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Скачать или смотреть रेलवे शहीद

  • मरूधरा रा मोती / marudhara ra moti
  • 2023-10-12
  • 202
रेलवे शहीद
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Скачать रेलवे शहीद бесплатно в качестве 4к (2к / 1080p)

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Описание к видео रेलवे शहीद

@मरूधरा_रा_मोती

रेलवे शहीद दिवस:1965 के भारत-पाक युद्ध में रेलवे के 17 कार्मिक हुए थे शहीद इनकी याद में गडरारोड में बना शहीद स्मारक,

भारत-पाक के बीच वर्ष 1965 में हुए युद्ध के दौरान रेलवे के जांबाज कार्मिक पाकिस्तानी सेना की लगातार बमबारी के बावजूद अपने कर्तव्य-पथ पर अडिग रहे और भारतीय सेना के लिए राशन सामग्री व हथियार लेकर रेल लेकर गडरारोड स्टेशन तक पहुंचे। इस युद्ध में भारतीय रेलवे के 17 कार्मिक देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए। उनकी याद में रेलवे की ओर से हर साल 9 सितंबर को गडरारोड के शहीद स्मारक पर मेले का आयोजन किया जाता है। आज बाड़मेर-मुनाबाव के बीच चलने वाली ट्रेन नि:शुल्क चलेगी । मेले में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। भारत-पाक 1965 के युद्ध के समय पाकिस्तानी सेना भारत में प्रवेश कर चुकी थी। बमबारी हो रही थी।


युद्ध के लिए हथियार व सामग्री पहुंचाने के लिए लोको पायलट चुन्नीलाल, लोको फायरमैन चिमनसिंह व सैकंड फायरमैन माधोसिंह को रेलवे ने 9 सितंबर को लाइट इंजन गडरारोड स्टेशन पहुंचाने की जिम्मेदारी दी। यह तीनों रेलवे कार्मिक होने के साथ अच्छे दोस्त भी थे। पाकिस्तानी सेना की बमबारी के बीच इंजन लेकर गडरारोड पहुंच गए। रात गडरारोड में गुजारी और दूसरे दिन सवेरे दुश्मनों के हमले में शहीद हुए खेमाराम का शव लेकर रेल बाड़मेर के लिए रवाना हुई। दिन में 2 बजे दुश्मन ने बमबारी शुरू कर दी। रामसर व गडरारोड के बीच रेलवे का नेटवर्क भी टूट गया था। इसके बावजूद तीनों साहसी कर्मचारियों ने बमबारी के बिना चिंता किए रात दस बजे गाड़ी लेकर बाड़मेर के लिए रवाना हुए। लेकिन गडरारोड से करीब तीन किमी दूरी पर स्थित एक गोलाई में रामसर की तरफ से आ रही मालगाड़ी उस इंजन से टकरा गई और तीनों साहसी कार्मिक शहीद हो गए।

पहले दिन 14 व दूसरे दिन तीन रेलवे कर्मचारी हुए थे शहीद

इनके अलावा 9 सितंबर 1965 को गडरारोड सेक्टर में रेलकर्मी गैंगमैन नंदराम, मुल्तानाराम पेंटर, भंवराराम कांटेवाला, करना राम ट्रोलीमैन, मालाराम, खलासी हेमाराम, गैंगमैन मगाराम, रावताराम, हुकमाराम, लालाराम, चिमनाराम, खीमराज, देवीसिंह व जेहाराम देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। 17 शहीदों की याद में रेलवे शहीद मेले का आयोजन करता है। मेले में जोधपुर मंडल के रेलवे अधिकारी व कर्मचारियों के साथ शहीद परिवार भी पहुंचते हैं। मेला स्थल पर हर साल सभा का आयोजन भी किया जाता है।

पटरियां क्षतिग्रस्त थी फिर भी लोको पायलट ने हार नहीं मानी

भारत-पाक 1965 के युद्ध में सेना के साथ रेलवे का अहम योगदान रहा है। यहां बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर युद्ध के समय सूचना मिली कि रसद सामग्री ट्रेन से गडरारोड पहुंचानी है। तभी रेलवे ने यह अहम जिम्मेदारी रेलवे चालक प्रतापचंद को दी और रात में ट्रेन लेकर प्रतापचंद रवाना हो गए। बीच में पटरियां क्षतिग्रस्त होने के बावजूद खाद्य सामग्री लेकर बमबारी के बीच गडरारोड के लिए रवाना हुए। बीच रास्ते में बमबारी में एक छर्रा उन्हें भी लगा, लेकिन घायल होने के बावजूद वह ट्रेन लेकर गडरारोड पहुंचे और सेना तक खाद्य सामग्री पहुंचाई। उसके बाद प्रतापचंद को तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अशोक चक्र से सम्मानित लगाया।

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