🌟इस समय बाप अनेक सम्बन्धाें के अनके रूपों से मिलते हैं। तो एक के अनेक रूप, सम्बन्ध के आधार से वा कर्त्तव्य के आधार से प्रैक्टिकल में हैं ना! तो भक्त भी राइट है ना!🌟सबसे ज्यादा मिलने का प्रिय स्थान कौन-सा है? सर्व खज़ानों और गुणों से सम्पन्न,सागर के कण्ठे पर,साथ में ऊंची स्थिति की पहाड़ी पर,रूहानी आशिकों से मिल रहे हैं,शीतल-स्वरूप में रहना अर्थात् चाँदनी में बैठना। सदा ही चाँदनी रात में रहो। चादनी रात में ड्रेस भी स्वत: चमकीली हो जायेगी।समझा कहाँ रहना है? माशूक को यही किनारा प्रिय है।👉सहज और निरन्तर याद का सम्बन्ध और स्वरूप यह रूहानी आशिक और माशूक का है।👉एक बोल तो अच्छी तरह से याद करते हैं ‘‘जैसी भी हूँ, कैसी भी हूँ लेकिन आपकी हूँ'' माशूक भी कहते हो तो हमारी लेकिन जोड़ी तो ठीक बनो ना!👉तो आप स्वयं ही सोचो वह चमकीली ड्रेस वाले और आशिक काली ड्रेस वाली वा दागों वाली ड्रेस पहने हुए,तो अच्छा लगेगा👉माशूक का बनना अर्थात् सबका परिवर्त्तन होना।🌟माशूक को और भी एक बात की मेहनत करनी पड़ती है।👉वह भी रमणीक बात है। जो वादा किया है माशूक ने आशिकों के साथ,कि ‘‘साथ ले जायेंगे''।👉माशूक है बहुत हल्का और आशिक इतने भारी बन जाते,जो माशूक को ले जाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है।✨️रूहानी एक्सरसाइज तो जानते हो ना!👉अभी-अभी निराकारी, अभी-अभी अव्यक्त फरिश्ता, अभी-अभी साकारी कर्मयोगी। अभी-अभी विश्व सेवाधारी। सेकेण्ड में स्वरूप बन जाना, यह है रूहानी एक्सरसाइज।👉और कौन-सा बोझ अपने ऊपर रखते हैं? समय के वेस्ट के वेट में है,कोई संकल्पों के और कोई शक्तियों को वेस्ट करते हैं।👉कोई सम्बन्ध और सम्पर्क वेस्ट अर्थात् व्यर्थ बना लेते हैं। सच्चे आशिक की निशानी है समान'' अर्थात् समीप। अच्छा!🌟सदा माशूक समान, साथ से साथ, हाथ में हाथ अर्थात् स्नेही और सहयोगी, साथ अर्थात् स्नेह, हाथ अर्थात् सहयोग, ऐसे मेरा तो एक माशूक दूसरा न कोई, ऐसी स्थिति में सदा सहज रहने वाले, ऐसे सच्चे आशिकों को रूहानी माशूक का याद-प्यार और नमस्ते।🌟 देहली है जमुना का किनारा और गुजरात है गर्भा करने वाले।👉विदेश वाले जैसे अभी निमन्त्रण देते हैं ना,आओ चक्कर लगाने आओ👉ऐसे ही भविष्य में भी चक्कर लगाने जायेंगे। सेकेण्ड में पहुँचेंगे। देरी नहीं लगेगी। क्योंकि एक्सीडेंट तो होगा नहीं। स्पीड की कोई लिमिट की आवश्यकता नहीं।👉सारा वर्ल्ड एक दिन में घूम सकते हो।👉यह एटम एनर्जा आपके काम में आनी है।👉सबसे ज्यादा सेवा कौन-सा तत्व करेगा? सूर्य। सूर्य की किरणें भिन्न-भिन्न प्रकार की कमाल दिखायेंगी।👉लेकिन इसके लिए, नेचर के सुख लेने के लिए भी अपनी आरिजनल नेचर को बनाओ।
👉नैचुरल नेचर अर्थात् आनदि संस्कार।🌟तो मधुबन निवासी फोटो स्टेट कापी है। जैसे बाप वैसे बच्चे। मधुबन है-मशीन और मधुबन निवासी हैं-फोटो।👉तो आपके हर कर्म विधाता की कर्म रेखायें बतायें।👉 आप सबका हर कर्म श्रेष्ठ-भाग्य की कर्म की लकीर खींचने वाला हो।👉किस बात की कमी है? अगर कमी है तो स्व के धारणा की।👉कर्म में सफलता पाने के लिए ब्रह्मा बाप का निजी संस्कार कौन-सा था जो आप सबका भी वही संस्कार हो? ‘‘हाँ जी'' के साथसाथ ‘‘पहले आप'', ‘‘पहले आप'' वाला ही ‘‘हाँ जी'' कर सकता है।👉शुभ भावना और श्रेष्ठ कामना के आधार से ‘पहले आप' करने वाला स्वयं ही पहले हो जाता है। पहले आप कहना ही पहला नम्बर होना है। नि:स्वार्थ ‘पहले आप'
