WCR जोनल में भोपाल रेल मंडल के TRO विभाग की हठधर्मिता,
रेलवे के राजस्व और सुरक्षा के साथ खिलवाड़,
क्या ,किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है ,रेल प्रशासन?,
जबलपुर और कोटा में काम शुरू, तो भोपाल में री-इंगेजमेंट पर 'ब्रेक' क्यों?,
नियमों की धज्जियां,25 के बजाय 35 क्रू की मॉनिटरिंग कर रहे CLI, सुरक्षा खतरे मे,
पेंशनर को वापस न बुलाकर रेलवे को लाखों का चूना, ट्रेड यूनियन के दबाव में प्रशासन?,
रेलवे बोर्ड के आदेशों की भोपाल मंडल में अनदेखी,
रिटायर्ड अनुभवी रेल कर्मचारियों की जगह 'स्पेशल ड्यूटी' के नाम पर खानापूर्ति।,
रेलवे रेवेन्यू को हर महीने लाखों का नुकसान,
हमारे चेनल SR NEWS 24 LIVE के रेलवे संवाददाता नई दिल्ली से अर्जुन कुमार ने मध्य प्रदेश राज्य के संवाददाता एन के कालेट से और WCR जोनल रेल्वे में भोपाल मंडल के रेलवे कर्मचारियों से चर्चा करके अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग के विश्लेषण में बताया कि
पश्चिम मध्य रेल (WCR) के भोपाल मंडल में इन दिनों TRO विभाग अपनी कार्यशैली को लेकर सवालों के घेरे में है, एक तरफ जहां रेलवे बोर्ड और मुख्यालय (CELE/WCR) ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा और कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए अनुभवी रिटायर्ड रेल कर्मचारियों को 'री-इंगेजमेंट' (संविदा) के आधार पर नियुक्त किया जाए, वहीं भोपाल मंडल इस अवसर को ठंडे बस्ते में डाल रहा है,
हमारे संवाददाता के विश्लेषण के अनुसार, यदि एक रिटायर्ड मुख्य लोको निरीक्षक (CLI) को री-इंगेजमेंट पर रखा जाता है, तो रेलवे को उसे केवल वेतन और पेंशन के बीच का अंतर (लगभग ₹70,010) ही भुगतान करना पड़ता है। जबकि अन्य मदों में कार्य कराने या पद रिक्त रखने से संचालन और राजस्व पर इसका कहीं अधिक बुरा प्रभाव पड़ रहा है, जबलपुर मंडल ने दूसरी बार री-इंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन भोपाल मंडल की हठधर्मिता समझ से परे है,
सुरक्षा से समझौता (Safety Compromised) क्यों किया जा रहा है,
रेलवे बोर्ड की यार्ड स्टिक के अनुसार, एक CLI के पास 25 से अधिक क्रू की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए, लेकिन सूत्रों के अनुसार, भोपाल मंडल में वर्तमान में कार्यरत CLI 35-35 क्रू की मॉनिटरिंग, फुटप्लेटिंग और काउंसलिंग कर रहे हैं,इसके अलावा प्रतिदिन नए निर्देशों का कार्य भी करना है,इससे कार्य का यह अत्यधिक बोझ सीधे तौर पर रेल सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है,
क्या ,प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?,
ट्रेड यूनियन का हस्तक्षेप या प्रशासनिक लापरवाही?,
हमारे चेनल
SR NEWS 24 LIVE के सूत्रों का दावा है कि TRO विभाग कथित तौर पर ट्रेड यूनियनों के साथ 'गठजोड़' कर चल रहा है, चयन प्रक्रिया में देरी और अब री-इंगेजमेंट के बजाय 'स्पेशल ड्यूटी' (ड्राइवर मॉनिटर) जैसे अस्थाई समाधान निकालना कई सवाल खड़े करता है, 29 जनवरी 2026 को जारी नोटिफिकेशन (अधिसूचना) में 10 पदों पर 120 दिनों के लिए अस्थाई चयन की बात कही गई है, जो अनुभवी रिटायर्ड स्टाफ की तुलना में केवल एक "स्टॉप-गैप" व्यवस्था नजर आती है,वह भी योग्यता की लिस्ट अभी तक नहीं निकली है,जबकि स्क्रीनिंग दिनांक 18.02.2026 को हो चुकी हैं
हमारे चेनल SR NEWS 24 LIVE के अनुसार सवाल मुख्य यही है कि
मुख्यालय के आदेश के बावजूद भोपाल मंडल में री-इंगेजमेंट प्रक्रिया शुरू क्यों नहीं हुई?,
सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर CLI पर अतिरिक्त बोझ क्यों डाला जा रहा है?
क्या, रेलवे रेवेन्यू का नुकसान करना देशहित के खिलाफ नहीं है?
इस पूरे मामले में यदि भविष्य में कोई अप्रिय घटना घटती है, तो इसकी पूर्ण जिम्मेदारी भोपाल मंडल के TRO विभाग की होगी, #india #दिल्ली #latestnews #indianrailways #railwaycorruption #srnews24 #srnews24live #railwayemployees #railwaynews #भारत ,#भारतवासी ,#देश,#देशवासी ,#जनता ,#रेलवे,#रेल,#रेलवे कर्मचारी,#WCR ZONAL ,#भोपाल मंडल,#TRO विभाग,#CLI,#ट्रेन,#ट्रेन लोको पायलट,
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