नाटक मध्यमव्यायोगः की कहानी सूत्रधार द्वारा आरम्भ की जाती है, जिसमें वन के रास्ते एक ब्राह्मण अपने परिवार (पत्नी एवं तीन पुत्र) के साथ उसी वन से जा रहा है, जिसमें पाण्डव भाई अपना वनवास बिता रहे है, हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच द्वारा उनका पीछा किया जाता है, घटोत्कच अपनी माँ के लिए भोजन प्रबंध में लगा है, क्योंकि उसने उसे भोजन के रूप में खाने के लिए किसी इंसान को खोजने के लिये कहा है। ब्राह्मण परिवार पर अपना आधिपत्य कर घटोत्कच कहता है कि वह सबको छोड़ देगा, यदि उनमें से कोई एक स्वयं की इच्छा से उसकी माँ का भोजन बनने को तैयार हो जाए। निस्वार्थ भाव से परिवार का प्रत्येक व्यक्ति परिवार के बाकी सदस्यों को बचाने के लिए घटोत्कच द्वारा ग्रहण किये जाने का प्रयास करता है।
ब्राह्मण कहता है कि वो अपने परिवार को बचाने के लिए स्वयं जायेगा, ब्राह्मणी विरोध करती है कि उसका पति उस का सब कुछ है और उसने एक पत्नी के तोर पर अपने कर्त्तव्य की पूर्ति की है। पहले और दूसरे दोनों बेटो का तर्क है कि माता-पिता के बदले उन्हें जाना चाहिए, दुखद चर्चा करने पर पिता स्वीकार करता है कि उसका प्रथम पुत्र उसे बहुत प्रिय है और माँ स्वीकार करती है कि सबसे छोटा बेटा उसे सर्वाधिक प्रिय है। तय होता है कि मध्यम पुत्र को हिडिम्बा द्वारा भोजन के रूप मंे लिया जाना चाहिए। अपने भाग्य का सामना करने के पूर्व मध्यम पुत्र पस की एक झील में अपनी प्यास बुझाने की अनुमति मांगता है।
पुजारी के बीच के बेटे के कुछ समय के लिए चले जाने के बाद घटोत्कच को चिंता होती है कि उसकी माँ के भोजन का समय शीघ्र ही बीत जायेगा और वह मांग करता है कि परिवार उसे बीच के बेटे कानाम बताये जिससे वह उसे बुला सके। पहला पुत्र घटोत्कच को मध्यम नाम देता है, जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘‘मध्य वाला’’ जो संयोग से भीम की उपाधि भी है, मध्यम शब्द कानों में पड़ते ही भीम को प्रतीत होता है कि कोई उसे पुकार रहा है। भीम मंच पर प्रवेश करता है और स्थिति संभालता है तथा पुजारी से कहता है कि वह जाने के लए स्वतंत्र है, यदि आवश्यक हो तो हिडिम्बा के भोजन के रूप में मैं उसकी जगह लूँगा।
भीम घटोत्कच की माँ का नाम पूछता है, केवल यह पता लगाने के लिए कि वह वास्तव में उसका पुत्र है। हालाकि भीम ये तुरंत नहीं कहते है, इसकी वजाए वह कुश्ती करते है और लम्बी बहस करते है, संभवतः भीम अपने मनोरंजन के लिए। अन्त में भीम घटोत्कच को हरा देता है और परिवार को जाने देता है किन्तु निराशा में घटोत्कच भीम को अपने वादे की याद दिलाता है कि वह पुजारी के बीच के पुत्र के स्थान पर जायेगा, भीम घटोत्कच को अपनी माँ को बुलाने की अनुमति देता है जो दृश्य में प्रवेश करने पर तुरन्त भीम की पहचान उसके बेटे को बताती है, अचानक रहस्य उजागर होने से हैरान और दीन घटोत्कच ने अपनी अज्ञानता के लिए पश्चाताप किया। हिडिम्बा कहती है कि उसकी भूख वास्तव में उसके पति की वापसी से संतुष्ट है और दोनों परिवार अच्छी शर्तों पर अलग-अलग रास्तों पर जाते हैं।
