Sakalnarayan mela Bhopalpatnam || Posdpalli mela || सकलनारायण मेला भोपालपट्टनम
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*सकल नारायण मेला छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित सकल नारायण गुफा और मंदिर के आसपास आयोजित होने वाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव है। यह मेला हिंदू नववर्ष के आगमन के साथ जुड़ा हुआ है और इसे "हिंदू वर्ष का अंतिम और आगमन मेला" भी कहा जाता है। इसका आयोजन हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष अमावस्या से तीन दिन पहले शुरू होता है और चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, यानी नवरात्रि के पहले दिन, समाप्त होता है।
इस मेले का महत्व निम्नलिखित पहलुओं से समझा जा सकता है:
1. धार्मिक महत्व: सकल नारायण गुफा में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा विराजमान है, और मान्यता है कि यह स्थान महाभारत और रामायण काल से जुड़ा हुआ है। श्रद्धालु यहां दर्शन करने और भगवान श्रीकृष्ण से सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य की कामना करने आते हैं। गुफा के अंदर गोपिकाओं की मूर्तियां और सुरंगें भी हैं, जो इसे और भी रहस्यमयी और पवित्र बनाती हैं।
2. सांस्कृतिक एकता: यह मेला छत्तीसगढ़ के साथ-साथ महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे पड़ोसी राज्यों से भी भक्तों को आकर्षित करता है। यह विभिन्न समुदायों के बीच एकता और भाईचारे को बढ़ावा देता है। मेले में होने वाले आयोजन, जैसे श्रीकृष्ण और राधा की मूर्तियों का विवाह, स्थानीय परंपराओं को जीवंत करते हैं।
3. प्राकृतिक और आध्यात्मिक संन्यास: गुफा गोवर्धन पर्वत पर स्थित है और चिंतावागु नदी के किनारे होने के कारण यह प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। श्रद्धालु नदी में स्नान कर गुफा तक पहुंचते हैं, जो एक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। गुफा का संकरा प्रवेश द्वार और मधुमक्खियों के छत्ते इसे और भी अनूठा बनाते हैं, जिससे यह विश्वास और भक्ति का प्रतीक बन जाता है।
4. ऐतिहासिकता: कहा जाता है कि इस गुफा की खोज 1900 ईस्वी के आसपास हुई थी, और यह मंदिर 1928 में स्थापित किया गया था।
सकलनारायण मेला* और *पोसड़पल्ली मेला**, जो कि **भोपालपट्टनम* (छत्तीसगढ़) में मनाए जाते हैं, ये दोनों *आदिवासी परंपराओं और लोक आस्थाओं* से जुड़े मेले हैं।
*सकलनारायण मेला* विशेष रूप से *आदिवासी देवता सकलनारायण* को समर्पित होता है। यह मेला *धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव* के रूप में मनाया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण और आदिवासी समुदाय के लोग भाग लेते हैं।
*यह मेला किसके द्वारा आयोजित होता है?*
यह मेला आम तौर पर *स्थानीय ग्राम पंचायत**, **प्रशासनिक निकाय**, और **आदिवासी समाज के प्रमुखों* द्वारा मिलकर आयोजित किया जाता है। इसमें *सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं* की भी भागीदारी होती है।
*मुख्य आकर्षण:*
पारंपरिक नृत्य और गीत
पूजा-अर्चना और झांकी
स्थानीय हाट-बाजार
सांस्कृतिक कार्यक्रम
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