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Скачать или смотреть कलयुग विनाश ऐसे होगा

  • Throttle Fallout
  • 2025-05-11
  • 688
कलयुग विनाश ऐसे होगा
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Скачать कलयुग विनाश ऐसे होगा бесплатно в качестве 4к (2к / 1080p)

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Описание к видео कलयुग विनाश ऐसे होगा

स्क्रिप्ट: "कलयुग का अंत कैसे होगा"
भाग 1: भूमिका और प्रारंभिक संकेत
(1) प्रस्तावना
दोस्तों, जब हम “कलयुग” का नाम सुनते हैं, तो हमारे मन में एक ऐसा युग उभरता है जिसमें अधर्म, लोभ, मोह, ईर्ष्या, हिंसा और पापों का बोलबाला है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस अंधकारमय युग का अंत कैसे होगा? क्या यह अचानक समाप्त होगा या इसके कुछ स्पष्ट संकेत पहले से ही दिखाई देंगे? इस प्रश्न का उत्तर हमें शास्त्रों, पुराणों, भविष्यवाणियों और आधुनिक समाज की दशा-दिशा से मिल सकता है।

(2) युग चक्र की संकल्पना
सनातन धर्म के अनुसार समय एक चक्र है—जिसमें चार युग आते हैं:

सतयुग (धर्म का पूर्ण स्वरूप),

त्रेतायुग (धर्म 3/4),

द्वापरयुग (धर्म आधा),

और फिर आता है कलयुग, जिसमें धर्म का केवल 1/4 अंश शेष रह जाता है।

(3) कलयुग की विशेषताएँ
कलयुग की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें पाप का प्रभाव बहुत तेज़ी से फैलता है। धर्म की जगह अधर्म को महत्व मिलता है। लोग धन और भोग को ही ईश्वर मानने लगते हैं। रिश्ता, भावना, करुणा—all fade.

(4) शास्त्रीय आधार: कलयुग का अंत कैसे होता है?
भागवत पुराण (स्कंध 12) में कलयुग के अंत के बारे में बहुत स्पष्ट वर्णन है।
श्रीमद्भागवत के अनुसार—

"जब मनुष्य अधर्म में पूरी तरह डूब जाएँगे, जब राजा केवल कर वसूलने वाले बन जाएंगे, जब स्त्रियाँ केवल व्यापार और भोग की वस्तु समझी जाएँगी, जब संतों और गुरुओं का अपमान होगा—तब कलयुग अपने अंतिम चरण में प्रवेश करेगा।"

(5) कल्कि अवतार का आगमन
शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु का अंतिम अवतार 'कल्कि' होगा।

वे एक घोड़े पर सवार होंगे।

उनके हाथ में तलवार होगी।

वे अधर्मियों का संहार करेंगे।

वे ही इस कलियुग का समापन कर सतयुग की पुनः स्थापना करेंगे।

(6) आधुनिक समाज में संकेत
अब आइए ज़रा देखें कि हमारे वर्तमान समाज में कौन-कौन से संकेत दिखाई दे रहे हैं, जो कलियुग के अंत की ओर इशारा करते हैं—

नैतिक मूल्यों का ह्रास

परिवारों का विघटन

धर्म के नाम पर व्यापार

नेताओं की क्रूरता

तकनीक का दुरुपयोग

पर्यावरण का विनाश

इंसानियत का अंत

क्या ये सभी संकेत वही नहीं हैं जो भागवत पुराण और अन्य शास्त्रों में बताए गए हैं?

(7) विज्ञान की दृष्टि से विनाश के संकेत
आधुनिक वैज्ञानिक भी यह मानते हैं कि पृथ्वी पर जीवन के अंत के कई खतरे मंडरा रहे हैं:

जलवायु परिवर्तन

परमाणु युद्ध का खतरा

महामारी

AI और मशीनों का नियंत्रण

ये सभी उस अंतिम परिवर्तन की भूमिका बना रहे हैं जिसे हम ‘कलयुग का अंत’ कहते हैं।

(8) धर्म और अधर्म की लड़ाई
हर युग की तरह इस युग में भी एक अंतिम युद्ध होगा—

यह युद्ध केवल तलवारों या मिसाइलों से नहीं होगा,

यह युद्ध विचारों का होगा,

यह युद्ध अच्छाई और बुराई के बीच होगा,

यह युद्ध भीतर और बाहर दोनों जगह लड़ा जाएगा।

(9) कल्कि अवतार का कार्य
जब धर्म पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा, जब अधर्म ही व्यवस्था बन जाएगा, तब कल्कि अवतार का प्रकट होना निश्चित है। वे—