मंच पर -
सूत्रधार-निकंुज चौहान
ब्राह्मण -तरुण थावर
ब्राह्मणी-जजा अहमद
प्रथम-आयुष परमार
द्वितीय -तुषार प्रजापत
तृतीय-लविश चौहान
भीम-गगन चौहान
हिडिम्बा-नैना उच्चैनिया
घटोत्कच-प्रमोद सिंह बैस
मंच पर -
Nikunj Chouhan
Tarun Thawar
Jaja Ahmed
Ayush Parmar
Tushar Prajapat
Lavish Chouhan
Gagan Chouhan
Naina Ucchainiya
Pramod Singh Bais
जब भी किसी महापुरुष की जीवनगाथा पर कोई नाट्य मंचन किया जाता है तो कुछ किंवदतियाँ साथ में अनायास ही जुडत्र जाती है एवं भौगोलिक क्षेत्र का भी अपना एक प्रभाव एंव मिट्टी की सुगंध आना स्वाभाविक है। राणा बख्तावर एक महान् स्वतंत्रता सेनानी योद्धा हुए है। हालाकि उनका लालन-पालन, शिक्षा-दीक्षा किसी प्रभावशाली अंग्रेज अधिकारी के सानिध्य में हुई, फिर भी जब राणा बख्तावर के आत्म-सम्मान को चोट पहुँचती है तो उन में अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के विरोध की ज्वाला फुट पड़ती है। छोटी-छोटी रियासतों को अंग्रेजों के विरूद्ध लड़ने के लिए एकजुट करने के हरसंभव प्रयास उन्होंने निरन्तर किए। कुछ सफलता भी हासिल हुई। आदिवासी भील-भीलालों ने उनका कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया। ये सब बातें अंग्रेजों को कतई बरदाश्त नही हुई। कपट एवं छल से अंग्रेजों ने सुलह-वार्ता के बहाने बुलाकर उन्हें गिरफ्तार किया, मुकदमा चलाया और सरेआम फाँसी पर चढ़ा दिया। पहले उनके प्रमुख साथियों को और फिर राणा बख्तावर को।
नमन है उनकी वीरता को। प्रणाम है उनकी शहादत को। जय हो राजा बलिदानी।
मंच पर -
Maitri Pnadya
Pranshi Pandya, Tanishka Ojha, Mokshda Saxena
Rajat Saxena
Shivam Roy, Niyati Roy, Trishala Rathore, Rimsa Dodiya
Radhika Tiwari
Maitri Pandya
Vinishree Udgir
Jai Trivedi
Himanshi Kotwani
Yashvini Dodiya, Rajat
Lokendra Solanki
Vinishree
Raj Malviya, Uttam Parihar, Jai Trivedi, Ronak Chaturvedi, Yug Patel
Khush Prajapat, Prince Malviya, Dev Patidar, Yash Bhavsar, Rajvardhan
Shri Shankarlal Kaithwas
Pt. Harihareshwar Poddar
Pt. Ramesh Shukl
Video by Rudraksh Films and Multimedia 8878820999
मंच पर -
सूत्रधार-मैत्री पण्ड्या
नृत्य दल-प्रांशी पण्ड्या, तनिष्का ओझा, मोक्षदा सक्सेना,
बख्तावर (बालक)-रजत सक्सेना
बालसखा, जनसमूह-शिवम् रॉय, नियति रॉय, त्रिशला राठौर, रिम्सा डोडिया
राजमाता-राधिका तिवारी
गुलाब-मैत्री पण्ड्या
बशिख्ल्ला-विनिश्री उद्गीर
हेमिल्टन-जय त्रिवेदी
हेचिस-हिमांशी कोटवानी
अमरा-यश्विनी डोड़िया/रजत
युवा बख्ता-लोकेन्द्र सोलंकी
दुर्गा-विनिश्री
अंग्रेज सैनिक-राज मालवीय, उत्तम परिहार, जय त्रिवेदी, रौनक चतुर्वेदी, युग पटेल
भील सैनिक -खुश प्रजापत, प्रिंस मालवीय, देव पाटीदार, यश भावसार, राजवर्धन
तकनीकी निर्देशक-श्री शंकरलाल कैथवास
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