Dr. Pratik Patil is a recognizable cancer specialist oncologist working at Jupiter Hospital Baner Pune.
He has done his training in Oncology from world recognized Institute Rajeev, Gandhi Cancer Center, New Delhi, Michigan State Cancer University, USA, and Howard State Cancer University, USA.
He has a special interest in treating all cancers with immunotherapy. He is one of the very few people in pune who possess an international degree in Oncology.
क्या ज्यादा दिनों तक रखा हुआ, डीप फ्रोज़न या ज्यादा पकाया गया नॉनवेज (खासकर रेड मीट और बीफ) कैंसर का कारण बन सकता है?
IARC (इंटरनेशनल एजेंसी ऑन रिसर्च ऑन कैंसर) के अनुसार, रेड मीट को टाइप 1 कार्सिनोजेन (Carcinogen) माना गया है, जिसका मतलब है कि यह तंबाकू और अल्कोहल की तरह ही कैंसर होने का खतरा बढ़ा सकता है।
💡 इस वीडियो में जानिए:
✅ क्या नॉनवेज खाने से सच में कैंसर होता है?
✅ कौन-कौन से नॉनवेज खाने से ज्यादा खतरा होता है?
✅ रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट का सेवन क्यों खतरनाक हो सकता है?
✅ हेल्दी तरीके से नॉनवेज खाने का सही तरीका क्या है?
डॉक्टर प्रतीक पाटील आपको इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी देंगे और सही सलाह देंगे कि अगर आप नॉनवेज खाते हैं, तो इसे सुरक्षित तरीके से कैसे खाएं ताकि कैंसर का खतरा कम हो।
अगर आपका कोई सवाल है, तो हमें कमेंट में बताएं, हम आपके सवालों का जवाब जरूर देंगे।
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does eating red meat can increase the risk of colon cancer or colorectal cancer by damaging DNA know the myth or fact
क्या वाकई रेड मीट का नियमित सेवन बढ़ा सकता है कोलोन कैंसर का खतरा? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट
रेड मीट क्या वाकई आपके डीएनए को डैमेज करके कोलोन कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। रिपोर्ट कहती है, इन मरीजों के DNA में ऐसा बदलाव दिखा जो पहले कभी नहीं देखा गया था। यह बदलाव साबित करता है कि DNA डैमेज हुआ
Red meat and colon cancer: अगर आप रेड मीट बड़े शौक से खाते हैं तो हो सकता है ये खबर आपको निराश कर दे। सेहत पर हुई कुछ रिसर्च के अनुसार, नियमित रूप से रेड मीट या प्रोसेस्ड मीट (Processed meat) खाने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। एक रिसर्च के अनुसार, रेड मीट या प्रोसेस्ड मीट कार्सिनजेनिक होते हैं, जिससे ब्रेस्ट कैंसर के साथ-साथ प्रोस्टेट कैंसर (Prostate cancer) और पेट के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। पिछले कई सालों से डॉक्टर्स भी लोगों को रेड मीट कम से कम खाने की सलाह देते आ रहे हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि क्या वाकई रेड मीट सेहत के लिए नुकसानदेह है? , इसका नियमित सेवन करने से कोलोन कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है ?। आइए जानते हैं रेड मीट से जुड़े ऐसे ही कुछ सवालों के क्या जवाब देते हैं डॉ शुभम गर्ग, (सीनियर कंसल्टैंट, सर्जिकल ओंकोलॉजी, फोर्टिस अस्पताल, नोएडा)।
रेड मीट क्या होता है-
सेहत के लिए इतना फायदेमंद होने के बावजूद भी रेड मीट के लिए अक्सर यह बात सुनने में आती है कि इसका सेवन करने से कोलोन कैंसर का खतरा बढ़ता है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि यह बात काफी हद तक सही भी हो भी सकती है, लेकिन उससे पहले व्यक्ति को यह समझना जरूरी है कि रेड मीट आखिर होता क्या है। बता दें, रेड मीट आमतौर पर उन पशुओं से प्राप्त मांस को कहते हैं जिसका मूल नॉन-पोल्ट्री होता है। इसके उदाहरण, बीफ, लैंब, मटन, पोर्क और गोट आदि हैं। जबकि इसके विपरीत चिकन, टर्की, डक और गूज आदि रेड मीट में नहीं आते हैं। इनका सेवन रेड मीट की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होता है।
डीएनए को डैमेज करता है रेड मीट-
वैज्ञानिकों का कहना है, रेड मीट इंसान के डीएनए को डैमेज करके कैंसर का खतरा बढ़ाता है। यह एक कार्सिनोजेनिक फूड है यानी ऐसा खानपान जो कैंसर की वजह बन सकता है।शोधकर्ता और डाना-फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट के एक्सपर्ट मारियोज गियानेकिस कहते हैं, हमने टीम के साथ मिलकर कोलोन कैंसर से जूझने वाले 900 मरीजों पर रिसर्च की। इनके DNA की जांच की। रिपोर्ट कहती है, इन मरीजों के DNA में ऐसा बदलाव दिखा जो पहले कभी नहीं देखा गया था। यह बदलाव साबित करता है कि DNA डैमेज हुआ है। शरीर की सभी कोशिकाओं में यह बदलाव नहीं हुआ लेकिन कोलोन से लिए गए सैम्पल में इसे देखा गया। वैज्ञानिकों का कहना है, रेड मीट में नाइट्रेट जैसे केमिकल पाए जाते हैं, जो कैंसर की वजह बन सकते हैं।
कोलोन कैंसर के कारण-
प्रोसैस्ड मीट जैसे कि सॉसेज, बैकन और सलामी तथा अन्य तकनीकों जैसे स्मोकिंग, साल्टिंग या प्रीज़रवेटिव्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शामिल है। मोटापा और व्यायाम रहित जीवनशैली भी बड़ी आंत (कोलोन) के कैंसर के कुछ प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
कोलोन कैंसर के लक्षण-
-लगातार कब्ज या दस्त बने रहना, पेट पूरी तरह से साफ नहीं होने का अहसास या मल का आकार बदलना समेत बाउल हैबिट्स में बदलाव आना।
-मल में या मल के ऊपर खून के काले धब्बे होना।
-पेट में ऐंठन, सूजन, गैस या दर्द का बने रहना।
-बिना वजह थकान, कमजोरी, भूख में कमी या वजन कम होना।
-पेल्विक एरिया में दर्द होना। यह दर्द बीमारी की बाद की स्टेज में होता है।
सलाह -
रेड मीट का सेवन करने वाले लोगों को यह सलाह दी जाती है कि उन्हें रोजाना 70 ग्राम से अधिक रेड मीट का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा संतुलित खुराक का सेवन जिसमें फल और सब्जियां शामिल हों, एक्टिव लाइफस्टाइल जिसमें हर दिन 30 मिनट व्यायाम को जोड़ा जाए, कुछ ऐसे उपाय हैं जिनका पालन करने पर कोलोन कैंसर से बचा जा सकता
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