं ना ।छोटी हूं, यह मेरे मन की उमंग थी, तेरे साथ बातें करूंगी, तेरे साथ खेलूंगी ।
तू देख इस घर में और कोई नहीं है । इसलिए तेरी ही आशा थी, तेरा ही सहारा था ।
बहुत देर से आए हो । नहीं राधा क्या हुआ
है । अब उठ खेलते हैं, बात करते हैं ।
भगवान श्री राधा के पास गए हैं ।
बच्चियों सच्ची कहानी है और बहुत देर की कहानी नहीं है । कहते हैं राधा का शरीर नहीं मिला । भगवान ने उस शरीर को अपने अंदर समा लिया, अपने अंदर समेट लिया ।
जैसे मीरा मरी नहीं, मीरा का शरीर भगवान श्री कृष्ण में प्रविष्ट हो गया । इसी प्रकार नन्हीं राधा का शरीर भी भगवान में प्रविष्ट हो गया ।
मुझे और कोई कारण दिखाई नहीं देता बच्चियों, बच्चों, सिर्फ एक कारण दिखाई देता है, सरलता के कारण जीवन की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि उसे उपलब्ध हो गई । सर्वश्रेष्ठ चीज उसे मिल गई । अपनी सरलता के कारण, निष्कपटता के कारण ।

समय हो गया है देवियो सज्जनो ।
चाहता था एक आधा दृष्टांत छोटे बच्चे का भी सुनाया जाए । यह तो दोनों बच्चियों के थे । समय के अभाव के कारण नहीं हो सकेगा । आपसे निवेदन करूंगा श्री राम शरणम् आते हो, राम राम जपते जपते आया करो । जाते हुए सत्संग से राम राम जपते जपते जाया करो । यह जिंदगी के अनमोल क्षण, आज रविवार है ना । यह चला गया। यह रविवार दोबारा कभी नहीं आएगा। अगला रविवार आएगा, लेकिन यह रविवार फिर कभी नहीं आएगा जिंदगी में । अतएव बच्चियों बच्चों इस समय का मूल्य जानो। आपको पढ़ाई करनी पड़ती है । खूब करो। इसको लेकिन पढ़ाई से जो समय मिलता है, उसे व्यर्थ ना गवाओ । उस समय भी आप राम राम जपो । परमात्मा की पूजा जो भी आप करते हो, वह करो । परमात्मा इसी से आप से संतुष्ट हो जाएगा ।‌ लेकिन आप व्यर्थ में समय गवाओ तो परमात्मा को अच्छा नहीं लगता ।

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