मीठे-मीठे बच्चे सुनो, बाप का यह पैगाम
आत्मा हम, वह परमात्मा, यही सच्चा ज्ञान
बुद्धि में रख यह पढ़ाई, सबको है बतलाना
बाप और सृष्टि चक्र का, सच्चा रूप दिखाना
सतयुग में जब आत्मा खेले, कर्म सभी अकर्म
रावण नहीं, विकार नहीं, शांति-सुख का धर्म
कलियुग में वही आत्मा, विकर्मों में फँस जाए
काम-क्रोध के बंधन में, दुख ही दुख कमाए
हम सब आत्मा भाई-भाई, एक है हमारा बाप
परमपिता शिव कहलाते, ज्ञान-सागर आप
ना सर्वव्यापी, ना देहधारी, यह सच्चाई जान
आत्मा देह से पार्ट बजाए, यही है पहचान
आदि-मध्य-अंत का ज्ञान, बाप ही समझाए
पाँच हज़ार का चक्र सटीक, कोई और न बताए
स्वर्ग था यह भारत प्यारा, सोने की थी चिड़िया
अब तमोप्रधान बनी दुनिया, भूल गई बढ़िया
लक्ष्मी-नारायण सतयुग के, राम-सीता त्रेता
आधा कल्प तक सुख ही सुख था, नहीं था कोई नेता
द्वापर से रावण आया, विकारों का राज
कलियुग में दुख बढ़ा भारी, बिगड़ा सारा काज
संगम पर अब बाप आए हैं, नई दुनिया बसाने
पतित से पावन बनाने, भाग्य जगाने
याद की युक्ति सिखलाते, बनो सतोप्रधान
कर्म ऐसे करो बच्चों, जो बन जाएँ अकर्म महान
चौबीस कैरेट सोना बनना, अलॉय अब न डालो
माया का हाथ छोड़कर, बाप का हाथ संभालो
मास्टर नॉलेजफुल बनकर, खुशी की डांस करो
घबराने की डांस छोड़कर, जीवन को आसान करो
त्रिकालदर्शी बनकर चलो, साक्षी बन हर काम
हर संकल्प, हर वचन में, झलके बाप का नाम
बंधनमुक्त, जीवनमुक्ति, अभी यहीं पाओ
याद और ज्ञान के बल से, ऊँची स्टेज पर जाओ
जिनका संकल्प महान हुआ, कर्म भी महान
वही बने मास्टर सर्वशक्तिमान
मीठे बच्चों, बाप कहते, याद में रहो लीन
नई दुनिया के मालिक बनो, बनो सदा नवीन
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