🌟सभी पाइंटस का सार है सभी को सार में समाए बिन्दु बन जाओ। यह अभ्यास निरंतर रहता है?🌟कोई भी कर्म करते हुए यह स्मृति रहती है कि - मैं ज्योतिबिन्दु इन कर्मेन्द्रियों द्वारा यह कर्म कराने वाला हूँ।
👉सार स्वरूप में स्थित हो विस्तार में आने से कोई भी प्रकार के विस्तार की आकर्षण नहीं होगी।👉विस्तार को देखते, सुनते, वर्णन करते ऐसे अनुभव करेंगे जैसे एक खेल कर रहे हैं।👉 ऐसा अभ्यास सदा कायम रहे। इसको ही ‘सहज याद' कहा जाता है।
🌟जीवन के हर कर्म में दो शब्द काम में आते हैं, चाहे ज्ञान में, चाहे अज्ञान में। वह कौन से? - मैं और मेरा। इन दो शब्दों में ज्ञान का भी सार है। मैं ज्योति-बिन्दु वा श्रेष्ठ आत्मा हूँ। ब्रह्माकुमार वा कुमारी हूँ।👉 और मेरा तो एक बाप दूसरा न कोई। मेरा बाबा इसमें सब आ जाता है। मेरा बाबा अर्थात् मेरा वर्सा हो ही गया। तो यह ‘मैं' और ‘मेरा' दो शब्द तो पक्का है ना! 👉मेरा बाबा कहने से अनेक प्रकार का मेरा समा जाता है।
इसी दो शब्दों से मायाजीत,निर्विघ्न,मास्टर सर्वशक्तिवान बन सकते हो। दो शब्दों को भूलते हो तो माया हजारों रूपों में आती है।👉आज एक रूप में आयेगी, कल दूसरे रूप में। क्योंकि माया का मेरा-मेरा' बहुत लम्बा चौड़ा है। और मेरा बाप तो एक ही है।👉 एक के आगे माया के हजार रूप भी समाप्त हो जाते हैं।
👉सिर्फ ‘मेरा बाबा', फिर उसमें ही मगन रहेंगे।🌟 ज्ञान और योग दोनों के मेल से माया की समस्याओं का बन्धन खत्म हो गया, यह खुशखबरी सुनाओ।🌟 फरिश्ता और देवता दोनों का लास्ट घड़ी मेल होगा। देवतायें आप सब फरिश्तों के लिए वरमाला लेकर के इन्तजार कर रहे हैं फरिश्तों को वरने लिए। आपका ही देवपद इन्त- जार कर रहा है। 👉देवताओं की प्रवेशता सम्पन्न शरीर में होगी ना। वह इन्तजार कर रहे हैं कि यह 16 कला सम्पन्न बनें और वरमाला पहनें।👉सूक्ष्मवतन में सम्पन्न फरिश्ते स्वरूप और देवताओं के मिलन का दृश्य बहुत अच्छा होता है।👉 निर्विघ्न भव की स्टेज कुछ समय लगातार चाहिए। तब बहुतकाल निर्विघ्न राज्य कर सकेंगे। 🌟अभी समस्याओं के और समाधान के भी नालेजफुल हो गये हो। जो बात किससे पूछते हो उससे पहले नालेज के आधार से समझते भी हो कि यह ऐसा होना चाहिए। 👉दूसरे से मेहनत लेने के बजाय, समय गंवाने के बजाय क्यों न उसी नालेज की लाइट और माइट के आधार पर सेकेण्ड में समाप्त करके आगे बढ़ते हो? 👉सिर्फ क्या है कि माया दूर से ऐसी परछाई डालती है जो निर्बल बना देती है। 👉आप उसी घड़ी कनेक्शन को ठीक करो। कनेक्शन ठीक करने से मास्टर सर्वशक्तिवान स्वत: हो जायेंगे।👉योग का वायुमण्डल वायब्रेशन बनाने के लिए सहयोग भल लो, बाकी और व्यर्थ बातें करना वा विस्तार में जाना इसके लिए कोई का साथ न लो। 👉मेरा ड्रामा में नहीं है, मेरे को सहयोग नहीं मिला, मेरे को स्थान नहीं मिला। यह सब फालतू बातें हैं। सब मिल जावेगा सिर्फ कनेक्शन को ठीक करो तो सर्व शक्तियाँ आपके आगे घूमेंगी।👉 बापदादा के सामने जाकर बैठ जाओ तो कनेक्शन जोड़ने के लिए बापदादा आपके सहयोगी बन जायेंगे।