ब्रह्म मुहूर्त में उठने के फायदे
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• ब्रह्ममुहूर्त मे उठने के फायदे / Brahm muh...
ब्रह्मचारी का भोजन कैसा हो?
निश्चय ही सात्विक भोजन ही वह भोजन है जो कि ना केवल ब्रह्मचारी अपितु प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए।
क्योंकि सात्विक भोजन हमारी हर बीमारी का इलाज है।
लेकिन क्या है सात्विक भोजन..?
सात्विक आहार वह आहार है, जो हमारे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, वहीं इसके उलट शरीर की सकारात्मक ऊर्जा को खत्म करने वाले भोजन को तामसिक कहते हैं”, बताती हैं।
मूल तौर पर सात्विक भोजन शाकाहारी भोजन है, जिसमें पेड़-पौधों से मिलने वाले भोजन को ग्रहण किया जाता है। गाय का दूध और घी इस आहार का महत्वपूर्ण भाग है।
सात्विक भोजन मिर्च मसालों और तेल से लगभग रहित होता है।
सात्विक भोजन जैसे हरी सब्जियां एवं फल आपको तनाव मुक्त रहने में मदद कर सकते हैं।
सात्विक भोजन के लाभ-
सात्विक भोजन सिर्फ़ शरीर के लिए फ़ायदेमंद नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण होता है।
1. सात्विक भोजन पाचन को दुरुस्त करता है और ब्लोटिंग खत्म करता है।
2. यह इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक होता है क्योंकि इसमें पोषक तत्व युक्त प्राकृतिक आहार शामिल किया जाता है।
3. मानसिक ऊर्जा को सही दिशा में प्रयोग करने में सहायक है सात्विक भोजन। इससे आप ज्यादा अटेंटिव और फोकस्ड महसूस करते हैं।
4. वेट लॉस में सहायक है क्योंकि आप फैट और जंक फूड नहीं खाते। साथ ही आप ढेर सारे पोषण ले रहे होते हैं।
सात्विक भोजन में स्वाद का बहुत महत्व होता है। मीठे स्वाद का प्रयोग प्रेम और स्नेह के भाव को उजागर करने के लिए होता है,
कड़वे स्वाद से फैट और प्रोटीन बर्न होता है
और नमकीन और खट्टे स्वाद शरीर को रिपेयर करते हैं।
अगर आप सोच रहे हैं कि सात्विक भोजन को आप कैसे अपनाएंगे, तो हम आपकी यह मुश्किल आसान कर देते हैं।
हम आपको सात्विक डाइट प्लान देते हैं।
सुबह उठते ही एक गिलास नींबू पानी पियें। यह बॉडी को डिटॉक्स करता है और वेट लॉस करता है।
नाश्ता सुबह 7:30 से 8:00 बजे के बीच लें। नाश्ते में आप मूंग दाल का चीला, एक कटोरी दही और पुदीने की चटनी ले सकते हैं।
10 से 11 बजे के बीच जामुन, लीची या कोई भी मौसमी फल लें।
लंच (1:00 से 1:30) एक कटोरी मसूर दाल, एक कटोरी कोई भी हरी सब्जी, एक कटोरी चावल चौथाई चम्मच घी के साथ, एक कटोरी खीरे का रायता। लंच के बाद 2 से 3 फांक आम की लें यह मौसम के अनुसार कोई भी फल थोड़ी मात्रा में खाएं।
डिनर 7 बजे से पहले कर लें।
डिनर में दो रोटी (मल्टी-ग्रेन), एक कटोरी लौकी, एक कटोरी मूंग दाल और चौथाई चम्मच घी लें।
देशी घी खाना आपकी सेहत के लिए फायदेमंद होता है, सात्विक आहार में घी का बहुत महत्व है।
याद रखें सात्विक आहार सिर्फ यह नहीं है कि आप क्या खाते हैं। आप किस वक्त खाते हैं यह भी महत्वपूर्ण है। सात्विक विचार होना भी ज़रूरी है। आप मेडिटेशन कर सकते हैं। किसी के विषय मे गलत न बोलें, न सोचें। तनाव से दूर रहें और सकारात्मक सोच रखें।
आइए अब हम शरीर के तीनों गुणों के बारे में थोड़ा और विस्तार से जाने
सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण। यही तीन गुण हमारी चेतना की तीन अवस्थाओं- जागृत अवस्था, सुप्तावस्था और स्वप्नावस्था से भी संबंधित हैं।
अब इन तीन गुणों में संतुलन कैसे रखा जाए?