नई चेतना का संचार करेंगे

अधर्मी शक्तियों का विनाश करेंगे

और फिर एक नये युग की शुरुआत करेंगे—जहाँ सत्य, प्रेम, और करुणा ही धर्म होंगे।

यह पहला भाग है। यदि आप चाहें तो मैं अगला भाग भी भेजना शुरू कर सकता हूँ (अगले 5,000 शब्द)। क्या मैं भाग 2 शुरू करूँ?







You said:
han
ChatGPT said:
अच्छा, अब मैं भाग 2 प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसमें हम "कलयुग का अंत" विषय को और गहराई से समझेंगे। इसमें हम कुछ और ग्रंथों, भविष्यवाणियों, सामाजिक संकेतों और मानसिक स्तर पर हो रहे पतन को विस्तार से देखेंगे।

स्क्रिप्ट: "कलयुग का अंत कैसे होगा"
भाग 2: ग्रंथों की गवाही, समाज की गहराई
(10) गरुड़ पुराण की भविष्यवाणियाँ
गरुड़ पुराण में वर्णन मिलता है कि कलयुग में—

मनुष्य केवल अपने स्वार्थ में जीएँगे।

माता-पिता का अपमान होगा।

धनवान ही धार्मिक माने जाएँगे।

भूख, भय, और छल कपट हर दिशा में फैलेगा।

स्त्रियाँ अपनी लज्जा और मर्यादा को त्याग देंगी।

ये संकेत दर्शाते हैं कि युग धीरे-धीरे अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है।

(11) नारद संहिता और भविष्य पुराण की दृष्टि से
इन ग्रंथों के अनुसार—

“जब गायों का पालन केवल दूध के लिए किया जाएगा, जब न्याय बिकेगा, जब बच्चे माता-पिता के शत्रु हो जाएँगे, जब धर्म केवल दिखावे के लिए किया जाएगा—तब जान लो कि कलयुग अपने अंतिम समय में है।”

(12) धर्म का पतन: शास्त्र बनाम व्यवहार
आज धर्म केवल एक व्यापार बन चुका है:

मंदिरों में चढ़ावा करोड़ों में होता है, परंतु भूखे को रोटी नहीं मिलती।

गुरुओं के आश्रम राजमहलों से बड़े हैं, लेकिन वहाँ करुणा की जगह केवल चमत्कार बिकते हैं।

धर्मग्रंथ पढ़े नहीं जाते, सिर्फ वीडियो क्लिप में काट-छांट कर सुनाए जाते हैं।

ये सभी कलयुग के लक्षण हैं—जहाँ धर्म का वास्तविक स्वरूप मिटता जा रहा है।

(13) नारी की स्थिति: कलयुग का दर्पण
शास्त्रों में नारी को देवी स्वरूप कहा गया है। परंतु कलयुग में:

नारी को विज्ञापनों की वस्तु बना दिया गया है।

नारी के वस्त्रों की नहीं, उसकी आत्मा की लूट हो रही है।

घरों में स्त्रियाँ असुरक्षित हैं, समाज में तिरस्कृत।

नारी का अपमान, किसी भी युग के अंत की सबसे बड़ी चेतावनी होती है।

(14) युवा पीढ़ी: दिशा हीन या दिशाभ्रमित?
आज की युवा पीढ़ी—

सोशल मीडिया के जाल में उलझ चुकी है।

बड़ों का आदर नहीं करती, अपने अहंकार को ही ज्ञान मानती है।

ना ध्यान है, ना साधना है, ना लक्ष्य है।

ब्रह्मचर्य और संयम जैसे शब्द अब केवल किताबों तक सीमित हैं।

एक युग तब मरता है जब उसकी युवा पीढ़ी मार्ग से भटक जाती है।

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