👉इसने क्यों किया, मैं ही करूँ, मैं क्यों नहीं करूँ, मैं नहीं कर सकता हूँ क्या! यह भाव नहीं। उसने किया तो भी बाप की सेवा, मैंने किया तो भी बाप की सेवा।👉यहाँ कोई को अपना-अपना धन्धा तो नहीं है ना! एक ही बाप का धंधा है।👉ईश्वरीय सेवा पर हो। लिखते भी हो गाडली सर्विस,मेरी सर्विस तो नहीं लिखते हो ना!👉जैसा बाप एक है,सेवा भी एक है,ऐसे ही इसने किया,मैंने किया वह भी एक।👉जो जितना करता, उसे और आगे बढ़ाओ। मैं आगे बढूँ, नहीं दूसरों को आगे बढ़ाकर आगे बढ़ो।👉जब यही भावना हरेक में आ जाए तो ब्रह्मा बाप की फोटो स्टेट कापी हो जाओ।👉आपके कर्म,आपकी स्थिति ब्रह्मा बाप को स्पष्ट दिखाये।👉ब्रह्मा बाप समान हो जाओ तो आप भी अमूल्य सौगात हो जायेंगे।👉ब्रह्मा बाप की विशेषता सूरत में क्या देखी?गम्भीरता अर्थात् अन्तर्मुखता मननाचिंतन करना और रमणीक अर्थात् मुस्कराता हुआ चेहरा।🌟कोई भी बात करने के पहले स्वयं जज करो तो न स्वयं का समय जायेगा और न दूसरों का। मधुबन तो ‘पीस-पैलेस' है।👉आप पीस-पैलेस वालों से सभी पीस की भिक्षा माँगते हैं,क्योंकि वे स्वयं ही स्वयं से तंग हो रहे हैं।👉विनाशकारियों के पास अभी तक आपके पीस की किरणें पहुँचती नहीं हैं इसीलिए कशमकश में हैं।कभी शान्त,कभी अशान्त।👉उन्हों को शान्त करने के लिए पीस-पैलेस से पीस की किरणें जानी चाहिए, तब उन्हों की बुद्धि में ही एक फाइनल फैसला होगा, खत्म करेंगे और शान्त हो शान्तिधाम में चले जायेंगे👉जब ब्रह्मा बाप समान सब कापियाँ तैयार हो जायेंगी तब बेहद का बारूद चलेगा,फटाके छूटेंगे और ताजपोशी होगी।🌟बापदादा के पास मन के संकल्पों की ही कैमरा नहीं लेकिन हरेक के मन में क्या चलता है,वह भी बापदादा स्पष्ट देख सकते हैं।🌟हर संवल्प सर्व प्रति शुभ भावना और कामना का,यही बड़े ते बड़ा पुण्य है।👉सद्गतिदाता के बच्चों का संग पुण्य आत्मा सहज ही बना देगा।👉बहुत श्रेष्ठ लक है,भाग्यवान आत्मायें हो।👉संग के रंग में सदा श्रेष्ठ रहेंगे।👉दाता के बच्चे थोड़े में खुश नहीं होते,सब कुछ लेते हैं।
👉तो पूरा ही वर्सा,पूरा अधिकार लेना है। इसको कहा जाता है-सदा श्रेष्ठ भाग्यवान आत्मायें। अच्छा।
🌟तो सेवाधारी अर्थात् स्नेही और सहयोगी। साथ रहने वाले, साथ देने वाले और फिर है लास्ट में साथ चलने वाले। तो तीनों में एवररेडी।🌟आपके मुख से ‘‘बाबा-बाबा'' जितना निकलेगा उतना अनेकों को बाबा का बना सकेंगे।
🌟सेवा के बीच में कोई विघ्न तो नहीं आता। वायुमण्डल का, संग का, आलस्य का,भिन्नभिन्न विघ्न हैं तो किसी भी प्रकार का विघ्न आया तो सेवा खण्डित हो गई ना! अखण्ड सेवा।👉ऐसे अखण्ड सेवाधारी कभी किसी चक्र में नहीं आते।अच्छा।
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