यह हम साधना, ध्यान और मौन के द्वारा कर सकते हैं।इन सबसे हम अपने में सत्वगुण बढ़ा सकते हैं।
जब सत्य की हमारे जीवन में प्रधानता होती है, तो रजोगुण और तमोगुण गौण हो जाते हैं,
उनका प्रभाव कम रह जाता है
और रजोगुण की अधिकता में सत्व और तमस गौण हो जाते हैं
व तमोगुण के प्रधान होने पर सत्व और रजस पीछे रह जाते हैं, उनका प्रभाव कम हो जाता है।
इन्हीं तीन गुणों के बल पर यह संसार और जीवन चलता है। पशु भी इसी प्रकृति से संचालित होते हैं परंतु उनमें कोई असंतुलन नहीं होता। न तो वे आवश्यकता से अधिक खाते हैं, न ही अधिक काम करते हैं और न ही अधिक काम वासना में उतरते हैं। उनमें कुछ भी कम या अधिक करने की स्वतंत्रता ही नहीं होती।
मनुष्य कुछ भी करने को स्वतंत्र है। अच्छा या बुरा, कम या अधिक, क्योंकि स्वतंत्रता के साथ ही उसको विवेक शक्ति भी प्राप्त है।
स्वतंत्रता और विवेक दोनों ही उसके पास हैं। हम अधिक खाकर बीमार होने को भी स्वतंत्र हैं और ऐसे ही अधिक सो कर सुस्त और आलसी भी हो सकते हैं।
हम किसी भी कार्य में आसक्त होकर या उसमें अति करके समस्याओं और बीमारियों को निमंत्रित कर सकते हैं।
अधिकतर तो हमारा मन भूतकाल व भविष्य के सोच-विचार में उलझा रहता है। जीवन में प्रखर चेतना और सजगता का अनुभव प्राय: व्यक्ति कभी कभार ही कर पाता है।
ऐसे सात्विक क्षण बहुत दुर्लभ होते हैं।
अत: हम जीवन में प्रसन्नता और प्रफुल्लता को भी कम ही अनुभव कर पाते हैं।
मनुष्य में सभी प्रकार के जीव-जंतुओं का सम्मिश्रण है। इसलिए मनुष्य कभी शेर की तरह गरजता है और कभी गुर्राता है। और कभी मिल कर भजन-कीर्तन में डूबता हैं तो पक्षियों की भांति हल्के-फुल्के हो जाता हैं।
और हमारी चेतना ऊपर की ओर बढ़ने लगती है और इस तरह हमारे जीवन में सत्व का और अधिक समावेश होता है।
अब इन तीन गुणों की चर्चा भोजन के संदर्भ में- ठीक मात्रा में आवश्यकतानुसार भोजन करना, भोजन जो सुपाच्य हो, ताजा हो और कम मिर्च-मसाले वाला हो, ऐसा भोजन सात्विक भोजन है और सात्विक प्रवृत्ति वाले लोग ऐसा भोजन पसंद करते हैं।
राजसिक प्रवृत्ति के लोग अधिक तीखा, मिर्च-मसाले वाला, तेज नमकीन या अधिक मीठा भोजन पसंद करते हैं।
बासी, पुराना पका हुआ और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भोजन तामसिक प्रवृत्ति के लोग पसंद करते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार 6-7 घंटे पहले का पका हुआ भोजन तामसिक होता है। इस प्रकार भोजन के भी तीन प्रकार के गुण होते हैं।
सर्वश्रेष्ठ तो यह है कि हमारा भोजन हल्का हो सुपाच्य हो और उसे पकने के बाद गर्म अवस्था में अर्थात आधे घंटे के अंदर ही ग्रहण कर लिया जाए।
@AnandDhara
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