👉थोड़ा सा जो टूटा हुआ कनेक्शन है उसको जोड़ने में एक सेकेण्ड वा मिनट लग भी जाता है तो हिम्मत नहीं हारो।👉बाबा मेरा,मैं बाबा का-इसी आधार से निश्चय की फाउन्डेशन को और ही पक्का करो।👉बाप को भी अपने निश्चय के बन्धन में बाँध सकते हो। बाप भी जा नहीं सकते। इतनी अथार्टी इस समय बच्चों को मिली हुई है।👉परिवार के सहयोग को यूज़ करो। कम्पलेन्ट लेकर नहीं जाओ,सहयोग की भी माँग नहीं करो। प्रोग्राम सेट करो,कमजोर हो कर नहीं जाओ,क्या करूँ,कैसे करूँ, घबरा के नहीं जाओ।👉लेकिन सम्बन्ध के आधार से,सहयोग के आधार से जाओ। समझा! सेकेण्ड में सीढ़ी नीचे,सेकेण्ड में ऊपर,यह संस्कार चेन्ज करो।👉सच्चाई और सफाई की लिस्ट के कारण आगे भी बढ रहे हैं। यह विशेषता नम्बरवन है।👉अब सिर्फ घबराने की डान्स को छोड़ो तो बहुत फास्ट जायेंगे। नम्बर बहुत आगे ले लेंगे। यह बात तो सबको पक्की है कि ‘लास्ट सो फास्ट, फास्ट सो फर्स्ट'। खुशी की डान्स भल करो। 👉बाप का हाथ छोड़ते हो तो बाप को भी अच्छा नहीं लगता कि यह कहाँ जा रहे हैं!👉बाप के हाथ में हाथ हो फिर तो घबराने की डान्स हो नहीं सकती। माया का हाथ पकड़ते हो तब वह डान्स होती है।👉 बाप का इतना प्रेम है आप लोगों से, जो दूसरे के साथ जाना देख भी नहीं सकते।👉✨️ साकार रूप में भी देखा, स्थूल में भी बच्चे कहाँ जाते थे तो बच्चों को कहते थे - ‘आओ बच्चे, आओ बच्चे।' जब माया अपना रूप दिखावे तो यह शब्द याद करना।
🌟अमृतवेले की याद पावरफुल बनाने के लिए पहले अपने स्वरूप को पावरफुल बनाओ। चाहे बिन्दु रूप हो बैठो, चाहे फरिश्ता स्वरूप हो बैठो।👉 बाप को बिन्दु रूप में या फरिश्ते रूप में देखने की कोशिश करते लेकिन जब तक खुद नहीं बने हैं तब तक मिलन मना नहीं सकते। 👉इसलिए पहले स्वस्व रूप को चेन्ज करने का अभ्यास करो। फिर बहुत पावरफुल स्टेज का अनुभव होगा।🌟 किसी को खुशी देना यह सबसे बड़े ते बड़ा पुण्य का कार्य है। 🌟गणेश वह हैं जो पेट में सब बातें छिपाने वाले हैं।👉हनुमान-पूँछ से आसुरी संस्कार जलाने वाला है। पाण्डवों की यह विशेषता है-बात पचाने वाले हैं, इधर-उधर करने वाले नहीं।👉पाण्डवपति पाण्डवों के सिवाए कुछ नहीं कर सकते। जैसे शिवशक्ति है, वैसे पाण्डवपति।🌟तो सदा कम्बाइन्ड रूप याद रहता है? कभी अपने को अकेले तो नहीं महसूस करते हो?👉जो सदा कम्बाइन्ड रूप में रहते हैं उसके आगे बापदादा साकार में जैसे सब सम्बन्धों से सामने होते हैं।👉जितनी लगन होगी उतना जल्दी बाप सामने होगा। यह नहीं निराकार है, आकार है बातें कैसे करें?
👉 यहाँ तो ढूंढने व टाइम की भी जरूरत नहीं। जहाँ बुलाओ वहाँ हाजिर। इसलिए कहते हैं हाजिरा हजूर। 🌟अभी तो दिन-प्रतिदिन ऐसे देखेंगे कि जैसे प्रैक्टिकल में अनुभव किया कि आज बापदादा आये,सामने आये हाथ पकड़ा,बुद्धि से नहीं,ऑखों से देखेंगे,अनुभव होगा। 👉लेकिन इसमें सिर्फ ‘एक बाप दूसरा न कोई', यह पाठ पक्का हो। फिर तो जैसे परछाई घूमती है ऐसे बापदादा ऑखों से हट नहीं सकते।
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