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सावरकर बीसवीं सदी के सर्वाधिक विवादास्पद राजनीतिज्ञ हैं. हिंदुत्व की राजनीति उनका हथियार थी, तो हिंदू जागरण उनका लक्ष्य...अपने हिंदूवादी विचारों को लेकर वे इस कदर कट्टर थे कि अपने जीवन भर महात्मा गांधी की शांति, अहिंसा और दर्शन के साथ-साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सबसे सशक्त विरोधी बनकर खड़े रहे...चर्चित इतिहासकार विक्रम सम्पत का मानना है कि सावरकर के बारे में या तो भक्तिभाव से लिखा गया या फिर घृणा के भाव से, जबकि सावरकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हिंदू समुदाय की मुखर आवाज़ थे. एक कथित नास्तिक और कट्टर तर्कवादी के रूप में उन्होंने अंतर्जातीय विवाह का समर्थन किया और गाय की पूजा को अंधविश्वास मानकर खारिज कर दिया था. उन्हें एक दशक से भी ज़्यादा तक अंडमान की सेल्युलर जेल में रखा गया, जहां उन्हें अकल्पनीय यातनाएं दी गई. दावा किया जाता है कि सावरकर शुरू में हिंदू-मुस्लिम एकता के बड़े पैरोकार थे, पर सेल्युलर जेल जाने के बाद ‘हिंदुत्व’ के प्रवक्ता बन गए. वरिष्ठ पत्रकार जय प्रकाश पाण्डेय ने साहित्य तक के बुक कैफे के 'एक दिन, एक किताब' कार्यक्रम में विक्रम सम्पत की हिंदी में आई नई पुस्तक 'सावरकरः एक भूले-बिसरे अतीत की गूंज' की चर्चा की है. विक्रम सम्पत की यह पुस्तक सावरकर के जीवन पर एक शोधपूर्ण दस्तावेज सरीखी है. इस पुस्तक को लिखने से पहले विक्रम सम्पत ने पांच साल तक अध्ययन किया और यूरोप की यात्रा भी की थी. लेखक ने सावरकर के द्वारा निकाले गए पत्र-पत्रिकाओं के अध्ययन के बाद उनके चित्र भी दस्तावेज के रूप में किताब में सहजे हैं. लेखक का कहना है कि इस पुस्तक की आवश्यकता इसलिए थी क्योंकि सावरकर को सही ढंग से नहीं समझा गया. इस पुस्तक को दो खंडों में बांटा गया है. इस शोधपूर्ण जीवनी का पहला खंड सावरकर के जीवन और दर्शन को एक नए दृष्टिकोण से देखने का प्रयास करता है और उनके व्यक्तित्व को उनकी कमज़ोरियों और उपलब्धियों के दायरे में देखता है. दो खंडों में अंग्रेजी में प्रकाशित इन पुस्तकों के नाम हैं 'Savarkar: Echoes from a Forgotten Past, 1883-1924', 'Savarkar: A Contested Legacy, 1924-1966' है. हिंदी में पहले खंड की पुस्तक का अनुवाद संदीप जोशी ने किया है. नाम है- 'सावरकरः एक भूले-बिसरे अतीत की गूंज'. पेंग्विन रैंडम हाउस के सहयोगी उपक्रम हिन्द पॉकेट बुक्स द्वारा प्रकाशित 514 पृष्ठों की इस पुस्तक का मूल्य 450 हैं.
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साहित्य तक का 'बुक कैफे' पुस्तक प्रेमियों को समर्पित कार्यक्रम है. पाठकों, प्रकाशकों, लेखकों से मिले प्यार और अनुरोध के बाद 'बुक कैफे' अब सप्ताह में पांच दिन सोमवार से शुक्रवार तक 'एक दिन, एक किताब' के रूप में आपके समक्ष आ रहा है. इस कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार जय प्रकाश पाण्डेय हर दिन आपको एक नई किताब के बारे में बताते हैं. इस कार्यक्रम में आप कैसी किताबों की चर्चा चाहते हैं, इन पर अपनी राय हमें जरूर लिखें. अगर आप प्रकाशक हैं, तो आपके नए प्रकाशनों का स्वागत करने में हमें खुशी होगी, बशर्ते वे हमारी कसौटी पर खरा उतरें.
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