रामपाल के चेलों का दोगलापन #तत्त्वदर्शीसंत #rampaljimaharaj
रामपाल का नामदान या शास्त्र संग खिलवाड़
इस लाइव में हम रामपाल जी का प्रथम नाम दान पब्लिक करना चाहते हैं जिससे कि लोगों को पता चल सके कि उनके नाम दान का मंत्र क्या है क्या यह शास्त्र अनुसार है या शास्त्र विरुद्ध या रामपाल जी के द्वारा बनाया गया मनगढ़ंत
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इसलिए हम रामपाल जी के सभी शिष्यों को आमंत्रित करना चाहते हैं जो यह प्रूफ कर सकें कि रामपाल जी का मंत्र शास्त्र अनुसार है अगर वे नहीं आते हैं तो यह समझ जाएगा कि रामपाल जी का मंत्र शास्त्र विरुद्ध है
तत्वदर्शी पर सनसनी खुलासा
रामपाल का काल exposed
Breaking news रामपाल का काल
शैतान ने Rampal Das के अंदर प्रवेश कर गीता का किया गलत अनुवाद
#तत्त्वदर्शीसंत
रामपाल के चेले के कुतर्कों का जवाब
क्या रामपाल के kabir अविनाशी अजर है ?
काल से छुटकारा पाने के लिए क्या करें?
काल और भगवान में क्या अंतर है?
आत्माएं काल के चक्र में कैसे फंसी?
ब्रह्म का साधक ब्रह्म को तथा पूर्णब्रह्म का साधक पूर्णब्रह्म को ही प्राप्त होता है
ब्रह्म (क्षर पुरुष) की साधना अनुत्तम (घटिया) है
शंका समाधान
स्वर्ग की क्या परिभाषा है
क्या गीता जी का नित्य पाठ करने का या दान करने का कोई लाभ नहीं
क्या दूसरे के धर्म से गुणरहित भी अपना धर्म अति उत्तम है
क्या ध्यान करने से और व्रत रखने से शांति प्राप्त होगी
क्या गीता ज्ञान दाता प्रभु सर्व शक्तिमान है?
क्या ब्रह्म का जन्म नहीं है तथा सर्व पाप नष्ट कर देता है?
Gita,
गीता,
The-Knowledge-Of-Gita-Is-Nectar,
गीता का ज्ञान कब तथा किसने, किसको सुनाया, किसने लिखा? कृप्या विस्तार से बताऐं।,
ल भगवान अर्थात् ब्रह्म #अविनाशी है या जन्मता-मरता है,
क्या ब्रह्मा, विष्णु तथा #शिव अविनाशी हैं?,
श्री ब्रह्मा जी, श्री विष्णु जी तथा श्री शिव जी का पिता कौन है?5. रजगुण ब्रह्मा है, सतगुण विष्णु तथा तमगुण शंकर है,
अविनाशी परमात्मा कौन है7. गीता अध्याय 15 श्लोक 16 – क्षर और अक्षर पुरूष,पूर्ण मोक्ष क्या होता है,क्या गीता ज्ञान दाता ब्रह्म की भक्ति से पूर्ण मोक्ष संभव है,ऊँ तत् सत्’ इस मन्त्र के जाप से पूर्ण मोक्ष होता है,
वह परमात्मा कौन है जो कुल का मालिक है,क्या #ब्रह्मा, #विष्णु तथा शंकर (शिव) की पूजा करनी चाहिए,क्या क्षर पुरुष (ब्रह्म) की पूजा करनी चाहिए या नही,
ब्रह्म की भक्ति उत्तम नहीं है – गीता में प्रमाण,गीता ज्ञान दाता ने अपनी गति को अनुत्तम क्यों कहा,केवल परम अक्षर ब्रह्म की ही पूजा (#भक्ति) करनी चाहिए17.
जो साधना हम पहले कर रहे हैं, क्या वह त्यागनी पड़ेगी,पारखी संत श्री अभिलाष दास कह रहे थे कि संसार का कोई रचने वाला भगवान वगैरह नहीं है,क्या गीता में कहीं और भी लिखा है गीता ज्ञान दाता से अन्य परमात्मा की भक्ति साधना करने के लिए,परमात्मा साकार है या निराकार,व्रत करना #गीता अनुसार कैसा है,श्राद्ध-पिण्डदान गीता अनुसार कैसा है,क्या गीता में लिखी भक्ति विधि पर्याप्त है,गीता तथा वेदों में यह कहाँ प्रमाण है कि पूर्ण मोक्ष मार्ग तत्वदर्शी सन्त के पास ही होता है,तत्वदर्शी सन्त की क्या पहचान है तथा प्रमाणित सद्ग्रन्थों में कहाँ प्रमाण है,क्या भगवान विष्णु जी की भक्ति अच्छी नहीं,क्या पूर्ण मोक्ष के लिए भगवान विष्णु जी तथा भगवान शंकर जी की पूजा को छोड़ना पड़ेगा,तीनों देवताओं की भक्ति करने वाले राक्षस स्वभाव को धारण किए हुए मनुष्यों में नीच, दूषित कर्म करने वाले मूर्ख हैं,गीता ज्ञान दाता ब्रह्म ने अपनी साधना से होने वाली गति को अनुत्तम अर्थात् घटिया बताया है,गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में भगवान कृष्ण जी ने किस #परमेश्वर की शरण में जाने के लिए कहा है31 #चौरासी लाख प्रकार के जीवों से मानव देह उत्तम है32 गीता #अध्याय 4 श्लोक 6 में गीता ज्ञान दाता ने अपने आप को अविनाशी ईश्वर अजन्मा कहा है।
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