राम नाम का जाप मन की पीड़ा को समाप्त कर चित्त को स्वस्थ रखता है। स्वामी जी ने अमृतवाणी में स्वयं कहा है राम नाम जपना बहुत पुण्य कर्म है। राम नाम पापों का नाश करने वाला है। जो साधक राम नाम का सिमरन करता है, उसका मन पवित्र होता है।
राम नाम जाप करने के लिए कोई भी विधि-विधान जरूरी नहीं है अगर आप के पास समय नहीं है तो आप चलते फिरते भी ले सकते है। राम नाम का जाप कभी भी, कहीं भी, किसी भी समय, किसी भी स्थान और किसी भी परस्थिति में ले सकते है। राम नाम का जाप ह्रदय से मन ही मन या फिर बोल कर भजन के रूप में कर सकते है।
सर्वशक्तिमते परमात्मने श्री रामाय नम: (7 बार)
(नमस्कार सप्तक)
करता हूं मैं वन्दना, नत शिर बारम्बार ।
तुझे देव परमात्मन्, मंगल शिव शुभकार ।। १ ।।
अंजलि पर मस्तक किये, विनय भक्ति के साथ ।
नमस्कार मेरा तुझे, होवे जग के नाथ ।। २ ।।
दोनों कर को जोड़ कर, मस्तक घुटने टेक ।
तुझ को हो प्रणाम मम, शत शत कोटि अनेक ।। ३ ।।
पाप-हरण मंगल-करण, चरण शरण का ध्यान ।
धार करूँ प्रणाम मैं, तुझ को शक्ति-निधान ।। ४ ।।
भक्ति-भाव शुभ-भावना, मन में भर भरपूर ।
श्रद्धा से तुझ को नमूँ, मेरे राम हजूर ।। ५ ।।
ज्योतिर्मय जगदीश हे, तेजोमय अपार ।
परम पुरुष पावन परम, तुझ को हो नमस्कार ।। ६ ।।
सत्यज्ञान आनन्द के, परम धाम श्री राम ।
पुलकित हो मेरा तुझे होवे बहु प्रणाम ।। ७ ।।
परमात्मा श्री राम परम सत्य, प्रकाश रूप, परम ज्ञानानन्दस्वरूप,
सर्वशक्तिमान्, एकैवाद्वितीय परमेश्वर, परम पुरुष, दयालु देवाधिदेव है,
उसको बार-बार नमस्कार, नमस्कार, नमस्कार, नमस्कार ।।
Ram Sharnam | राम शरणम्
जो भावनावान भावुक जन, भागवती भक्ति - भागीरथी में स्नान करने के इच्छुक हैं, जो भक्ति धर्म के मर्म को जानना चाहते हैं, और जो भक्ति योग के सच्चे, सरल, सरस, सुपथ पर चलने के अभिलाषी हैं उनको स्वामी सत्यानन्द - रचित ग्रन्थ सुमननपूर्वक पढ़ने चाहिए
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