CHAAR DAS (4:10) is a powerful desi hip-hop track about struggle, self-belief, and rising at the darkest hour. Inspired by late-night hustle energy, this motivational rap blends Hindi street poetry with Punjabi intensity. If you grind when the world sleeps, this song is for you.
🔥 Perfect for fans of Indian hip hop, gully rap, motivational rap, and emotional street music.
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Lyrics
[Intro Hook — Immediate Chorus]
चार दस, घड़ी पे चार दस — उठ जा, किस्मत को मार कस
चार दस, घड़ी पे चार दस — रात का डर अब भाग बस
चार दस, आँखों में आग बस — सपनों को पकड़, ना थक बस
चार दस, बोल मेरा साथ — रुकना नहीं, सीधा आगे डैश
[Chorus — Catchy, viral, memorable]
टाइम देखे चार दस — ज़िंदगी बोले “फिर से शुरू कर”
टाइम देखे चार दस — गिर के भी बोल “मैं हूँ इधर”
टाइम देखे चार दस — अँधेरा बोले “अब तू डर”
मैं बोला चार दस पे ही लिखूंगा अपना सफर
[Verse 1]
सुबह से पहले वाली खामोशी मेरी दोस्त
सड़कों पे चलूं अकेला, पर हौसला है होस्ट
जेब में सपने, और दिल में पूरा शहर
नाम मेरा हल्का नहीं, बोझ उठाए ये सफर
स्कूल के दिन, बेंच पे लिखा था “किंग”
अब वही लफ़्ज़ बन गए जीने का इंजन
घर की छत पे बैठ के देखा था आसमान
अब वही आसमान पूछता “क्या तू है तैयार?”
[Pre-Chorus]
कहते थे रुक जा, वक्त तेरा नहीं
मैंने बोला रुकना मेरी फितरत नहीं
जब भी घड़ी ने चार दस बोला
दिल ने कहा “अभी हारना नहीं”
[Chorus]
टाइम देखे चार दस — ज़िंदगी बोले “फिर से शुरू कर”
टाइम देखे चार दस — गिर के भी बोल “मैं हूँ इधर”
टाइम देखे चार दस — अँधेरा बोले “अब तू डर”
मैं बोला चार दस पे ही लिखूंगा अपना सफर
[Verse 2]
माँ की दुआ जेब में मोड़ा सा नोट
पापा का सपना मेरे कंधे पे कोट
दोस्त कम, पर असली सब साथ
झूठ से दूर, सीधी मेरी बात
आज भी याद है वो भूखी सी रात
कल के लिए रखा था आधा सा खाना
अब जब टेबल पे पूरा सामान
दिल फिर भी पूछता “क्या तू है इंसान?”
[Pre-Chorus]
सन्नाटा भी कभी ताली बजाता है
जब बंदा खुद को उठाता है
चार दस पे खुद से वादा
आज का डर कल को हराता है
[Chorus]
टाइम देखे चार दस — ज़िंदगी बोले “फिर से शुरू कर”
टाइम देखे चार दस — गिर के भी बोल “मैं हूँ इधर”
टाइम देखे चार दस — अँधेरा बोले “अब तू डर”
मैं बोला चार दस पे ही लिखूंगा अपना सफर
[Verse 3]
नाम नहीं चाहिए बिना काम के
शोहरत नहीं चाहिए बिना ईमान के
जो मिला मेहनत से वही हक
शॉर्टकट वाले सब लगते फेक
मिट्टी से उठा, मिट्टी तक जाऊँगा
बीच का सफर दुनिया को सुनाऊँगा
अगर गिर गया तो फिर उठूंगा
चार दस मेरा अलार्म बन जाऊंगा
[Pre-Chorus]
हर दिन एक नया इम्तिहान
हर रात एक नई कहानी
पर जब घड़ी पे चार दस आए
लगता खुद की हुई निशानी
[Chorus]
टाइम देखे चार दस — ज़िंदगी बोले “फिर से शुरू कर”
टाइम देखे चार दस — गिर के भी बोल “मैं हूँ इधर”
टाइम देखे चार दस — अँधेरा बोले “अब तू डर”
मैं बोला चार दस पे ही लिखूंगा अपना सफर
[Verse 4]
शहर सोता, पर सोच मेरी जागती
खाली रास्ते पे चाल मेरी भागती
कोई नहीं साथ, पर डर भी नहीं
खुद पे भरोसा ही असली सही
आँखों में प्लान, हाथ में कल
आज का दर्द बना मेरा फ्यूल
चार दस पे लिखा एक रूल
“रुकेगा तो बनेगा फूल”
[Pre-Chorus]
जो टूट गया वो सीख गया
जो सीख गया वो जीत गया
चार दस का वो पल
मुझे खुद से मिल गया
[Chorus]
टाइम देखे चार दस — ज़िंदगी बोले “फिर से शुरू कर”
टाइम देखे चार दस — गिर के भी बोल “मैं हूँ इधर”
टाइम देखे चार दस — अँधेरा बोले “अब तू डर”
मैं बोला चार दस पे ही लिखूंगा अपना सफर
[Bridge — Emotional shift]
अगर सब छोड़ के चले जाएँ
और रास्ते भी खो जाएँ
बस एक घड़ी, एक पल, एक सांस
चार दस पे खुद को पाएँ
[Instrumental Break]
(बांसुरी और तुंबी के साथ बीट ड्रॉप)
[Final Chorus — Repeat twice]
चार दस, घड़ी पे चार दस — उठ जा, किस्मत को मार कस
चार दस, घड़ी पे चार दस — रुकना नहीं, सीधा आगे डैश
(दोहराएँ)
[Outro — Fade out]
चार दस… चार दस…
हर रात के बाद सुबह पास…
चार दस… चार दस…
मेरा वक्त, मेरी आवाज…
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